फिर सीमा हैदर के घर फिर गूंजी किलकारी, बनीं छठे बच्चे की मां, परिवार में खुशी का माहौल
ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा क्षेत्र में रहने वाली सीमा हैदर एक बार फिर चर्चा में हैं. मंगलवार को उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में बेटे को जन्म दिया. अस्पताल सूत्रों के अनुसार डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद परिवार में खुशी का माहौल देखा गया और मिठाइयां बांटी गईं.
जानकारी के मुताबिक, इससे पहले 18 मार्च 2025 को सीमा हैदर ने बेटी को जन्म दिया था. लगभग 11 महीने बाद अब बेटे का जन्म हुआ है. बेटे के जन्म के साथ ही सीमा हैदर अब छह बच्चों की मां बन गई हैं.
परिवार की पृष्ठभूमि और बच्चों की संख्या
सीमा हैदर पहले से चार बच्चों की मां थीं. जब वह पाकिस्तान से भारत आई थीं, तब अपने चार बच्चों को साथ लेकर आई थीं. बाद में वह ग्रेटर नोएडा निवासी सचीन मीणा के साथ रहने लगीं. वर्तमान में उनके कुल छह बच्चे हैं. इनमें से चार बच्चे गुलाम हैदर के बताए जाते हैं, जबकि दो बच्चे एक बेटी और एक बेटा सचिन मीणा के हैं.
ऑनलाइन मुलाकात से सुर्खियों तक
सीमा हैदर और सचिन मीणा की मुलाकात एक ऑनलाइन गेम के माध्यम से हुई थी. इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया. कुछ वर्ष पहले सीमा हैदर नेपाल के रास्ते भारत आई थीं, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की थी. भारत आने के बाद कानूनी प्रक्रियाएं भी चलीं और जांच एजेंसियों ने मामले की जांच की. बाद में उन्हें जमानत मिल गई. इसके बाद से वह सचिन मीणा के साथ सामान्य पारिवारिक जीवन बिता रही हैं.
सोशल मीडिया पर सक्रियता
सीमा हैदर और सचिन मीणा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं. दोनों नियमित रूप से यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा करते हैं. बताया जाता है कि उनके यूट्यूब चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर हैं और इंस्टाग्राम पर भी बड़ी संख्या में फॉलोअर्स मौजूद हैं. हाल के वर्षों में वे अपने दैनिक जीवन, पारिवारिक गतिविधियों और नए घर के निर्माण से जुड़े वीडियो साझा करते रहे हैं. हाल ही में उनके नए मकान को लेकर भी चर्चा रही. फिलहाल परिवार ने नवजात के स्वास्थ्य को लेकर संतोष व्यक्त किया है. स्थानीय लोगों के अनुसार मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और घर में जश्न का माहौल बना हुआ है.
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पाकिस्तान: पंजाब में ‘फर्जी मुठभेड़ों’ में 924 लोगों की मौत, मानवाधिकार आयोग ने न्यायिक जांच की मांग की
इस्लामाबाद, 17 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने पंजाब प्रांत में देश के क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट (सीसीडी) पर सुनियोजित तरीके से फर्जी मुठभेड़ों को अंजाम देने और न्यायेतर हत्याओं की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। आयोग का कहना है कि यह प्रवृत्ति कानून के शासन और संवैधानिक संरक्षण को गंभीर रूप से कमजोर करती है।
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए एचआरसीपी ने बताया कि 2025 के आठ महीनों में सीसीडी के नेतृत्व में कम से कम 670 मुठभेड़ें दर्ज की गईं, जिनमें 924 संदिग्ध मारे गए, जबकि इसी अवधि में दो पुलिसकर्मियों की भी मौत हुई।
आयोग ने कहा, “हताहतों में भारी असंतुलन-औसतन प्रतिदिन दो से अधिक घातक मुठभेड़ और विभिन्न जिलों में एक जैसी कार्यप्रणाली यह संकेत देती है कि यह अलग-थलग घटनाएं नहीं, बल्कि संस्थागत प्रथा है। इसलिए इन मौतों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।”
एचआरसीपी ने पीड़ित परिवारों में भय के व्यापक माहौल का भी जिक्र किया। एक परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मृतक का तत्काल अंतिम संस्कार करने के लिए दबाव डाला और चेतावनी दी कि यदि मामले को आगे बढ़ाया गया तो अन्य परिजनों को भी निशाना बनाया जा सकता है। आयोग ने इसे आपराधिक कृत्य और न्याय में बाधा बताया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अपराध नियंत्रण के नाम पर पुलिस मुठभेड़ों का इस्तेमाल पाकिस्तान में लंबे समय से विवादित रहा है। खासकर पंजाब और सिंध में प्रांतीय सरकारें इसे अपराध और उग्रवाद से निपटने के लिए जरूरी कदम बताती रही हैं। हालांकि अदालतों, नागरिक समाज संगठनों और मानवाधिकार संस्थाओं ने बार-बार इन न्यायेतर हत्याओं और जवाबदेही की कमी पर चिंता जताई है।
एचआरसीपी के अनुसार, सीसीडी की कार्रवाइयां संयुक्त राष्ट्र के ‘कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा बल और आग्नेयास्त्रों के उपयोग के मूल सिद्धांतों’ का पालन नहीं करतीं, जिनमें घातक बल का प्रयोग केवल अत्यंत आवश्यक और अनुपातिक परिस्थितियों में ही करने तथा उल्लंघनकर्ताओं को जवाबदेह ठहराने का प्रावधान है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सीसीडी की प्रेस विज्ञप्तियों और प्राथमिकी में लगभग हर मामले में एक जैसा विवरण मिलता है कि संदिग्धों ने पहले गोली चलाई, पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की और मारे गए लोग ‘कुख्यात अपराधी’ थे। आयोग ने इसे स्वतंत्र कार्रवाई के बजाय सुनियोजित संदेश का संकेत बताया।
एचआरसीपी ने जोर देकर कहा कि टिकाऊ सार्वजनिक सुरक्षा, जांच, अभियोजन और न्यायिक जवाबदेही को दरकिनार कर ‘घातक शॉर्टकट’ अपनाने से हासिल नहीं की जा सकती।
रिपोर्ट में प्रांत भर में सभी ‘मुठभेड़ अभियानों’ पर तत्काल रोक लगाने, स्वतंत्र जांच को अनिवार्य बनाने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और संवैधानिक व अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप संरचनात्मक सुधार लागू करने की मांग की गई है।
आयोग ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो राज्य हिंसा का सामान्यीकरण पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय छवि को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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