सिद्धार्थ मल्होत्रा के पिता का निधन, एक्टर ने शेयर किया इमोशनल नोट- 'आपकी ईमानदारी ही मेरी विरासत'
बॉलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा के पिता और पूर्व मर्चेंट नेवी कैप्टन सुनील मल्होत्रा का निधन हो गया है. सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर करके अपने पिता की ईमानदारी, अनुशासन और बहादुरी को याद किया. सुनील मल्होत्रा लंबे समय से बीमार थे और 13 फरवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली. इस दुखद समय में सिद्धार्थ और उनकी पत्नी कियारा आडवाणी दिल्ली में परिवार के साथ हैं. सिद्धार्थ ने अपने पिता को अपनी प्रेरणा और विरासत बताया, जिन्होंने व्हीलचेयर पर होने के बावजूद कभी हिम्मत नहीं हारी.
सुप्रीम कोर्ट बोला-अपराधी की सजा घटाकर मुआवजा बढ़ाना खतरनाक ट्रेंड:आरोपी पैसा देकर बच सकते हैं ये गलत संदेश; मुदैर हाइकोर्ट का फैसला रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर अपराधों में किसी की सजा घटाकर मुआवजा बढ़ाने को खतरनाक ट्रेंड बताया। मदुरै हाइकोर्ट के एक फैसले पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इससे समाज में गलत संदेश जाता है कि आरोपी सिर्फ पैसा देकर अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि सजा का उद्देश्य अपराध के प्रति डर पैदा करना है, ताकि भविष्य में अपराध रोके जा सकें। सजा न तो अत्यधिक कठोर होनी चाहिए और न इतनी नरम कि उसका भय खत्म हो जाए। दरअसल, सुप्रीण कोर्ट मद्रास हाइकोर्च की मदुरै बेंच के एक फैसले के खिलाफ दायर हुई याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति पर चाकू से हमला कर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में दो आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से मिली तीन साल की सजा घटाकर 5-5 हजार रुपए के मुआवजे को बढ़ाकर 50-50 हजार रुपए कर दिया था। मुआवजा सजा का विकल्प नहीं पीठ ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को मुआवजा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सजा का विकल्प नहीं हो सकता। भारतीय न्याय प्रणाली बदले पर नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्स्थापन के सिद्धांत पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 395 में पीड़ित को मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन यह सजा के अतिरिक्त है, ये सजा की जगह नहीं ले सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा सुनाते समय अदालतों को इन बिंदुओं पर विचार करना चाहिए: आरोपियों को चार हफ्ते में सरेंडर का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट की तीन साल की सजा बहाल कर दी। साथ ही निर्देश दिया कि आरोपी चार सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करें और शेष सजा काटें। ट्रायल कोर्ट को पहले से काटी गई अवधि का समायोजन करने के निर्देश भी दिए गए।
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