China में 1.5 अरब डॉलर का बिजनेस बेच सकती है Accenture, AI पर रहेगा पूरा जोर
दुनिया की बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार कंपनियों में शामिल एक्सेंचर चीन में अपने कारोबार को बेचने की तैयारी कर रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार, कंपनी अपने चीन कारोबार की संभावित बिक्री के लिए जेपी मॉर्गन की मदद ले रही है। इस सौदे का मूल्य करीब 1.5 अरब डॉलर तक हो सकता है। कंपनी यह कदम ऐसे समय में उठा रही है, जब एआई के बढ़ते इस्तेमाल से आईटी और सलाहकार सेवाओं के कारोबार में बड़े बदलाव हो रहे हैं।
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, पिछले एक साल के दौरान एक्सेंचर को चीन में अपने कारोबार को खरीदने में कुछ कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी। इसके बाद कंपनी ने अपने चीन कारोबार की रणनीतिक समीक्षा शुरू की है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि समीक्षा के बाद कारोबार बेचने का फैसला होगा या नहीं। संभावित सौदे में निजी निवेश कंपनियों और कुछ दूसरी बड़ी कंपनियों की दिलचस्पी देखने को मिल सकती है।
एक्सेंचर पूरे कारोबार को बेचने के बजाय इसमें अपनी बड़ी अल्पमत हिस्सेदारी बनाए रखने पर भी विचार कर सकती है। इससे मौजूदा ग्राहकों को सेवाएं जारी रखने और कारोबार में बदलाव के दौरान स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कंपनी और जेपी मॉर्गन ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।
गौरतलब है कि एक्सेंचर के शेयरों में पिछले कुछ महीनों के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर बहस है कि एआई कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाएगी या उसके लिए चुनौती बनेगी। कंपनी का मानना है कि एआई तकनीक को अपनाने के लिए दूसरी कंपनियों को विशेषज्ञ सलाह, तकनीकी सेवाओं और इसे लागू करने में मदद की जरूरत होगी। इससे एक्सेंचर जैसी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
दूसरी ओर, कुछ निवेशकों को आशंका है कि एआई के कारण कंपनियां सलाहकारों पर अपनी निर्भरता कम कर सकती हैं और पहले बाहरी कंपनियों से कराए जाने वाले काम खुद करने लगेंगी। इससे सलाहकार सेवाओं की मांग पर असर पड़ सकता है।
एक्सेंचर ने हाल ही में निवेशकों को बताया कि अगले 2 वर्षों तक उसकी आय में बढ़ोतरी की रफ्तार सीमित रह सकती है। हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि दशक के आखिर तक एआई से जुड़ी नई सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ कारोबार में तेजी आएगी। इस जानकारी के बाद कंपनी के शेयरों को सहारा मिला है। जून में अपने निचले स्तर पर पहुंचने के बाद शेयरों में करीब 85 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कंपनी ने इस महीने पूरे वित्त वर्ष के नतीजे भी जारी किए, जो वॉल स्ट्रीट के अनुमान से बेहतर रहे। सलाहकार सेवाओं और दूसरी कंपनियों के लिए कामकाज संभालने वाले कारोबार, दोनों के अच्छे प्रदर्शन ने इसमें योगदान दिया।
चीन कारोबार की बिक्री से मिलने वाली रकम एक्सेंचर के लिए उपयोगी हो सकती है। कंपनी एआई के जरिए अपनी लागत में होने वाली बचत का कुछ हिस्सा ग्राहकों को कम कीमतों के रूप में देने और एआई सेवाओं को मजबूत करने वाली कंपनियों के अधिग्रहण में लगाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कंपनी ने कर्ज को सीमित रखने और शेयरों की दोबारा खरीद तथा लाभांश के जरिए निवेशकों को पैसा लौटाने की प्रतिबद्धता जताई है।
एक्सेंचर की मुख्य वित्त अधिकारी एंजी पार्क ने निवेशकों के कार्यक्रम में कहा कि कंपनी पहले भी ऐसे कारोबार, सेवाओं, देशों और अनुबंधों से बाहर निकलती रही है, जो उसकी रणनीति या मुनाफे से जुड़े लक्ष्यों के अनुरूप नहीं होते।
बता दें कि अगस्त में समाप्त वित्त वर्ष में एक्सेंचर ने 74.2 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया था और कंपनी दुनिया के 120 से अधिक देशों में काम करती है। चीन क्षेत्र में उसके कारोबार में मुख्य भूमि चीन के साथ ताइवान और हांगकांग भी शामिल हैं। कंपनी के पूरे एशिया-प्रशांत कारोबार ने पिछले साल करीब 10 अरब डॉलर का राजस्व दिया था।
स्विस बैंक यूबीएस के विश्लेषकों का मानना है कि एआई सेवाओं के विस्तार से सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार बाजार में बड़ा अवसर पैदा हो सकता है। उनके अनुसार, एक्सेंचर करीब 3 ट्रिलियन डॉलर के संभावित बाजार का फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में है।
Vedanta ने South Africa में 600 Million Dollar निवेश कर Zinc उत्पादन क्षमता दोगुनी की
खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड ने दक्षिण अफ्रीका में जिंक के उत्पादन को बढ़ाने के लिए करीब 600 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इस निवेश के जरिए कंपनी ने अपनी गाम्सबर्ग खदान की सालाना उत्पादन क्षमता को दोगुना करके 500,000 टन कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य भारत और दक्षिण अफ्रीका में अपने सभी प्लांट्स से मिलकर हर साल 3 मिलियन टन जिंक का उत्पादन करना है।
दक्षिण अफ्रीका के नॉर्दर्न केप प्रांत में स्थित गाम्सबर्ग खदान के दूसरे चरण का उद्घाटन 18 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और वेदांता लिमिटेड की निदेशक प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने किया। यह परियोजना वेदांता की सहायक कंपनी वेदांता जिंक इंटरनेशनल के तहत विकसित की गई है। कंपनी ने इसे इस दशक में दक्षिण अफ्रीका के खनन क्षेत्र में किए गए बड़े निवेशों में से एक बताया है।
इस विस्तार के साथ वेदांता वैश्विक जिंक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। कंपनी की योजना भारत और दक्षिण अफ्रीका में कुल सालाना उत्पादन को 3 मिलियन टन तक पहुंचाने की है। इसके तहत भारत में काम करने वाली हिंदुस्तान जिंक से 2 मिलियन टन और दक्षिण अफ्रीका में वेदांता जिंक इंटरनेशनल से 1 मिलियन टन सालाना उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि गाम्सबर्ग परियोजना दक्षिण अफ्रीका में वेदांता की 21 अरब रैंड यानी करीब 1.5 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता का हिस्सा है। कंपनी ने 2018 में दक्षिण अफ्रीका निवेश सम्मेलन के दौरान यह प्रतिबद्धता जताई थी। ताजा निवेश ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पिछले महीने नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने भारत से अपने देश के प्रमुख उद्योगों में ज्यादा निवेश करने की अपील की थी। गाम्सबर्ग परियोजना को इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। रामाफोसा ने उद्घाटन समारोह में कहा कि यह निवेश अब केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निर्माण से आगे बढ़कर उत्पादन तक पहुंच गया है। उन्होंने नॉर्दर्न केप में जिंक गलाने की इकाई लगाने की वेदांता की योजना का भी स्वागत किया।
वेदांता की निदेशक प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने कहा कि यह परियोजना दक्षिण अफ्रीका के साथ कंपनी के लंबे समय तक बने रहने वाले संबंधों को दिखाती है। उन्होंने कंपनी के संस्थापक और अध्यक्ष अनिल अग्रवाल के उस विचार का भी जिक्र किया, जिसके तहत देश के खनिज संसाधनों का इस्तेमाल उद्योगों के विकास, रोजगार और लोगों के लिए नए अवसर पैदा करने में किया जाना है।
कंपनी का निवेश केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। वेदांता ने 2011 में वेदांता जिंक इंटरनेशनल का अधिग्रहण करने के बाद से दक्षिण अफ्रीका में सामाजिक योजनाओं पर करीब 20 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इन योजनाओं में स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और जरूरतमंद लोगों की मदद शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इन पहलों से हर साल 32,000 से ज्यादा लोगों को लाभ मिलता है।
इसी साल कंपनी ने नामाक्वा में कैंसर के इलाज के लिए एक केंद्र भी शुरू किया है। बता दें कि जिंक का इस्तेमाल निर्माण, वाहन उद्योग और बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर होता है। इससे लोहे और इस्पात पर जंग लगने से बचाने वाली परत बनाई जाती है, जिससे उनकी उम्र बढ़ती है। ऐसे में वेदांता की यह परियोजना उत्पादन बढ़ाने के साथ औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।
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