क्रिकेटर नवीन बोले- गंभीर से बातचीत के बाद सोच बदली:इंजरी पर अफसोस करने का फायदा नहीं; भारत के खिलाफ मैच से पहले चोटिल हुए
अफगानिस्तान के तेज गेंदबाज नवीन-उल-हक ने कहा है कि इंजरी पर अफसोस करने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने बताया कि भारतीय कोच गौतम गंभीर से हुई बातचीत ने उन्हें मुश्किल दौर से उबरने में मदद की। भारत के खिलाफ सितंबर में हुई टी-20 सीरीज के पहले मैच में टॉस से 20 मिनट पहले उनके कंधे की चोट फिर उभर आई थी। इसकी वजह से वे मैच नही खेल सके। तब नवीन 9 महीने की रिहैबिलिटेशन के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी करने वाले थे। नवीन ने क्रिकबज से बातचीत में कहा कि अब उनका पूरा ध्यान फिटनेस हासिल करने पर है। वह जल्दबाजी में वापसी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि वे तभी खेलेंगे, जब उन्हें अपने कंधे पर पूरा भरोसा होगा। नवीन ने कहा- गंभीर से 20-25 मिनट बातचीत ने नजरिया बदला नवीन ने बताया कि भारत के खिलाफ तीसरे टी-20 के बाद वह मैदान पर अकेले बैठे थे। तभी गौतम गंभीर ने उनसे चोट और मैच नहीं खेलने की वजह पूछी। गंभीर IPL में लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ उनके कोच रह चुके हैं। नवीन के मुताबिक, बातचीत के दौरान उन्होंने गंभीर को बताया कि लंबे समय तक मेहनत करने के बाद दोबारा चोटिल होना उन्हें मानसिक रूप से कितना प्रभावित कर रहा था। करीब 20-25 मिनट की इस बातचीत से उन्हें अपनी परेशानियों में उलझे रहने के बजाय दोबारा आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। कंधे की चोट के कारण टी-20 वर्ल्ड कप भी नहीं खेले नवीन दिसंबर 2025 के बाद से कोई प्रोफेशनल क्रिकेट नहीं खेले हैं। दाएं कंधे में स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण वह इस साल टी-20 वर्ल्ड कप से भी बाहर रहे। फ्रैक्चर 8 से 10 सप्ताह में ठीक हो गया था, लेकिन इसके बाद रिकवरी लंबी चली। कंधे के लैब्रम की मरम्मत के लिए उन्हें दूसरी सर्जरी भी करानी पड़ी। कंधे के कैप्सूल को कसने की जरूरत के कारण वापसी में और समय लगा। नवीन ने कहा कि लगातार राष्ट्रीय टीम और अलग-अलग लीग में खेलने के बाद अचानक जिम और फिजियोथेरेपी तक सीमित हो जाना उनके लिए मुश्किल था। 34-35 साल तक खेलना चाहते हैं नवीन का मानना है कि उनके पास उच्च स्तर पर क्रिकेट खेलने के लिए अभी 7-8 साल हैं। उन्होंने कहा कि अगले 6-7 साल तक अच्छा क्रिकेट खेलने के लिए उन्हें मेहनत करनी होगी और मुश्किलों का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इंटरनेशनल टीम में जगह या प्लेइंग-11 में वापसी को लेकर नहीं सोच रहे। उन्हें अपनी स्किल पर भरोसा है और पूरी फिटनेस हासिल करने के बाद वह मैदान पर अपना प्रदर्शन दिखाना चाहते हैं। फिटनेस पर पूरा भरोसा होने पर ही लौटेंगे नवीन ने वापसी के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है। वह रिहैबिलिटेशन, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और गेंदबाजी की तैयारी जारी रखेंगे। उनके मुताबिक, क्रिकेट में लौटने से पहले उन्हें अपनी फिटनेस और कंधे को लेकर 100-120% भरोसा चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अफगानिस्तान की टीम में जगह नहीं मिलती, तो भी यह करियर का अंत नहीं होगा। लीग क्रिकेट में प्रदर्शन करने के मौके मौजूद हैं। नवीन ने कहा कि जीवन ने उन्हें सिखाया है कि एक दिन शानदार प्रदर्शन हो सकता है और अगले दिन खराब। इसलिए उतार-चढ़ाव के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
मणिपुर के जंगल में 2 लोगों की हत्या:मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी
मणिपुर में सोमवार को जंगल से लकड़ी लेने गए दो लोगों की संदिग्ध उग्रवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इंफाल में मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया। यह घटना इम्फाल ईस्ट और कांगपोकपी जिलों की सीमा पर हुई। अधिकारियों के मुताबिक, गोलीबारी में चार लोग घायल हुए हैं और तीन लोग अब भी लापता हैं। मुख्यमंत्री आवास के बाहर हंगामे की दो फोटो लोग लकड़ी लेने पहाड़ियों पर गए थे घटना कांगपोकपी के खोंगबाल सुनुरोक उयोक में हुई। यह इम्फाल ईस्ट के नोंगशुम गांव से कुछ मीटर की दूरी पर है। सोमवार सुबह करीब 7 बजे 16 लोग लकड़ी लेने पहाड़ियों पर गए थे। मृतकों की पहचान अरुबाम रोनिल (35) और लैरेनलकपम इनाओबी (51) के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, वे लकड़ी लेने गए समूह में शामिल थे। इसी दौरान संदिग्ध उग्रवादियों ने उन पर घात लगाकर हमला किया। घटना में घायल चार लोगों में क्ष देवन की हालत गंभीर है। पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी गुस्साए स्थानीय लोग शवों को राज्य की राजधानी इम्फाल ले आए। उन्होंने बाबूपारा स्थित मुख्यमंत्री आवास के मुख्य गेट के बाहर शव रख दिए। स्थानीय लोगों ने मई 2023 से राज्य में जारी हिंसा के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह आवास पर मौजूद थे या नहीं, यह तुरंत पता नहीं चल सका। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस के कई गोले छोड़े। इसके बाद शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) ले जाया गया। फरवरी से अक्टूबर तक हिंसा की प्रमुख घटनाएं 7–11 फरवरी: उखरुल जिले के लितान इलाके में दो तांगखुल नगा और दो कुकी युवकों के बीच झगड़े के बाद तनाव बढ़ा। एक कुकी परिवार के खाली घर में आग लगाई गई। बाद में पत्थरबाजी, गोलीबारी और आगजनी हुई। प्रशासन ने कर्फ्यू और इंटरनेट प्रतिबंध लगाए। 24–25 अप्रैल: उखरुल के सिनाकीथेल और मुल्लम गांवों के पास दो गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई। मृतकों में तांगखुल नगा समुदाय का एक व्यक्ति भी शामिल था। 7–8 मई: उखरुल और कामजोंग जिलों में गोलीबारी और आगजनी हुई। कम से कम छह लोग घायल हुए। भारत-म्यांमार सीमा के पास तांगखुल नगा समुदाय के तीन गांवों में 15 तक घरों पर हमले और आगजनी की सूचना मिली। अगस्त: ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, नगा और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा में कम से कम सात लोग मारे गए। सितंबर की शुरुआत तक इस संघर्ष में मरने वालों की संख्या 34 बताई गई थी। सितंबर: महीने के अंत तक रिपोर्टों में नगा-कुकी संघर्ष में 50 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया। हिंसा के कारण दोनों समुदायों के बीच तनाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ीं। 17 अक्टूबर: कामजोंग जिले के चसाद गांव में शनिवार को कुकी और नगा समुदायों के हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। --------------------- ये खबर भी पढ़ें: मणिपुर में कुकी-नगा समुदायों के बीच गोलीबारी, 1 की मौत:4 घायल, हिंसा में 15 घर जले; म्यांमार के उग्रवादियों पर हमले का आरोप मणिपुर के कामजोंग जिले के चसाद गांव में शनिवार को कुकी और नगा समुदायों के हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। पढ़ें पूरी खबर…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 










