अमेरिका-ईरान के बीच दूसरे राउंड की वार्ता आज, ट्रंप ने कोशिशें नाकाम होने पर नतीजों की दी चेतावनी
वॉशिंगटन, 17 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच आज जिनेवा में दूसरे राउंड की बैठक होने वाली है। आज का दिन दोनों देशों के लिए बेहद खास है। बैठक से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह उन बातचीत में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होंगे।
वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई है कि कोई बड़ी कामयाबी मिलेगी, लेकिन बातचीत विफल होने के बाद नतीजों की चेतावनी भी दे दी है। ट्रंप ने फ्लोरिडा से लौटते समय एयर फोर्स वन में विदेश में रिपोर्टरों से कहा, “आमतौर पर, ईरान बहुत सख्त बातचीत करने वाला है। मुझे उम्मीद है कि वे और ज्यादा समझदारी से काम लेंगे। वे एक समझौता करना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि वे डील न करने के नतीजे भुगतना चाहते हैं।”
ट्रंप ने हाल की सैन्य कार्रवाई की ओर भी इशारा करते हुए कहा, “उनके पास एक महीने के अंदर न्यूक्लियर हथियार होते। अगर ऐसा होता तो यह पूरी तरह से एक अलग समझौता होता।”
घरेलू मुद्दों को लेकर ट्रंप ने कहा, “आपने कम महंगाई देखी, बहुत कम महंगाई, कीमतें बहुत कम हैं। कई जगहों पर गैसोलीन 2 डॉलर प्रति गैलन से भी कम है, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी, लेकिन मैंने की, क्योंकि हम ड्रिल, बेबी ड्रिल के शुरुआती एक्सप्रेशन के हिसाब से चल रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “जैसे गैसोलीन, तेल और गैस की बात है, वैसे ही बाकी प्रोडक्ट्स भी जो. बाइडेन की वजह से महंगे थे। हमें विरासत में गड़बड़ी मिली थी और हमने अपने देश को बहुत ताकत के साथ वापस खड़ा किया है।”
इसके साथ ही ट्रंप ने क्राइम में रिकॉर्ड सुधार का दावा किया और कहा, “हमारे यहां 1900 के बाद से सबसे अच्छे मर्डर नंबर हैं, जो मेरे पिता के जन्म से पहले के हैं। हमने हजारों लोगों को बाहर निकाला है। कई क्रिमिनल्स जिन्हें लाया गया था, जिन्हें आने दिया गया था, उन्हें हटा दिया गया है।”
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के लिए फंडिंग को लेकर ट्रंप ने कहा कि वह इस हफ्ते डीएचएस फंडिंग पर डेमोक्रेट्स के साथ बैठेंगे। आंशिक शटडाउन के लिए उन्होंने डेमोक्रेट्स को दोषी ठहराया और कहा कि इसका रिपब्लिकन से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक डेमोक्रेट शटडाउन है।
वोटिंग कानूनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी की राय को लेकर उन्होंने कहा, “वे वोटर आईडी नहीं चाहते क्योंकि वे चुनावों में धोखा करना चाहते हैं। वे नागरिकता का सबूत नहीं देना चाहते। वे वोटर आईडी नहीं देना चाहते।”
जेफरी एपस्टीन मामले के बारे में सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, “मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। मुझे बरी कर दिया गया है। जेफरी एपस्टीन से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।”
इसके अलावा क्यूबा को लेकर ट्रंप ने कहा, “क्यूबा अभी एक फेल देश है। मार्को रुबियो अभी क्यूबा से बात कर रहे हैं और उन्हें जरूर एक डील करनी चाहिए, क्योंकि यह इंसानियत का सवाल है। यह सच में एक मानवीय खतरा है।”
अगर बातचीत फेल हो जाती है तो क्या एक्शन हो सकता है, इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैं इसका जवाब नहीं देना चाहता। मैं इसका जवाब क्यों दूंगा? अगर मैं देता, तो यह बहुत मुश्किल ऑपरेशन नहीं होता।”
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाल ही में हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने ताइवान का भी जिक्र किया। ताइवान को और हथियार भेजने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हमारी अच्छी बातचीत हुई और हम जल्द ही कोई फैसला करेंगे।”
इसके अलावा, ट्रंप ने फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा, “वह बहुत असरदार काम करती हैं। मुझे लगता है कि अंत में आप देखेंगे कि वह सचमुच महान प्रथम महिलाओं में से एक के रूप में जानी जाएंगी।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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Bangladesh Elections: बांग्लादेश में हिंदू भी बन सकता है प्रधानमंत्री, बस इन शर्तों को पूरा करना जरूरी
Bangladesh Elections: बांग्लादेश में तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. 13 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव हुए थे, जिसमें बीएनपी के टिकट पर उतरे दो हिंदुओं ने भी जीत हासिल की है. गायेश्वर चंद्र रॉय ढाका-3 सीट से जीते हैं तो वहीं निताई राय चौधरी ने वेस्ट मागुरा सीट से जीत हासिल की है. इस बीच लोगों के मन में एक सवाल है कि क्या कोई हिंदू भी बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बन सकता है. आइये जानते हैं इस बारे में…
बांग्लादेश के संविधान के अनुसार कोई हिंदू भी बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बन सकता है. बांग्लादेशी संविधान में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी खास धर्म से होने के बारे में नहीं लिखा है. बांग्लादेश में अगर एक व्यक्ति कुछ शर्तों को पूरा कर लेता है तो वह देश का प्रधानमंत्री बन सकता है.
इन शर्तों को पूरा करना जरूरी
बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले जातीय संसद का सदस्य होना पड़ेगा. बांग्लादेश की नेशनल पार्लियामेंट को जातीय संसद कहा जाता है. पार्लियामेंट का सदस्य हुए बिना प्रधानमंत्री नहीं बना जा सकता है. व्यक्ति बांग्लादेश का ही नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए. ये बुनियादी और संवैधानिक जरूरते हैं, जो हर एक उम्मीदवार पर लागू होती है. इन शर्तों का किसी धर्म और जाति से लेना-देना नहीं है.
संसद में बहुमत होना जरूरी
संसद के अधिकांश सदस्यों का विश्वास प्रधानमंत्री को हासिल होना चाहिए. बांग्लादेश में संसद में बहुमत हासिल करने वाली पार्टी या गठबंधन दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है. संविधान में ऐसा कोई भी क्लॉज नहीं है, जिसमें कहा गया हो कि सिर्फ मुस्लिम ही देश का नेतृत्व कर सकता है.
अब जानें बांग्लादेशी संविधान के बारे में
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेशी संविधान के आर्टिकल 41 में हर नागरिक को अपने धर्म को आजादी से मानने और फैलाने का अधिकार है. आर्टिकल 28 धर्म, नस्ल, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव पर रोकता है. आर्टिकल 19 सभी नागरिकों को बराबरी के मौके देने की बात करता है.
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