BIRC से भारतीय चावल उद्योग को मिलेगा वैश्विक बाजार, होंगी 2,038 कारोबारी बैठकें
भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) में खरीदारों के साथ 2,038 कारोबारी बैठकें निर्धारित की गई हैं। भारत का चावल उद्योग वैश्विक कीमतों और मांग में बदलाव के बीच अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ कारोबारी संबंधों का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। आयोजकों ने बयान में कहा कि भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) की ओर से नयी दिल्ली के भारत मंडपम में तीन दिवसीय सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा।
इसमें 150 से अधिक देशों के खरीदारों ने पंजीकरण कराया है। कुल 4,649 पंजीकरण हुए हैं जिनमें कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब के खरीदार शामिल हैं। आईआरईएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, ‘‘बीआईआरसी 2026 के सबसे उत्साहजनक पहलुओं में से एक देशभर से मिल रही मजबूत भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की बढ़ती रुचि है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राज्यवार पंजीकरण में करीब 91 प्रतिशत दिल्ली के बाहर से हैं।
इनमें महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत, दिल्ली की 9.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की 8.4-8.4 प्रतिशत, गुजरात की 8.2 प्रतिशत, तमिलनाडु की 6.2 प्रतिशत, मध्य प्रदेश की 5.2 प्रतिशत और कर्नाटक की 5.1 प्रतिशत है।’’ गर्ग ने कहा, ‘‘यह सम्मेलन की देशभर में व्यापक पहुंच को दर्शाता है। हमारा उद्देश्य देशभर के इस उद्योग की भागीदारी को दुनिया के खरीदारों से जोड़ना और सार्थक कारोबारी संपर्क के अवसर उत्पन्न करना है।’’ सम्मेलन में 23 और 24 अक्टूबर को नौ ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इनमें वैश्विक मांग और आपूर्ति, निर्यात के अवसर, माल ढुलाई की लागत, भुगतान संबंधी जोखिम, गुणवत्ता मानकों और सरकारी नीतियों पर चर्चा होगी। ‘वैश्विक चावल मांग और आपूर्ति परिदृश्य 2027 : कीमतों में गिरावट या तेजी का नया दौर?’
शीर्षक वाले उद्घाटन सत्र में एसएंडपी ग्लोबल, बिगमिंट, ईवाई और आईआरईएफ के विशेषज्ञ बाजार की स्थितियों की समीक्षा करेंगे और तेजी, सामान्य तथा मंदी के परिदृश्यों में कीमतों की संभावित दिशा का आकलन करेंगे। आयोजकों के अनुसार, 2025 में आयोजित पहले बीआईआरसी में 90 से अधिक देशों के 1,083 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों समेत कुल 10,854 लोगों ने हिस्सा लिया था।
HFCL के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ तिमाही प्रदर्शन, MD Mahendra Nahata ने की नतीजों की घोषणा
दूरसंचार उपकरण बनाने वाली घरेलू कंपनी एचएफसीएल का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ कई गुना होकर 394.22 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि कृत्रिम मेधा (एआई) डेटा केंद्रों से ऑप्टिकल फाइबर केबल की मांग बढ़ने से उसके लाभ में यह वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में कंपनी ने करीब 72 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
एचएफसीएल के प्रबंध निदेशक महेंद्र नाहटा ने बयान में कहा, ‘‘यह कंपनी के इतिहास में अब तक का सर्वश्रेष्ठ तिमाही प्रदर्शन है और हमारी विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। ये नतीजे हमारे कारोबार के बढ़ते पैमाने, मजबूती और गति को दर्शाते हैं। साथ ही, इनसे हितधारकों के लिए निरंतर वृद्धि और दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने की एचएफसीएल की क्षमता पर हमारा भरोसा मजबूत होता है।’’
कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में राजस्व में सालाना आधार पर 80 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है। उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2028-29 के लिए तय समयसीमा से पहले ही वह 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व का आंकड़ा पार कर लेगी। नाहटा ने कहा, ‘‘हमने वित्त वर्ष 2028-29 तक 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखा था।
कारोबार में मौजूदा गति को देखते हुए हमारा मानना है कि यह लक्ष्य काफी पहले हासिल किया जा सकता है।’’ समीक्षाधीन तिमाही में एचएफसीएल का परिचालन से एकीकृत राजस्व दोगुने से अधिक होकर 2,541.79 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 1,043.34 करोड़ रुपये था। कंपनी का शुद्ध लाभ मार्जिन सालाना आधार पर दोगुने से अधिक होकर 14.36 प्रतिशत हो गया, जो पहले 2.23 प्रतिशत था।
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