हरियाणा का बजट होगा ‘जनता का बजट’, CM सैनी बोले– 60 वादे पूरे; सरकार की प्राथमिकताओं की दी जानकारी
Haryana News: चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आगामी बजट सत्र को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने बताया कि राज्य का बजट सत्र 20 फरवरी से शुरू होगा. इस सत्र में जनकल्याण योजनाओं और भविष्य की विकास नीतियों पर फोकस रहेगा. सरकार ने 2024 में 217 संकल्प जारी किए थे. इनमें से 60 वादे एक साल के भीतर पूरे कर दिए गए हैं और 120 पर तेजी से काम चल रहा है. 17 अक्टूबर 2024 को नए मंत्रिमंडल के गठन के बाद सरकार ने कई फैसले लिए.
जारी है लाड़ो लक्ष्मी योजना
सीएम ने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के लिए शपथ लेने के तुरंत बाद 25 हजार नौकरियां देने का फैसला लागू किया गया. वहीं, 18 अक्टूबर से सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस की सुविधा शुरू कर दी गई. सरकार ने ‘लाड़ो लक्ष्मी योजना’ के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की योजना जारी रखी है. इसके लिए बजट में 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. अब तक चार किस्तें जारी की जा चुकी हैं. गरीब परिवारों को 500 रुपये में गैस सिलेंडर देने की योजना भी लागू है.
24 फसलों की MSP पर खरीद
कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) का सफल आयोजन किया गया, जिसमें करीब 13 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया. परीक्षार्थियों को घर से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई. सीएम ने बताया कि हरियाणा देश का पहला राज्य है जहां 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जा रही है. इतना ही नहीं पिछला बजट जनता के सुझावों से तैयार किया गया था. सरकार को 1592 सुझाव मिले थे, जिनमें से 706 को बजट में शामिल किया गया. अब 2025-26 के बजट के लिए 13 बैठकों में 2199 सुझाव मिले हैं. साथ ही एआई चैटबॉट के जरिए 12,400 से ज्यादा सुझाव प्राप्त हुए हैं.
जीडीपी और आय में बढ़ोतरी
29 जनवरी 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार हरियाणा की जीडीपी 13,67,769 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जो पिछले साल 12,13,951 करोड़ रुपये थी. राज्य की जीडीपी में 12.67% की बढ़ोतरी हुई है. प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 3,58,171 रुपये है, जो राष्ट्रीय औसत 2,19,575 रुपये से काफी ज्यादा है. हरियाणा इस मामले में देश के पांच शीर्ष राज्यों में शामिल है. सीएम ने कहा कि आने वाला बजट विकसित हरियाणा की मजबूत नींव रखेगा और लोगों को महसूस होगा कि यह सच में जनता का बजट है.
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इटली का ‘क्रिकेट’ वाला चमत्कार:जिस देश में घास की पिच तक नहीं, वह वर्ल्ड कप में नेपाल को हरा चुका; 78 साल के बुजुर्ग का सपना सच
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टी20 वर्ल्ड कप के एक मैच में इटली ने नेपाल को 10 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया था। यह 78 साल के फ्रांसिस जयराजा के लिए एक चमत्कार था, जो स्टेडियम में बैठकर अपनी आंखों के सामने अपने 50 साल के संघर्ष को जीत में बदलते देख रहे थे। यह कहानी है एक ऐसे देश इटली की, जहां फुटबॉल तो धर्म है, लेकिन क्रिकेट के लिए एक जूनून कुछ लोगों के दिल में धड़कता रहा और इन जुनूनी लोगों ने देश में क्रिकेट को बचाए रखा। श्रीलंका के जाफना से रोम तक का सफर श्रीलंका के जाफना से 1968 में गणित पढ़ने रोम पहुंचे फ्रांसिस जयराजा ने नहीं सोचा था कि वे इटली के पहले क्रिकेट कप्तान बनेंगे। वे दिन में नौकरी करते और फिर शाम को विदेशी दूतावासों के कर्मचारियों के साथ खेलते। यहीं उनकी मुलाकात सिमोन गैम्बिनो से हुई। गैम्बिनो गर्मियों में इंग्लैंड में क्रिकेट देख चुके थे। दोनों ने 1980 में ‘इटालियन क्रिकेट फेडरेशन’ की नींव रखी। 1984 में इटली की टीम पहली बार इंग्लैंड दौरे पर गई, जिसके कप्तान जयराजा थे। मिलान और युवेंटस जैसे मशहूर क्लबों की शुरुआत में शामिल था क्रिकेट इटली में आम आदमी को क्रिकेट समझाना टेढ़ी खीर है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इटली के मशहूर फुटबॉल क्लब एसी मिलान और युवेंटस की शुरुआत क्रिकेट और फुटबॉल क्लब के रूप में ही हुई थी। शुरुआत में एसी मिलान का नाम ‘मिलान फुटबॉल एंड क्रिकेट क्लब’ था, लेकिन 1900 के दशक में वहां से क्रिकेट गायब हो गया। इसका एक बड़ा कारण था बेनिटो मुसोलिनी का फासीवादी शासन। उन्होंने क्रिकेट को ‘अन-इटालियन’ और ‘अंग्रेजों का खेल’ बताकर इसे दबा दिया और फुटबॉल को राष्ट्रवाद के हथियार के तौर पर प्रचारित किया। 2023-24 में कुछ शहरों में क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध भी लग चुका 2023-24 के आसपास मोनफाल्कन शहर की मेयर ने पार्कों में क्रिकेट पर यह कहकर बैन लगा दिया था कि यह संस्कृति और सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। इटली में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। गैम्बिनो बताते हैं, ‘शायद हम वर्ल्ड कप खेलने वाले पहले ऐसे देश हैं, जिसके पास अपने देश में ढंग की घास वाली विकेट तक नहीं हैं।’ हालांकि, इस जीत के बाद इटली में क्रिकेट को लेकर माहौल बन रहा है। गैम्बिनो व लिएंड्रो का मानना है कि असली बदलाव ओलिंपिक से आएगा। जब इटली के लोग क्रिकेट को ओलिंपिक में देखेंगे, तभी यह खेल वहां का हिस्सा बन पाएगा।
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