फिक्सिंग के आरोपों के बीच PCB का बड़ा फैसला, स्टार विकेटकीपर मोहम्मद रिजवान को सौंपी टीम की कमान
Mohammad Rizwan: पाकिस्तान क्रिकेट से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान को घरेलू क्रिकेट में वापसी की अनुमति दे दी है. सट्टेबाजी और ड्रेसिंग रूम की गोपनीय जानकारी लीक करने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे रिजवान को PCB से अंतरिम राहत मिली है. वे 19 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले प्रतिष्ठित घरेलू फर्स्ट-क्लास टूर्नामेंट 'प्रेसिडेंट्स कप' में खेलते नजर आएंगे. हैरान करने वाली बात यह है कि रिजवान को सिर्फ खेलने की हरी झंडी ही नहीं मिली है, बल्कि वे अपनी टीम SNGPL के कप्तान की भूमिका भी संभालेंगे.
क्यों चल रही है रिजवान पर फिक्सिंग की जांच?
पाकिस्तान के स्टार क्रिकेटर मोहम्मद रिजवान और ओपनर इमाम-उल-हक हाल ही में एक बड़े विवाद में फंस गए थे. इन दोनों खिलाड़ियों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं. पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है. दोनों खिलाड़ियों के मोबाइल फोन जब्त कर उनके वित्तीय लेनदेन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है. इसी जांच के चलते रिजवान को अगस्त में इंग्लैंड दौरे के बीच से ही वापस पाकिस्तान बुला लिया गया था.
???? MUHAMMAD RIZWAN IS BACK! ????????
— Rayham. (@RayhamUnplugged) October 17, 2026
- Muhammad Rizwan is all set to make his comeback into the cricket field with his comeback to begin through domestic circuit.
- Muhammad Rizwan is also expected to play the Nepal Premier League. pic.twitter.com/xS96Nwcqno
SNGPL टीम के हेड कोच मोहम्मद हफीज ने की पुष्टि
तमाम विवादों और जांच के बीच, सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइंस लिमिटेड (SNGPL) के मुख्य कोच और पूर्व पाकिस्तानी ऑलराउंडर मोहम्मद हफीज ने रिजवान की टीम में वापसी की पुष्टि की है. हफीज ने साफ किया कि पीसीबी के घरेलू क्रिकेट विभाग से मंजूरी मिलने के बाद रिजवान को प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी के अंतिम दौर के मुकाबले के लिए टीम में शामिल किया गया है. वे न सिर्फ टीम की तरफ से मैदान पर उतरेंगे, बल्कि कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभालेंगे.
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क्रिकेट खेलने की छूट मिली, लेकिन क्लीन चिट नहीं
फैंस और मीडिया के लिए यह समझना जरूरी है कि मोहम्मद रिजवान को सिर्फ घरेलू क्रिकेट खेलने की अंतरिम राहत मिली है, उन्हें आरोपों से क्लीन चिट नहीं दी गई है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक, एनसीसीआईए (NCCIA) की साइबर क्राइम विंग बैकग्राउंड में इन आरोपों की जांच जारी रखेगी. अगर जांच में सट्टेबाजी या फिक्सिंग से जुड़ा कोई भी पुख्ता सबूत मिलता है, तो रिजवान पर एक बार फिर बैन का खतरा मंडरा सकता है.फिलहाल, टीम मैनेजमेंट का मानना है कि मैदान से दूर रहने के बजाय रिजवान का क्रिकेट खेलना उनके फॉर्म के लिए बेहतर होगा.
???? MOHAMMAD RIZWAN TO LEAD SNGPL! ????????
— Mian Ahmad (@MianAhmad_56) October 17, 2026
Mohammad Rizwan will captain SNGPL in their President’s Trophy match against KRL, starting October 19 at Shoaib Akhtar Cricket Stadium in Rawalpindi. https://t.co/6AfnebwZ0G pic.twitter.com/yn3ke7uPqS
पाकिस्तान क्रिकेट में फिर बड़ा उलटफेर
मोहम्मद रिजवान पाकिस्तान के सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में से एक रहे हैं. ऐसे में फिक्सिंग जैसे संगीन आरोपों के बीच उनकी मैदान पर वापसी और अचानक कप्तान बनाया जाना पाकिस्तान क्रिकेट के प्रशासनिक तौर-तरीकों पर भी कई सवाल खड़े करता है. अब सभी क्रिकेट फैंस की नजरें 19 अक्टूबर से शुरू होने वाले प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी के मुकाबले पर टिकी हैं, जहां रिजवान अपने बल्ले और कप्तानी से इन विवादों का जवाब देने की कोशिश करेंगे.
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हैदराबाद में डिजिटल अरेस्ट के जरिए 29 लाख रुपये से अधिक की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार
हैदराबाद, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। हैदराबाद पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी से 29 लाख रुपये से अधिक की ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपियों को ठगी की रकम के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने, धोखाधड़ी से हासिल धन निकालने और पैसों के लेनदेन का सुराग छिपाने के लिए उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर साइबर ठगों के साथ मिलकर यूएसडीटी (डिजिटल करेंसी) से जुड़े लेनदेन में मदद करने और इसके बदले कमीशन लेने का भी आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदराबाद निवासी मोहम्मद अशफाक हुसैन और अहमद नजीब उद्दीन के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, तीसरा आरोपी सचिन बेंगलुरु का रहने वाला है और फरार है।
हैदराबाद शहर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं एसआईटी) एम. श्रीनिवासुलु ने रविवार को जारी एक बयान में मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 63 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को 3 मार्च 2025 को अज्ञात लोगों के फोन आए थे। फोन करने वालों ने खुद को दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताया था।
आरोपियों ने पीड़ित पर 6.8 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया और गिरफ्तारी की धमकी दी। अपने दावों को सही साबित करने के लिए उन्होंने पीड़ित को फर्जी सरकारी दस्तावेज भी भेजे। उन्होंने दावा किया कि कथित अपराध में पीड़ित के आधार संबंधी विवरण और फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग किया गया है।
इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित से उसकी निजी और बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल की। उन्होंने रकम वापस करने का आश्वासन देकर जांच और सत्यापन के नाम पर पीड़ित और उसकी बेटी को पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।
ठगों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए पीड़ित और उसकी बेटी को इस मामले में किसी से बात नहीं करने की हिदायत भी दी। साथ ही, दोनों को गिरफ्तारी की धमकी दी गई। आरोपियों की बातों पर भरोसा करके पीड़ित और उसकी बेटी ने कुल 29,17,668 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
रकम वापस नहीं मिलने पर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111(2)(बी), 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस के अनुसार, दोनों गिरफ्तार आरोपी आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। इसी दौरान उनकी व्हाट्सऐप के जरिए सचिन से जान-पहचान हुई। सचिन ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से हासिल रकम को कई बैंक खातों के जरिए स्थानांतरित करने की योजना बनाई, ताकि पैसों के लेनदेन का पता लगाना और जांच एजेंसियों के लिए धन के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
योजना के तहत अशफाक ने नजीब से बैंक खातों का विवरण जुटाया और उसे सचिन के साथ साझा किया। इसके बाद सचिन ने नजीब की ओर से उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर की।
बाद में अशफाक और नजीब ने चेक के जरिए रकम निकाली और कैश डिपॉजिट मशीनों (सीडीएम) के माध्यम से नकदी को अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराया। पुलिस के मुताबिक, सचिन ने इन पैसों का इस्तेमाल यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी खरीदने में किया और बाद में इसे ऑनलाइन बेचकर भारतीय रुपये हासिल किए।
--आईएएनएस
डीएससी
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