भारत में आईआईटी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए की गई 'इंडिया डीप टेक एक्सेलेरेटर' की घोषणा
नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। इंडिया डीप टेक एलायंस (आईडीटीए) और शिकागो यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के पोल्स्की सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन ने मंगलवार को इंडिया डीप टेक एक्सेलेरेटर लॉन्च करने की घोषणा की। यह 10 हफ्तों का विशेष कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य आईआईटी से जुड़े डीप टेक स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद करना है।
यह पहल पोल्स्की सेंटर के नेतृत्व में तैयार की गई है और इसे भारत के प्रमुख आईआईटी इनोवेशन नेटवर्क और इनक्यूबेटरों के साथ मिलकर विकसित किया गया है, जिनमें आईआईटी बॉम्बे में एसआईएनई, आईआईटी दिल्ली में एफआईटीटी और आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क शामिल हैं।
यह कार्यक्रम अप्रैल से जून 2026 तक चलेगा और इसमें अधिकतम 15 स्टार्टअप्स का चयन किया जाएगा। चयनित स्टार्टअप्स को विशेष वर्कशॉप, कोचिंग और संभावित ग्राहकों व निवेशकों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के तहत जून में भारत में एक शोकेस और अमेरिका के बे एरिया में एक विशेष प्रस्तुति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां शीर्ष प्रदर्शन करने वाली कंपनियां अपने समाधान पेश करेंगी।
इस पहल का उद्देश्य भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले स्टार्टअप्स को फंडिंग, वेंचर क्रिएशन और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच दिलाने के लिए एक मजबूत और दोहराने योग्य मार्ग तैयार करना है।
इंडिया डीप टेक एक्सेलेरेटर का लक्ष्य उन आईआईटी से जुड़े स्टार्टअप्स को समर्थन देना है, जो वैश्विक बाजार में तेजी से व्यावसायिक सफलता और फंडिंग हासिल करना चाहते हैं।
आईडीटीए रणनीतिक मार्गदर्शन और संस्थापकों को सहयोग देगा, जबकि अरोआ वेंचर पार्टनर्स ने चयनित स्टार्टअप्स को प्रति कंपनी 2 लाख डॉलर तक निवेश देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा, कई अन्य वेंचर कैपिटल फर्में भी वर्कशॉप, मेंटरिंग और संभावित निवेश सहयोग प्रदान करेंगी।
सेलेस्टा कैपिटल के संस्थापक प्रबंध भागीदार और आईडीटीए की संस्थापक कार्यकारी समिति के सदस्य श्रीराम विश्वनाथन ने कहा कि आईआईटी विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग और शोध तैयार करते हैं, लेकिन कई डीप टेक नवाचार अभी भी व्यावसायिक स्तर तक पहुंचने में संघर्ष करते हैं। यह कार्यक्रम उस आखिरी चरण की दूरी को कम करने में मदद करेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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Bihar News: भोजपुर की मुखिया' बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, महिलाओं के साथ मिलकर शुरू किया ‘संगिनी’ पैड प्लांट
Bihar News: कोरोना काल में जब देशभर में लॉकडाउन लगा था और लाखों लोगों की नौकरी चली गई थी, उसी समय बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड की दांवा पंचायत में एक नई शुरुआत हुई. यहां की मुखिया सुशुमलता कुशवाहा ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सेनेटरी पैड बनाने का छोटा प्लांट शुरू कराया.
पंचायत स्तर पर बनाई पैड योजना
मुखिया सुशुमलता ने सोशल वर्क में मास्टर डिग्री हासिल की है. शादी के बाद साल 2016 में वह दांवा पंचायत की मुखिया बनीं. एक बैठक के दौरान महिलाओं ने मासिक धर्म के समय होने वाली परेशानी और महंगे सेनेटरी पैड की समस्या उठाई. इसके बाद उन्होंने पंचायत स्तर पर ही पैड बनाने की योजना बनाई.
कैसे स्थापित की सेमी-ऑटोमेटिक मशीन
तत्कालीन जिलाधिकारी के सहयोग और सरकारी योजना के तहत मिले 10 लाख रुपये से सेमी-ऑटोमेटिक मशीन लगाई गई. कुछ अतिरिक्त राशि जोड़कर पूरा प्लांट तैयार किया गया. इस प्लांट में जीविका समूह की महिलाएं काम करती हैं. कच्चा माल डालने से लेकर कटिंग, फोल्डिंग, पैकिंग और बिक्री तक का काम वही संभालती हैं.
कैसे तैयार होते हैं पैड
यहां ‘संगिनी’ ब्रांड नाम से सेनेटरी पैड तैयार किए जाते हैं. रोजाना 8 घंटे की शिफ्ट में करीब 4,500 पैड बनाए जाते हैं. ये पैड अल्ट्रा-थिन और एक्स्ट्रा लार्ज हैं, जिनकी क्षमता 100 मिलीलीटर तक है. खास बात यह है कि बाजार की तुलना में ये काफी सस्ते हैं. 23 रुपये में 6 पैड का एक पैकेट उपलब्ध है. जीविका दीदियां इन्हें आसपास के गांवों में बेचती हैं.
इसलिए लिया गया ये फैसला
शुरुआत में गांव की महिलाओं और लड़कियों में हिचकिचाहट थी. कई घरों में अब भी कपड़े का इस्तेमाल होता था. इसे बदलने के लिए मुखिया और जीविका समूह की महिलाओं ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया. अब युवा लड़कियों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है.
दूसरे जिलों तक Pad पहुंचाने का लक्ष्य
मुखिया का लक्ष्य है कि आने वाले समय में ‘संगिनी’ पैड को दूसरे जिलों तक पहुंचाया जाए और बालिका छात्रावासों में इसकी आपूर्ति की जाए. यह पहल महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी बना रही है.
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