यादों में हलीम : पर्दे के पीछे के असली उस्ताद, जिनकी धुन पर 'मधुबन में राधिका' ने किया नृत्य
मुंबई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। अक्सर जब हम भारतीय शास्त्रीय संगीत और सितार की बात करते हैं, तो हमारे जहन में पंडित रवि शंकर और उस्ताद विलायत खां के नाम पहले आते हैं। लेकिन, 20वीं सदी के संगीत के आकाश में एक 'सितार त्रयी' थी, जिसका तीसरा और सबसे प्रयोगात्मक कोना अब्दुल हलीम जाफर खां थे।
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