सिंगरौली में गरबा की धूम, मंत्री राधा सिंह ने महिलाओं के साथ किया गरबा, प्रतिभागियों का बढ़ाया उत्साह, देखें वीडियो
नवरात्रि के पावन पर्व पर मध्यप्रदेश में गरबा की धूम मची हुई है। आम नागरिक से लेकर राजनेता तक गरबा के रंग में रंगे हुये हैं। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन प्रवास के दौरान विभिन्न गरबा कार्यक्रमों में सहभागिता की और प्रदेशवासियों के साथ पर्व का उत्साह साझा किया। तो वहीं, राज्यमंत्री राधा सिंह एवं प्रतिमा बागरी भी गरबा कार्यक्रमों में गरबा नृत्य करती दिखीं।
बता दें कि सिंगरौली जिले में कई जगहों पर गरबे का आयोजित किया गया है। जिले के चारों ओर गरबा पंडालों की रौनक चरम पर है। वहीं, चुन कुमारी स्टेडियम में राधा कृष्ण फाउंडेशन द्वारा आयोजित गरबा महोत्सव में राज्य मंत्री एवं चितरंगी विधायक राधा सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
मंत्री राधा सिंह ने किया गरबा
गरबा उत्सव में डीजे पर बज रहे गाने एवं गरबा करते लोगों को देखकर मंत्री राधा सिंह भी अपने आप को रोक नहीं पाईं एवं हाथों में डांडिया लेकर महिलाओं के बीच गरबा करने पहुंच गईं। राधा सिंह ने महिलाओं के बीच जाकर अलग-अलग गानों पर जमकर गरबा किया। उनका गरबा करते हुये वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री राधा सिंह ने नवरात्रि पर्व और गरबा आयोजनों की सराहना करते हुए सभी को पर्व की बधाई दी एवं गरबा उत्सव में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।
मंत्री प्रतिमा बागरी भी गरबा करती आईं नजर
एक तरफ जहां मंत्री राधा सिंह गरबा करती नजर आईं तो वहीं दूसरी ओर सतना जिले के कोठी के अमर शहीद ठाकुर रणमत सिंह स्टेडियम में आयोजित जय हिंद गरबा महोत्सव में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी भी गरबे की ताल पर थिरकती नजर आईं। दरअसल, रविवार को जय हिंद गरबा महोत्सव में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों के साथ डांडिया नृत्य कर आयोजन की रौनक बढ़ाई। राज्यमंत्री को अपने बीच डांडिया करते देख आयोजन में मौजूद लोगों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया।
कार्यक्रम में शामिल होकर प्रतिमा बागरी ने कहा कि सांस्कृतिक आयोजन हमारी समृद्ध भारतीय परंपराओं और धार्मिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कारों और आस्था से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को इन परंपराओं से परिचित कराएं और उन्हें ऐसे उत्सवों में उत्साहपूर्वक सहभागिता के लिए प्रेरित करें।
ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे पर उमंग सिंघार ने किए सवाल, बोले “जिनकी ड्यूटी नहीं थी, उन्हें क्यों किया सस्पेंड”
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे को लेकर भाजपा सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत और 43 लोगों के घायल होने के बाद सरकार ने नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है, लेकिन इनमें से तीन पुलिसकर्मियों की मंदिर में ड्यूटी ही नहीं थी।
कांग्रेस नेता ने पूछा कि जिन पुलिसकर्मियों की घटनास्थल पर ड्यूटी नहीं थी, उन्हें निलंबित करके सरकार किसकी जवाबदेही तय कर रही है। उन्होंने कहा है कि ये सिर्फ कार्रवाई के नाम पर दिखावा किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
उमंग सिंघार ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
उमंग सिंघार ने हादसे की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने सवाल किया कि जिस रास्ते पर बाइक तक नहीं जा सकती, वहां ट्रक कैसे पहुंच गया। मंदिर की सुरक्षा और निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और सिर्फ़ निलंबन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि जनता को हादसे के संबंध में जवाब मिलना चाहिए, पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
क्या है मामला
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में रविवार को नवरात्रि के दौरान हुए हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 43 लोग घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, धान से भरा पंजाब नंबर का एक ट्रक मंदिर की ओर जाने वाले ढलान वाले रास्ते पर पहुंच गया जहां भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था। ट्रक बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ा और अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ मंदिर के प्रवेश द्वार से टकरा गया। हादसे के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर ग्वालियर के सिटी एसपी को पद से हटाया गया और नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इस कार्रवाई में निलंबित पुलिसकर्मियों में से तीन की मंदिर में ड्यूटी नहीं होने की बात कही जा रही है। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में चूक और भारी वाहन प्रतिबंधित रास्ते पर कैसे पहुंचा इसकी जांच को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
15 मौतों के बाद भी सरकार की जवाबदेही सिर्फ निलंबन तक!
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत और 43 लोगों के घायल होने के बाद सरकार ने 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया, लेकिन इनमें से 3 की तो मंदिर में ड्यूटी ही नहीं थी!
आखिर यह कैसी कार्रवाई है? जिनकी… pic.twitter.com/bfqfU1BR1F
— Umang Singhar (@UmangSinghar) October 19, 2026
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