पीएम मोदी से मिले स्पेन के राष्ट्रपति सांचेज: द्विपक्षीय बैठक में डिफेंस, ट्रेड और तकनीक को लेकर हुई बात
नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों पर बात की। दोनों ने व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और कई दूसरे जरूरी सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने बाद में कहा बैठक काफी अच्छी रही।
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने के लिए सांचेज नई दिल्ली पहुंचे। यह एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है जो उद्योग-धंधे और सरकार चलाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर फोकस करता है।
समिट में शामिल होने से पहले सांचेज ने पीएम मोदी के साथ अहम बैठक की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी।
उन्होंने लिखा, दिल्ली में राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ एक अच्छी मीटिंग हुई। इंडिया-स्पेन दोस्ती को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा हुई, खासकर डिफेंस, सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और दूसरे क्षेत्रों में। हमारे देश 2026 को इंडिया-स्पेन ईयर ऑफ कल्चर, टूरिज्म और एआई के तौर पर मना रहे हैं। इससे लोगों के बीच जुड़ाव और गहरा होगा। स्पेन के विश्वविद्यालय का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है; यह देखकर खुशी हुई। यह भी हमारे लोगों को जोड़ने में बहुत मदद करेगा।
पीएम ने आगे लिखा, ईयू के साथ ऐतिहासिक एफटीए का स्पेन के साथ इकोनॉमिक पार्टनरशिप पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा और दोनों देशों के लोगों को नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
इससे पहले नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के बाद, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक्स पर बातचीत का ब्योरा शेयर करते हुए कहा, पीएम मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने आए स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने इंडिया-स्पेन साझेदारी को गहरा करने के मकसद से कई मुद्दों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री के साथ अपनी मीटिंग से पहले, प्रेसिडेंट सांचेज ने स्पेन-इंडिया सीईओ फोरम में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने स्पेन में निवेश की संभावनाओं पर बल दिया और भारत के प्रमुख उद्यमियों से बिजनेस संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की।
एक्स पोस्ट में, राष्ट्रपति सांचेज ने कहा, स्पेन एक ऐसा देश है जिसमें निवेश करना चाहिए। यह एक स्ट्रेटेजिक पार्टनर भी है, जो ग्रोथ, स्टेबिलिटी, टैलेंट और इनोवेशन देता है। यही बात मैंने नई दिल्ली में भारतीय कंपनियों के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स से मिलकर उन्हें बताई है।
स्पेनिश राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता भारत-स्पेन के बीच लंबे समय से चले आ रहे और अच्छे रिश्तों को और मजबूती प्रदान करती है, ये 1956 में राजनयिक रिश्ते बनने के समय से हैं।
राष्ट्रपति सांचेज इससे पहले 28-29 अक्टूबर, 2024 को भारत आए थे। वह दौरा उनका पहला भारत दौरा था और 18 सालों में स्पेन सरकार के किसी राष्ट्रपति का भारत दौरा था।
--आईएएनएस
केआर/
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इंडिया में आसानी से मिल रहे चाइनीज रोबोट, कीमत बस इतनी... , इंडस्ट्रियल और ह्यूमनॉइड में होता है ये अंतर
Chinese robots in India: AI Impact Summit 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा चाइनीज रोबोडोग पेश करने का मसला चर्चा में है. हालांकि यूनिवर्सिटी का इस पर बयान आया है कि उन्होंने वे केवल शैक्षिणक अध्ययन के लिए प्रस्तुत किया था. दरअसल, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार चीन अब रोबोट इंडस्ट्री में भी सुपरपावर बन चुका है. 2026 में प्रवेश करते हुए चीन की रोबोट मार्केट में तेजी से उछाल देखा जा रहा है.
जहां ह्यूमनॉइड और इंडस्ट्रियल रोबॉट्स की डिमांड आसमान छू रही है. लेकिन भारतीय कारोबारियों के लिए सवाल यह है कि क्या चीन से रोबोट लाकर यहां कारोबार बढ़ाया जा सकता है? इम्पोर्ट पर भारी ड्यूटी और लागत के बावजूद चाइनीज रोबोट्स इंडियन बाजार में धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहे हैं.
Chinese New Year is coming! People here in China are busy with shopping. This year, something new has appeared on their shopping list. That’s robots! Follow Dev to the world’s first robot 4S store in Beijing and watch how these cool gadgets change people’s lives.@China_Amb_India pic.twitter.com/o7BrjnwhoZ
— China-India Dialogue (@ChinaIndiaD) February 13, 2026
चीन के रोबोट की इंडियन मार्केट में सॉलिड धमक
जानकारी के अनुसार चीन की रोबोट इंडस्ट्री 2024 में ही 47 अरब डॉलर की हो चुकी है और 2028 तक इसमें 23 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी की उम्मीद है. यहां इंडस्ट्रियल रोबोट्स की बात करें तो 2024 में 2.95 लाख नए रोबोट्स इंस्टॉल हुए जो दुनिया के बाकी देशों से ज्यादा है. यहां हर 10 हजार वर्कर्स पर 470 रोबोट्स काम कर रहे हैं जो साउथ कोरिया के बाद दूसरा सबसे ज्यादा रेशियो है. बता दें अब बाजार में ह्यूमनॉइड रोबोट्स का दौर है
133% से भी ज्यादा बढ़ेगा ह्यूमनॉइड रोबोट का मार्केट
अनुमान है कि 2026 में रोबोट्स की सेल्स 28 हजार यूनिट्स तक पहुंच सकती है जो पिछले साल से 133 प्रतिशत ज्यादा होगी. कुल मिलाकर चीन की ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट 2026 में 2.89 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. सरकार की सब्सिडी और इनोवेशन से यह सेक्टर ग्लोबल लीडर बन गया है जहां 80 प्रतिशत से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट इंस्टॉलेशन चीन से ही आ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि श्रम की कमी और मैन्युफैक्चरिंग को ऑटोमेट करने की वजह से यह ट्रेंड और तेज होगा.
Can’t imagine that in just one year, Chinese humanoid robots have evolved from robots to "humans".
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) February 17, 2026
2025&2026 Chinese Spring Festival Gala pic.twitter.com/WM3L15dUs6
चीन से इंडिया रोबोट इम्पोर्ट करने की लागत कितनी होती है
अगर आप चीन से रोबोट इंडिया लाना चाहते हैं तो इस पर भारी-भरकम खर्च होता है. बेसिक AI रोबोट्स की कीमत इंडिया में 2 लाख से 5 लाख रुपये तक है जबकि इंडस्ट्रियल या सर्विस मॉडल्स 20 लाख तक जा सकते हैं. लेकिन इन पर इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है जो इसकी कीमत को और महंगा बना देती है. चीन से आ रहे रोबोट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 से 40 प्रतिशत तक लगती है फिर उसके ऊपर 10 प्रतिशत सोशल वेलफेयर सरचार्ज और 18 प्रतिशत GST लगता है.
भारत के बाजार में चाइनीज रोबोट की डिमांड तो है लेकिन कॉस्ट एक बड़ी चुनौती
चाइनीज गुड्स पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी से कुल कॉस्ट 40-60 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. उदाहरण के तौर पर अगर चीन में एक रोबोट की FOB प्राइस 10 लाख रुपये है तो इंडिया पहुंचते-पहुंचते ड्यूटी, शिपिंग और लोकल टैक्स मिलाकर यह 15-20 लाख तक हो सकता है. दरअसल, चाइनीज रोबोट्स लोकल सप्लाई चेन की वजह से 10-15 प्रतिशत सस्ते पड़ते हैं लेकिन इंडियन इम्पोर्टर्स को कस्टम्स रेगुलेशंस का सामना करना पड़ता है. साउथ ईस्ट एशिया से इंडिया 18.7 प्रतिशत एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन है जो दिखाता है कि डिमांड तो है लेकिन कॉस्ट एक बड़ी चुनौती।
क्या चाइनीज रोबॉट्स इंडिया में आसानी से मिलते हैं?
चाइनीज रोबोट्स इंडियन मार्केट में आसानी से मिलते हैं. लेकिन फिलहाल ये बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं हैं. 2024 में इंडिया में 9,100 इंडस्ट्रियल रोबोट्स इंस्टॉल हुए जो 7 प्रतिशत ग्रोथ दिखाता है और ऑटोमोटिव सेक्टर इसमें लीड कर रहा है. चीन के बाद इंडिया में जापान से रोबोट इम्पोर्ट होते हैं. कुल मिलाकर चीन की रोबोट इंडस्ट्री ग्लोबल गेम चेंजर है, लेकिन इंडिया के लिए यह अवसर के साथ चुनौतियां लाती है. अगर सरकार ड्यूटी में राहत दे और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट करे तो भारतीय बाजार में चाइनीज रोबोट्स की बाढ़ आ सकती है. फिलहाल कारोबारियों को स्मार्ट कैलकुलेशन के साथ आगे बढ़ना होगा.
इंडस्ट्रियल और ह्यूमनॉइड रोबोट में क्या अंतर होता है?
दोनों रोबोट के डिजाइन और आकार में अंतर होता है. इंडस्ट्रियल रोबोट आमतौर पर आर्म या फिक्स्ड स्ट्रक्चर वाले होते हैं, जबकि ह्यूमनॉइड रोबोट इंसान जैसा दिखते हैं, जो सिर, धड़, दो हाथ और दो पैर के साथ आते हैं. इंडस्ट्रियल रोबोट फिक्स्ड, स्ट्रक्चर्ड जगहों (जैसे कंटेनर या सेल) में काम करते हैं, लेकिन ह्यूमनॉइड रोबोट अनस्ट्रक्चर्ड, इंसानी स्पेस (घर, ऑफिस, फैक्ट्री फ्लोर) में घूम-फिर सकते हैं. इनकी क्षमता और फ्लेक्सिबिलिटी अलग-अलग होती है, जैसे इंडस्ट्रियल रोबोट प्रोग्राम्ड पाथ पर बहुत तेज और सटीक होते हैं, लेकिन कम फ्लेक्सिबल होते हैं, वहीं ह्यूमनॉइड रोबोट AI से सीखते हैं, एडाप्ट होते हैं और कई तरह के टास्क हैंडल कर सकते हैं. इंडस्ट्रियल रोबोट अक्सर सुरक्षा कारणों से इंसानों से दूर रखे जाते हैं, जबकि ह्यूमनॉइड रोबोट इंसानों के साथ सुरक्षित सहयोग और कम्युनिकेशन के लिए बने होते हैं.
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