अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी पर Jairam Ramesh का हमला, BJP और SIT जांच पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चंदे की कथित चोरी के मामले से निपटने के तरीके को लेकर सत्ताधारी भाजपा सरकार की आलोचना की। X पर एक पोस्ट में, जयराम रमेश ने इस घटना को आस्था के साथ एक गंभीर विश्वासघात (चंदा चोरी, आस्था से धोखा) करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली निर्णय लेने वालों को बचाने के लिए राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी, आस्था से धोखा! राम के नाम पर सत्ता हासिल की, और अब चंदा चोरी पर खामोशी छाई है। भगवान राम का नाम लेकर सत्ता में आई BJP, चंदा चोरी के पाप से ही बर्बाद हो जाएगी।
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कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि 4 जून, 2026 को चंदा चोरी का मामला सामने आने के बावजूद, उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) के गठन में देरी की। यह गठन मामले के सार्वजनिक होने के पूरे नौ दिन बाद, 13 जून को किया गया। 17 अगस्त तक, गृह विभाग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सीधे 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को सौंप दी, जिसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा सहित ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई।
रमेश ने कहा कि आरोपियों को बचाने के लिए SIT बनाई गई। अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर में हुई इस बड़ी चोरी का मामला 4 जून को सामने आया था। इसके पूरे नौ दिन बाद, 13 जून 2026 को, UP सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT का गठन किया। 17 अगस्त को गृह विभाग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट उसी ट्रस्ट को सौंप दी, जिसने उम्मीद के मुताबिक चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के सर्विलांस फुटेज में, गिनती करने वाले कर्मचारियों को 105 अलग-अलग मौकों पर नोटों की गड्डियां छिपाते हुए देखा गया। 23 जून की शुरुआती रिपोर्टों में सर्विलांस प्रोटोकॉल में गंभीर खामियों और कंट्रोल रूम के खाली होने की बात सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद, इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस जांच नहीं की गई।
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रमेश ने आगे कहा कि कैमरे में 105 बार चोरी पकड़ी गई। 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के फुटेज में, गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां छिपाते हुए दिखे। कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि अयोध्या के स्थानीय संतों और टिप्पणीकारों ने ट्रस्ट के आंतरिक वित्तीय प्रबंधन पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि ने, बिना किसी जवाबदेही तय किए, 7 जुलाई को ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को इस मामले में शामिल होने के आरोपों से बरी कर दिया।
पूर्व छात्रा को आपत्तिजनक संदेश देने के आरोप में Symbiosis Nagpur के प्रोफेसर पर गिरी गाज
सिम्बियोसिस विश्वविद्यालय ने अपने नागपुर परिसर के एक प्रोफेसर को संस्थान की एक पूर्व छात्रा को कथित तौर पर अनुचित संदेश भेजने और उसे इस्लामी धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए कहने के आरोपों के बाद अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया है। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस मामले को लेकर कुछ दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सिम्बियोसिस इंटरनेशनल (मानद विश्वविद्यालय) ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि आरोपों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।
समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर ने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि, नागपुर पुलिस के अनुरोध के बावजूद छह महीने पहले संस्थान छोड़ चुकी छात्रा और उसके पिता ने अब तक न तो औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और न ही कथित संदेशों से जुड़ा कोई सबूत दिया है।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि आरोपों में छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजना और इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। हालांकि, शिकायत या सहायक साक्ष्य नहीं होने के कारण इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के सदस्यों ने विरोध-प्रदर्शन किया और प्रोफेसर को हटाने तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस उपायुक्त नित्यानंद झा ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे विभिन्न संगठनों के 15 से 17 लोग विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र हुए। पुलिस ने हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच बातचीत कराई। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मुलाकात की।
विश्वविद्यालय ने कहा कि उसने सोशल मीडिया पर सामने आई खबरों और शिकायत का संज्ञान लेते हुए आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। संस्थान ने कहा कि वह विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा तथा गरिमा के प्रति प्रतिबद्ध है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व छात्रा का परिवार इस मुद्दे को दक्षिणपंथी संगठनों के समक्ष उठाता रहा है, लेकिन तीन बार अनुरोध किए जाने के बावजूद पुलिस के पास नहीं पहुंचा।
पुलिस की जांच में पता चला कि छात्रा ने छह महीने पहले संस्थान छोड़ दिया था।
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