UPSC-UKPSC की तैयारी अब मुफ्त में कर सकेंगे दिव्यांग युवा, देहरादून और हल्द्वानी में खुले कोचिंग सेंटर
CM Dhami: उत्तराखंड के दिव्यांग युवाओं के लिए सिविल सेवा में जाने का रास्ता आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना शुरू की है. इसके तहत पात्र अभ्यर्थियों को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की परीक्षाओं की तैयारी मुफ्त में कराई जाएगी. योजना का उद्देश्य आर्थिक और अन्य बाधाओं के कारण पीछे रह जाने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर तैयारी का अवसर देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. इसके लिए देहरादून और हल्द्वानी में कोचिंग केंद्र शुरू किए गए हैं, ताकि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अभ्यर्थियों को सुविधा मिल सके.
मुफ्त कोचिंग के साथ रहने और खाने की सुविधा
योजना के तहत पात्र अभ्यर्थियों को आवासीय और गैर-आवासीय, दोनों तरह से कोचिंग की सुविधा मिलेगी. दूरदराज के इलाकों से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए मुफ्त हॉस्टल और भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी. वहीं, गैर-आवासीय अभ्यर्थियों को मासिक परिवहन भत्ता देने का प्रावधान है. इससे उन युवाओं को मदद मिलने की उम्मीद है, जिन्हें आर्थिक परेशानी या आने-जाने की दिक्कतों के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मुश्किल होती है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करने की बात कही है.
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दिव्यांग अभ्यर्थियों की जरूरतों के हिसाब से होगी पढ़ाई
कोचिंग केंद्रों पर दिव्यांग अभ्यर्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए ब्रेल लिपि की किताबें, ऑडियो लेक्चर और स्क्रीन रीडर के अनुकूल डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी. केंद्रों पर रैंप, लिफ्ट, विशेष शौचालय और व्हीलचेयर के अनुकूल बैठने की व्यवस्था भी होगी. इसके अलावा, कंप्यूटर लैब, डिजिटल टैबलेट, नियमित मॉक टेस्ट और व्यक्तिगत मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. मूक-बधिर अभ्यर्थियों की सहायता के लिए सांकेतिक भाषा जानने वाले शिक्षकों की व्यवस्था भी की जाएगी.
अनुभवी शिक्षकों और अधिकारियों से मिलेगा मार्गदर्शन
योजना के तहत अभ्यर्थियों को भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, अर्थव्यवस्था, भूगोल और समसामयिक घटनाओं जैसे विषयों की तैयारी कराई जाएगी. इसके लिए अनुभवी शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी. सेवानिवृत्त और सेवारत आईएएस, आईपीएस तथा राज्य सिविल सेवा के अधिकारी अभ्यर्थियों को परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देंगे. इससे युवाओं को परीक्षा की रणनीति समझने और अपनी तैयारी बेहतर करने में मदद मिल सकती है.
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थी का उत्तराखंड का स्थायी या मूल निवासी होना जरूरी है. उसके पास कम से कम 40 प्रतिशत प्रमाणित दिव्यांगता होनी चाहिए. साथ ही, उसे संबंधित परीक्षा के शैक्षणिक मानकों को पूरा करना होगा. इसके लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या अंतिम वर्ष में होने की शर्त बताई गई है. परिवार की वार्षिक आय भी सरकार की ओर से तय मानकों के अनुरूप होनी चाहिए. चयन की प्रक्रिया और अन्य शर्तों की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक दिशा-निर्देशों से की जानी चाहिए.
सीएम धामी बोले- युवाओं को मिलेंगे समान अवसर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना से दिव्यांग युवाओं को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने के समान अवसर मिलेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का हर दिव्यांग युवा शिक्षा हासिल कर सके, अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सके.
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