भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होगा फाइनल, विदेश मंत्री रुबियो ने कहा- अंतिम दौर में बातचीत
India-US Trade Deal: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है. भारत की अपनी यात्रा से एक दिन पहले उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर अधिकांश काम पूरा हो चुका है.
भारत दौरे से पहले रुबियो ने कहा, "हम इस समय भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं."
रूसी तेल और गैस के मुद्दे पर रुबियो ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए अमेरिका को पिछले कुछ महीनों में कई प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी है.
उन्होंने कहा, "पिछले कुछ महीनों में हमें प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी क्योंकि उनका असर वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर पड़ रहा था. हमें इन सभी कारकों का संतुलन बनाना होता है. हम इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं और इसके काफी करीब हैं. यही वे पहलू हैं, जिन पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इसी तरह के फैसले लेते समय विचार करते हैं. प्रत्येक देश के सामने अलग-अलग और जटिल परिस्थितियां होती हैं. भौगोलिक वास्तविकताएं भी महत्वपूर्ण होती हैं. कुछ देशों के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच बनाना बेहद कठिन होता है. यह कोई बहाना नहीं है, लेकिन विदेश नीति बनाते समय इन सभी बातों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है."
भारत और अमेरिका पहले चरण के व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुके हैं. हालांकि डेयरी क्षेत्र तक पहुंच का मुद्दा अब भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है.
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को लागू करने संबंधी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लगाए जाने वाले शुल्कों में छूट दी है.
इस व्यापार समझौते का मूल उद्देश्य भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों पर अमेरिका में कम और स्थिर शुल्क सुनिश्चित करना है. इसके बदले भारत में अमेरिकी उत्पादों को व्यापक बाजार पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी.
फरवरी में घोषित रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था. साथ ही भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से जुड़ा अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी हटा दिया गया था.
इसके बदले भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि उत्पादों जैसे ट्री नट्स, फलों, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स पर शुल्क कम करने या समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई थी.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है. हालांकि इसका कार्यान्वयन भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को लेकर स्पष्टता मिलने पर निर्भर करेगा.
वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि व्यापार समझौते पर बातचीत अब "लैंडिंग प्वाइंट" यानी अंतिम चरण के करीब पहुंच चुकी है.
हालांकि अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने 2 अक्टूबर को कहा था कि समझौता तत्काल होने वाला नहीं है.
इस बीच भारत का व्यापार प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है. सितंबर 2026 में देश का माल निर्यात 23 प्रतिशत बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि व्यापार घाटे में भी कमी दर्ज की गई.
स्रोत- आईएएनएस
मेटा को सरकार का निर्देश, फेसबुक और इंस्टाग्राम के रिकमेंडेशन सिस्टम की करे समीक्षा
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कंटेंट रिकमेंडेशन और रैंकिंग सिस्टम की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में सोशल मीडिया एल्गोरिद्म किस तरह जानकारी को बढ़ावा देते हैं, इसे लेकर सरकार ने अपनी निगरानी और सख्त कर दी है।
मंत्रालय द्वारा जारी एक एडवाइजरी में मेटा से कहा गया है कि उसकी रिकमेंडेशन प्रणाली ऐसी न हो, जिससे उपयोगकर्ताओं के सामने केवल एक या सीमित प्रकार की विचारधाराएं या कथानक बार-बार प्रस्तुत हों। इसके बजाय लोगों को विविध, प्रासंगिक और विश्वसनीय जानकारी तक अधिक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मंत्रालय ने मेटा को ऐसे कंटेंट की पहचान, समीक्षा और त्वरित निगरानी के लिए तंत्र मजबूत करने का भी निर्देश दिया है, जो रिकमेंडेशन सिस्टम के जरिए तेजी से बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंच रहा हो और जिससे सार्वजनिक भ्रम, हिंसा या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो।
इसके अलावा, अमेरिकी कंपनी को इन उपायों को तत्काल लागू करने और उठाए गए कदमों की जानकारी सरकार को देने के लिए भी कहा गया है।
एडवाइजरी में विशेष रूप से सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों, वीडियो और ग्राफिक्स का उल्लेख किया गया है, जिनकी प्रामाणिकता, समय, स्थान या परिस्थितियों को लेकर अस्पष्टता हो सकती है।
मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे मामलों में अतिरिक्त संदर्भ उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जहां पुराने या असंबंधित दृश्य वर्तमान घटनाओं के रूप में प्रस्तुत किए जाएं, वीडियो को चुनिंदा रूप से संपादित किया गया हो या आपात स्थिति, पुलिस कार्रवाई अथवा अन्य सरकारी उपायों को लेकर अपुष्ट दावे किए जा रहे हों।
यह कदम मेटा की कंटेंट मॉडरेशन और रिकमेंडेशन प्रणालियों को लेकर सरकार की बढ़ती निगरानी का ताजा उदाहरण माना जा रहा है।
इससे पहले अगस्त में सरकारी अधिकारियों ने मेटा के अधिकारियों से कंटेंट रिकमेंडेशन एल्गोरिद्म, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया और गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल किए थे।
मेटा ने हाल ही में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर उठी चिंताओं के बाद कंटेंट और विज्ञापन संबंधी सुरक्षा उपायों को भी और मजबूत किया है।
कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि उसने एआई-आधारित नई विज्ञापन समीक्षा प्रणाली लागू की है और जनवरी से जून 2026 के बीच भारत में बाल यौन शोषण से संबंधित 53 लाख कंटेंट हटाए हैं। इनमें से 98 प्रतिशत से अधिक मामलों की पहचान कंपनी ने सक्रिय रूप से खुद की थी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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