3 नवंबर को बनेगा Gajakesari Rajyog, इन 3 राशियों को होगा बड़ा धनलाभ
इस बार 3 नवंबर 2026 को गजकेसरी राजयोग बनने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में गजकेसरी राजयोग को सबसे ज्यादा शुभ और प्रभावशाली योगों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा की विशेष युति बनती है, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान, बुद्धि और आर्थिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।
इस लेख में गजकेसरी राजयोग को लेकर खासतौर पर उन राशियों की चर्चा की जा रही है, जिन्हें इस अवधि में धन लाभ और तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। आइए आपको बताते हैं 3 नवंबर 2026 को बनने वाले इस कथित गजकेसरी राजयोग से किन 3 राशियों को लाभ प्राप्त होने वाला है।
मेष राशि
मेष राशि के जातकों को लिए यह अवधि आर्थिक मामलों में पॉजिटिव संभावनाएं लेकर आ रहा है। जो लोग नौकरी करते हैं, उनको अपने काम में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त हो सकता है। वहीं वरिष्ठ अधिकारी आपकी मेहनत पर ध्यान दे सकते हैं और नई जिम्मेदारियों मिलने की संभावना भी बनेगी।
अगर आप लंबे समय से नौकरी में बदलाव या पदोन्नति की उम्मीद कर रहे हैं, तो अपने प्रयास जारी रखना फायदेमंद हो सकता है। बिजनेस संबंधित मामलों में किसी पुराने सौदे से लाभ मिलने या नए कारोबारी संपर्क बनने के संकेत मिल सकते हैं।
सिंह राशि
गुरु और चंद्रमा की युति से बनने रहे योग से सिंह राशि के जातकों के लिए करियर तथा आर्थिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कार्यक्षेत्र में आपकी योग्यता को नई पहचान मिलेगी। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी, पदोन्नति या वेतन वृद्धि से संबंधित उम्मीद नजर आ सकती हैं। अगर आप किसी भी नए प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं, तो इसमें आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे।
आर्थिक मामलों में स्थिति को बेहतर बनाने के लिए नए रास्ते तलाश सकते हैं। परिवार में भौतिक सुविधाओं से संबंधित कोई योजना आगे बढ़ सकती है। लेकिन आमदनी बढ़ने की उम्मीद में अनावश्यक खर्च करने से बचें और बचत पर भी ध्यान देने की जरुरत है।
धनु राशि
धनु राशि के लोगों को राजयोग तरक्की और आर्थिक संभावनाओं के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। नौकरी करने वाले को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। किसी भी नई जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण कार्य में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। अगर आप लंबे समय से किसी लक्ष्य को पाने के लिए कोशिश कर रहे हैं, उन्हें अपनी रणनीति में सुधार करने से फायदा मिल सकता है। कारोबारियों के लिए नए संपर्क और व्यावसायिक योजनाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं।
आय के नए सोर्स मिलेंगे, वहीं पुराने काम पूरे होने से आर्थिक स्थिति को राहत मिलेगी। किसी भी नई योजना में पैसा लगाने से पहले उसके जोखिम और लाभ का आकलन जरुर करें। सहीं निर्णय, निरंतर मेहनत और समझदारी के साथ लिए गए फैसले आपके आगे की राह बदल देंगे।
Nirmala Sitharaman ने बताया मजबूत Dollar और AI रेस के कारण Share Market छोड़ रहे विदेशी निवेशक
भारतीय शेयर बाजार में पिछले 2 साल से निवेशकों को खास फायदा नहीं मिला है। सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स इस दौरान सकारात्मक रिटर्न देने में नाकाम रहे हैं। इस स्थिति पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बाजार में आसानी से पैसा लगाने और निकालने की सुविधा के कारण निवेशक अब शेयरों से बाहर निकलने का फैसला भी तेजी से ले रहे हैं। उनके मुताबिक, बाजार में नकदी की उपलब्धता जहां कारोबार को सहारा देती है, वहीं इससे बिकवाली भी आसान हो जाती है।
निर्मला सीतारमण ने बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की बैठकों के दौरान सीएनबीसी को दिए साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना देश के सामने एक बड़ी चुनौती बन सकता है। उन्होंने इसे 2027 में भारत के लिए अहम जोखिमों में से एक बताया।
भारतीय शेयर बाजार पर इस साल भी दबाव बना हुआ है। जनवरी से अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। व्यापार को लेकर अनिश्चितता और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन इसका असर शेयर बाजार में निवेशकों के भरोसे पर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2024 से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 63.6 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। इससे पहले के 9 वर्षों में उन्होंने लगभग 63.5 अरब डॉलर का निवेश किया था। इस तरह पिछले वर्षों में आया विदेशी पैसा हालिया बिकवाली के कारण लगभग पूरी तरह बाहर निकल गया है। राष्ट्रीय प्रतिभूति डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2015 से विदेशी निवेश का कुल शुद्ध आंकड़ा अब लगभग शून्य के आसपास पहुंच गया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली 2026 में और तेज हुई है। उन्होंने इस साल भारतीय शेयरों से 32.8 अरब डॉलर निकाले हैं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 18.9 अरब डॉलर था। मार्च में सबसे ज्यादा 12.7 अरब डॉलर की निकासी हुई। इसके बाद अप्रैल में 6.5 अरब डॉलर और जून में 5.2 अरब डॉलर निकाले गए।
इस बिकवाली के पीछे अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बढ़ता रिटर्न, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भारतीय बाजार से मिलने वाले कम रिटर्न जैसे कारण बताए जा रहे हैं। वहीं, भारत में घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को सहारा दे रहा है। भारतीय म्यूचुअल फंड संघ के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2021 से शेयर आधारित म्यूचुअल फंड में हर महीने शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार में नकदी बनी हुई है और पुराने निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका भी मिल रहा है।
गौरतलब है कि एआई से जुड़ी कंपनियों में बढ़ती दिलचस्पी के कारण ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों को विदेशी निवेश का फायदा मिला है। गोल्डमैन सैक्स की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत के प्रमुख शेयर इंडेक्स में ताइवान की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया की 22 प्रतिशत हो गई है। वहीं, भारत की हिस्सेदारी कुछ साल पहले के 19 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है।
सीतारमण ने कहा कि अमेरिका और एआई से जुड़े क्षेत्रों की ओर पूंजी का जाना चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि दुनिया में एआई से जुड़ा निवेश बुलबुला फूटता है, तो भारत पर इसका असर सीमित रह सकता है, क्योंकि यहां दूसरे देशों की तरह बड़े पैमाने पर ऐसा निवेश नहीं आया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत एडवांस तकनीक के मामले में अब पीछे नहीं है और देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में निवेश किया जा रहा है। ऐसे में बाजार की आगे की चाल विदेशी पूंजी, घरेलू निवेश और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर रहने वाली है।
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