Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा, 5G ब्रॉडबैंड और AI के दम पर डिजिटल क्रांति की नई नींव।
भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। डिजिटल परिदृश्य अब केवल स्मार्टफोन पर वीडियो देखने या कॉलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड जैसी आधुनिक तकनीकें व्यापार और दैनिक जीवन का मुख्य आधार बन चुकी हैं। 'SMC ग्लोबल' के अनुसार, भारतीय टेलीकॉम और डिजिटल सेवा क्षेत्र विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक है। इस उछाल के पीछे डेटा खपत में तीव्र वृद्धि, 5G का तेजी से होता रोलआउट और फिक्स्ड फाइबर ब्रॉडबैंड का विस्तार मुख्य कारक हैं। इस बदलते परिदृश्य के बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई Jio Platforms Limited (JPL) अपनी नई और बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है।
इस बदलते बाज़ार में, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की डिजिटल इकाई, Jio Platforms Limited (JPL), अपनी अगली बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का IPO, जिसकी वैल्यू लगभग 30,213 करोड़ रुपये है, 21 अक्टूबर 2026 को खुलने वाला है। ब्रोकरेज रिपोर्टों के मुताबिक, 5G, ब्रॉडबैंड, AI और विदेशी बाज़ारों में टेक्नोलॉजी बेचना, Jio की भविष्य की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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अनुमान है कि जून 2026 तक Jio के ग्राहकों की संख्या बढ़कर 533.3 मिलियन हो जाएगी। इसके बावजूद, कंपनी के पास नए ग्राहक जोड़ने और मौजूदा ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क पर लाने का बड़ा मौक़ा है। GEPL कैपिटल के अनुसार, जून 2026 तक लगभग 261 मिलियन मोबाइल यूज़र्स अभी भी 2G नेटवर्क पर थे। Jio इन ग्राहकों को सस्ते फोन और डिजिटल सेवाओं का बंडल देकर 4G और 5G नेटवर्क पर ला सकता है।
कंपनी के ARPU में बढ़ोतरी
कंपनी के प्रति यूज़र औसत मासिक राजस्व (ARPU) में भी वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2024 में 181.7 रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 215.6 रुपये हो गया है। प्रति यूज़र मासिक डेटा खपत भी 43.7 GB तक पहुँच गई है। उम्मीद है कि प्रीमियम प्लान और OTT सेवाएँ राजस्व (रेवेन्यू) बढ़ाने में मदद करेंगी। ब्रॉडबैंड कारोबार में भारी संभावनाएं
जून 2026 तक, जियो के पास जियोफाइबर (JioFiber) और जियोएयरफाइबर (JioAirFiber) के कुल 28.6 मिलियन ग्राहक थे। भारत में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पहुंच अभी काफी सीमित है। GEPL कैपिटल के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में यह लगभग 21 प्रतिशत थी और वित्त वर्ष 2031 तक इसके 46 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसलिए, जियोएयरफाइबर उन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकता है, जहां फाइबर केबल बिछाना मुश्किल या महंगा है।
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AI और टेक्नोलॉजी के जरिए कमाई बढ़ाने की तैयारी
जियो अब केवल एक टेलीकॉम कंपनी बने रहने के बजाय अपने टेक्नोलॉजी कारोबार का विस्तार करना चाहती है। कंपनी ने अपना खुद का 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क सिस्टम विकसित किया है और 4G, 5G, 6G, AI तथा डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं। इसके AI प्लेटफॉर्म, 'जियोब्रेन' (JioBrain) का इस्तेमाल नेटवर्क ऑपरेशंस और अन्य डिजिटल सेवाओं में किया जा रहा है।
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विदेशों में भी टेक्नोलॉजी बेचने की योजना
जियो अपनी 5G, क्लाउड और AI टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों की टेलीकॉम कंपनियों को उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। इससे भारत के बाहर कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक असर कंपनी की भविष्य की कमाई और मुनाफे पर निर्भर करेगा।
आंकड़ों के नजरिए से देखें तो जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) की ग्रोथ प्रोफ़ाइल बेहद मजबूत और प्रभावशाली नजर आती है। जून 2026 तक कंपनी के कुल ग्राहकों का आंकड़ा बढ़कर 533.3 मिलियन तक पहुंच चुका है, जिसमें अकेले 284.9 मिलियन 5G ग्राहक शामिल हैं। इसके अलावा, भारतीय टेलीकॉम बाजार में अभी भी लगभग 261.0 मिलियन यूज़र्स 2G नेटवर्क पर मौजूद हैं, जो कंपनी के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करते हैं। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेगमेंट की बात करें तो जियो के पास 28.6 मिलियन सब्सक्राइबर हैं, जिसमें 14.0 मिलियन जियोएयरफाइबर (JioAirFiber) के ग्राहक भी शामिल हैं। देश में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पेनिट्रेशन (पहुंच) जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 21% थी, उसके वित्त वर्ष 2031 तक बढ़कर करीब 46% होने का अनुमान है। कंपनी की वित्तीय स्थिति को दर्शाने वाला प्रति यूज़र औसत मासिक राजस्व (ARPU) भी वित्त वर्ष 2024 के 181.7 रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 215.6 रुपये पर पहुंच गया है। इसके अलावा, तकनीकी नवाचार और भविष्य की तैयारियों के तहत कंपनी ने डिजिटल तकनीकों से जुड़े 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं, जिनमें से 1,043 पेटेंट मंजूर भी हो चुके हैं। निवेशकों के लिए कंपनी का यह मेगा IPO 21 से 23 अक्टूबर, 2026 के दौरान खुलने वाला है, जिसके लिए ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया गया है।
Anthropic ने बनाया नया Fund, AI से प्रभावित लोगों की मदद के लिए देगी 5% Share
एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही रोजगार, समाज और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाले इसके असर को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। इसी बीच क्लॉड बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक ने सार्वजनिक हित के कामों के लिए अपनी कंपनी के शेयरों का एक हिस्सा देने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि जैसे-जैसे उसका बाजार मूल्य बढ़ेगा, वैसे-वैसे इस काम के लिए दिए जाने वाले शेयरों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।
एंथ्रोपिक ने रविवार को ‘एंथ्रोपिक पब्लिक बेनिफिट फंड’ नाम से एक नया कोष बनाने की घोषणा की। कंपनी ने तत्काल प्रभाव से अपने 5 प्रतिशत शेयर इस कोष के लिए देने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी। इसके अलावा कंपनी के बाजार मूल्य में हर 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर निदेशक मंडल अपने फैसले से 2 प्रतिशत अतिरिक्त शेयर इस कोष को देने का निर्णय ले सकता है।
कंपनी ने अपने ब्लॉग में बताया कि इस व्यवस्था के तहत एंथ्रोपिक का कारोबार जितना बढ़ेगा, सार्वजनिक हित के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले संसाधन भी उतने ही बढ़ेंगे। आम तौर पर तकनीकी कंपनियां अपने बड़े अधिकारियों को ज्यादा वेतन और अतिरिक्त शेयर देकर प्रोत्साहित करती हैं। एंथ्रोपिक का कहना है कि वह शेयरों के इस हिस्से को अधिकारियों को देने के बजाय समाज के फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस कोष से पारंपरिक गैर-लाभकारी संस्थाओं को आर्थिक मदद दी जा सकेगी। इसके अलावा जरूरत के आधार पर कुछ खास वर्गों के लोगों को सीधे सहायता देने का विकल्प भी रहेगा। कंपनी ने माना है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में नौकरी खोने या अपना काम बदलने के लिए मजबूर होने वाले लोगों की मदद करना भी इस कोष के संभावित उद्देश्यों में शामिल हो सकता है।
एंथ्रोपिक ने कहा कि वह पहले ही इस समस्या का अध्ययन करने और इसके असर को कम करने के लिए 200 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जता चुकी है। हालांकि, एआई तकनीक जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए भविष्य में और बड़े कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है। कंपनी के मुताबिक, नया फंड ऐसे कदम उठाने के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराएगा।
गौरतलब है कि अमेरिका के डेलावेयर राज्य में एंथ्रोपिक का पंजीकरण सार्वजनिक हित के लिए काम करने वाली कंपनी के रूप में हुआ है। कंपनी ने साफ किया है कि इस फंड का इस्तेमाल अमेरिका या किसी दूसरे देश में राजनीतिक चंदा देने अथवा राजनीतिक समर्थन जुटाने के लिए नहीं किया जाएगा।
एंथ्रोपिक की स्थापना 2021 में ओपनएआई के कुछ पूर्व कर्मचारियों ने की थी। ओपनएआई ही चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी है। एंथ्रोपिक अब अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनी 2026 के अंत से पहले शेयर बाजार में उतर सकती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि सूचीबद्ध होने के समय इसका मूल्यांकन 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है। ऐसा होने पर यह इतिहास के सबसे बड़े शुरुआती सार्वजनिक शेयर निर्गमों में से एक बन सकता है।
कंपनी के नियमों के मुताबिक, उसके नेतृत्व को निवेशकों के फायदे और जिम्मेदारी के साथ एआई विकसित करने के बीच संतुलन बनाए रखना होता है। बता दें कि सलाहकार कंपनी मैकिन्से की पिछले महीने जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि एआई से बढ़ते स्वचालन के कारण अगले 10 वर्षों में अमेरिका के 11 मिलियन तक कर्मचारियों को अपना काम या करियर बदलने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में एंथ्रोपिक का नया कदम तकनीक से होने वाले बदलावों के बीच समाज की मदद करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
एंथ्रोपिक ने सार्वजनिक हित के कामों के लिए अपनी कंपनी के 5 प्रतिशत शेयर देने की घोषणा की है। कंपनी के बाजार मूल्य में हर 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त शेयर देने का विकल्प भी होगा। नए कोष से गैर-लाभकारी संस्थाओं और एआई के कारण रोजगार में बदलाव झेलने वाले लोगों की मदद की जा सकती है।
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