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देश के 3 IITs क्‍यों बना रहे हैं मेडिकल कॉलेज:यहां डॉक्‍टर्स नहीं, मेडिकल इंजीनियर्स की पढ़ाई होगी; IIT डायरेक्‍टर्स ने बताया प्‍लान

एक हॉस्पिटल में पेशेंट का CT स्कैन चल रहा है, और रिपोर्ट में कुछ हिस्सा ब्लर आया है। डॉक्टर को समझ नहीं आ रहा है कि क्या वो ब्‍लर हिस्‍सा मशीन की गड़बड़ी की वजह से है, वहीं मशीन टेक्‍नीशियन को नहीं पता कि क्‍या ये मरीज की किसी बीमारी का संकेत। ऐसे में एक ऐसे प्रोफेशनल की जरूरत है जो मेडिकल और टेक्नोलॉजी दोनों से जुड़ी समझ रखता हो। IIT मद्रास, IIT खड़गपुर और IIT कानपुर इस मेडिकल एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए काम कर रहे हैं।IITs का कहना है कि इनका लक्ष्य ऐसे टेक्निकल एक्सपर्ट तैयार करना है, जो मशीनों और मरीज दोनों को समझ सकें। सीधी बात ये है कि डॉक्टर शरीर के बारे में जानते हैं और इंजीनियर मशीनों के बारे में। किसी हॉस्पिटल में ऐसी किसी भी यूनिट में मौजूद किसी भी व्यक्ति को दोनों चीजों की ट्रेनिंग नहीं मिली होती है। यही वजह है कि देश के 3 IITs मेडिकल कॉलेजेस बना रहे हैं। IIT मद्रास ने डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी शुरू किया IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामकोटि के मुताबिक, IIT मद्रास मेडिकल साइंसेज का नया स्कूल शुरू करने जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना है। IIT मद्रास बीएस इन मेडिकल साइंस एंड इंजीनियरिंग प्रोग्राम भी शामिल है। मैथमेटिकल मॉडलिंग इन फिजीकोलॉजी, क्वांटिटेटिव ह्यूमन फिजियॉलॉजी, इन्ट्रोडक्शन टू क्लीनिकल न्यूरोसाइंस और मेडिकल इमेजस जैसे कोर्स ऑफर करता है। जिसमें मानव शरीर के अंगों और सिस्टम (जैसे नर्व सिस्टम, स्केटल मसल और हार्ट सिस्टम) के कार्यों को समझने से जुड़े कोर्स हैं। डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामाकोटी ‘किसी भी टेक्नोलॉजी संस्थान को एक मेडिकल स्कूल जरूर शुरू करना चाहिए। वरना, एक देश के तौर पर हम मेडिकल मार्केट में टिक नहीं पाएंगे।‘किसी भी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट को मेडिकल स्कूल जरूर शुरू करना चाहिए। नहीं तो, एक देश के तौर पर हम मेडिकल मार्केट में टिक नहीं पाएंगे।’ IIT खड़गपुर ने मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग शुरू की IIT खड़गपुर मेडिकल बिल्डिंग की शुरुआत करने वाला देश का पहला IIT है। खड़गपुर में स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी 2001 में शुरू हुआ था और इसका MMST प्रोग्राम खास तौर पर उन लोगों को इंजीनियरिंग और फिजिकल साइंसेज सिखाने के लिए बनाया गया था, जो पहले से ही डॉक्टर हैं। IIT खड़गपुर ने अपने ऑन-कैंपस हॉस्पिटल, डॉ. बी. सी. रॉय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी बनाया है। इसके तहत मेडिकल पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स के लिए मंजूरी हासिल की है। इंस्टीट्यूट को क्लीनिकल ट्रेनिंग, और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए 20 सीटों के साथ पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) कोर्स शुरू करने के लिए NMC से मंजूरी मिल चुकी है। खड़गपुर मेडिकल में PG कोर्स शुरू करने वाला देश का पहला IIT भी है। इसमें मेडिकल इमेजिंग, मॉलिक्यूलर इमेजिंग और इमेज एनालिसिस, बायोमटेरियल्स और इम्प्लांट्स, बायोफिजिक्स, कैंसर का शुरुआती पता लगाना, इम्यूनो-टेक्नोलॉजी, क्लिनिकल बायोमार्कर की खोज की रिसर्च और प्रिवेंटिव एंड प्रमोटिव हेल्थ सिस्टम शामिल हैं। इस स्कूल ने 2007 से 2016 तक मेडिकल इमेजिंग एंड इंफॉर्मेटिक्स में M.Tech प्रोग्राम (2 साल) चलाया। IIT कानपुर का गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी IIT कानपुर गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी सबसे पहले हायर और सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल डिग्री शुरू करेगा। इससे एडवांस मेडिसिन, मेडिकल रिसर्च और इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी को एक साथ लाया जा सकेगा। सच तो ये है कि IITs को डॉक्टरों की जरूरत नहीं है। वे तीनों असल में एक अलग तरह के एक्सपर्ट की तलाश में हैं जिन्हें 'फिजिशियन-इंजीनियर' कहा जाता है। IITs को डॉक्टर्स की जरूरत क्यों है आज एक डॉक्टर मेडिकल इमेजिंग, AI बेस्ड सिस्टम, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, बायो-सेंसर, रोबोटिक्स के बीच काम करता है। ऐसे इक्विपमेंट को बनाने वाले इंजीनियर अब पेशेंट को सिर्फ एक 'दूर बैठा यूजर' नहीं मान सकते। IIT खड़गपुर के डायरेक्टर, प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती का तर्क है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग इन दोनों पेशों को अलग रखने का तरीका अब कारगर नहीं रह गया है। ‘तीस साल पहले, मेडिकल के ज्यादातर काम टेक्नोलॉजी की मदद से किए जा सकते थे। लेकिन आज, टेक्निकल डायग्नोज और ट्रीटमेंट दोनों ही एक दूसरे से जुड़े हैं। प्रोफेसर चक्रवर्ती के मुताबिक, ‘पुराना मॉडल था, जिसमें मेडिकल सेक्टर एक समस्या की पहचान करता है और इंजीनियरिंग सेक्टर उसके लिए एक मशीन बना देता है लेकिन अब ये नाकाफी साबित हो रहा है। दो प्रोफेशनल, जो किसी गलत चीज को बेहतर बनाने में लगे हैं। ‘हाइब्रिड सोच का फायदा ये नहीं है कि ये दो एक्सपर्ट की जगह ले लेती है। बल्कि, इसका फायदा ये है कि यह किसी बीमारी को बेहतर बनाने की कोशिश शुरू होने से पहले ही सही समस्या की पहचान कर लेती है।’ इसके साथ ही मेड टेक में आत्मनिर्भरता जरूरी है। भारत आज भी वेनटिलेटर, स्कैनर, लाइफ सपोर्ट, पेस मेकर सिस्टम विदेशों से आयात करता है। जब भारत टेक मेडिकल में एडवांस बन जाएगा तब हमारी निर्भरता कम हो जाएगी। IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामाकोटी के मुताबिक इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंसेज का एक स्कूल भी खोलेगा। जो भविष्य में अंडरग्रेजुएट MBBS, पोस्टग्रेजुएट MD और डॉक्टोरल PhD की डिग्री देगा। MIT हरबर्ड एक दूसरे की क्लास ले सकते हैं मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT)इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है। MIT अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्टेट के कैम्ब्रिज शहर में स्थित दुनिया की प्राइवेट रिसर्च यूनिवर्सिटी है। ------------------------------ ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें.. ‘NEET पेपर बनता है, तभी बिकता है’: पेपर लीक कमेटी के प्रमुख नीलेकणि के 7 सुझाव, एग्जाम के कुछ घंटे पहले ही केश्चन पेपर तैयार हो NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा में सुधार के लिए बनाई गई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के प्रमुख और इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि ने सुझाव दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें..

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रिजिजू बोले- भारत न तो बांग्लादेश न फ्रांस:इंडिया में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल हो सकता है, लेकिन सिर्फ चुनावों के जरिए

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को आरोप लगाया कि फ्रांस और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं जैसी साजिश भारत में भी रची गई थी। कुछ नेताओं ने युवाओं को भड़काने और सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। रिजिजू ने कहा कि ऐसी खतरनाक साजिश रचने वाले यह भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल हो सकता है, लेकिन केवल चुनावों के जरिए, सोरोस के जरिए नहीं। रिजिजू ने X पर पोस्ट के अलावा एक वीडियो भी शेयर किया। जिसमें राहुल गांधी और नेहा बोरा को दिखाया गया है। दरअसल 14 अक्टूबर पहले नेहा बोरा का बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शन के समर्थन वाला वीडियो सामने आया था। नेहा बोरा ने कहा था- भारत का जेन-जी आंदोलन बांग्लादेश से प्रेरित नेहा बोरा ने दो दिन पहले बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) को उनके छठे सेंट्रल कॉन्फ्रेंस के लिए बधाई देते हुए एक वीडियो मैसेज भेजा था। इसमें उन्होंने कहा कि भारत का जेन-जी आंदोलन बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरित है। SSF बांग्लादेश के छात्र आंदोलन और तख्तापलट के घटनाक्रमों में सक्रिय था। नेहा बोरा का पूरा वीडियो मैसेज… आपको हमारा लाल सलाम। आज भारत में जो जेन-जी आंदोलन हो रहा है, वह सबसे पहले बांग्लादेश में शुरू हुआ। आपने हमें रास्ता दिखाया, इसके लिए हम आपके शुक्रगुजार हैं। हम जानते हैं कि बांग्लादेश में शुरू हुआ आंदोलन लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों के लिए था। आज भारत में युवा जिस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं, वह भी लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। हम जानते हैं कि बांग्लादेश में युवा धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ रहे थे। भारत में जेन-जी भी यही लड़ाई लड़ रहा है। ढाका यूनिवर्सिटी और जहांगीर यूनिवर्सिटी बढ़ती धमकियों और हमलों के बीच मुश्किल हालात में हैं। भारत में भी हमारे संस्थानों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की यही स्थिति है, जहां छात्रों के अधिकारों पर बड़े पैमाने पर रोक लगाई जा रही है। शिक्षा के निजीकरण पर जोर दिया जा रहा है। यहां शिक्षण संस्थानों का भगवाकरण हो रहा है और आलोचनात्मक सोच को दबाया जा रहा है। भाजपा बोली थी- राहुल लोकतंत्र को नष्ट करने की साजिश रच रहे भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने कहा- बांग्लादेश में क्या हुआ, यह साफ है। एक इस्लामवादी समूह ने भीड़ का इस्तेमाल करते हुए अराजकता फैलाई और पूरी व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश की। उनका मकसद सत्ता परिवर्तन था। नेहा बोरा भी भारत में बांग्लादेश जैसा अराजक आंदोलन चाहती हैं। भंडारी ने कहा- अब यह स्पष्ट है कि जब राहुल गांधी लोकतांत्रिक तरीकों से अपने परिवार को सत्ता में लाने में विफल रहते हैं, तो वह अपने पूरे इकोसिस्टम के साथ भारत में लोकतंत्र को नष्ट करने की साजिश रच रहे हैं। राहुल का उद्देश्य लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि अराजकता को वैधता देना है। नेहा बोरा NEET पेपर लीक से SIR विरोध तक प्रदर्शनों में सक्रिय रहीं इस साल जुलाई में नेहा बोरा NEET पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आईं। इन प्रदर्शनों में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई थी। वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में भी शामिल हुईं। अक्टूबर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान वह फिर चर्चा में आईं। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। हिरासत के दौरान जारी एक वीडियो में उन्होंने कहा- मैं हिरासत में हूं, आंदोलन नहीं। उनके भाषणों और प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए। राहुल गांधी के साथ मार्च में गईं, आवास पर बैठक में दिखीं 12 अक्टूबर: दिल्ली में INDIA ब्लॉक के मार्च के दौरान नेहा बोरा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ सबसे आगे नजर आईं। इस दौरान राहुल गांधी उनके कंधे पर हाथ रखकर चलते दिखे। 13 अक्टूबर: वह राहुल गांधी के 5, सुनेहरी बाग रोड स्थित आवास पर हुई चाय पर बैठक में भी शामिल हुईं। बैठक में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें… प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा के बोलते ही हंगामा, दीपके बोले- देश में तिरंगा फहराना अपराध हुआ कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को दिल्ली में जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें नेहा के बोलने से पहले कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। दीपके ने कहा- सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए तिरंगा फहराना भी अपराध बना दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

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उम्र नहीं फिटनेस और फॉर्म देखें, Sunil Gavaskar ने Team India के लिए की Krunal Pandya की वकालत

भारतीय क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी को लेकर चर्चा तेज है। तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने लंबे इंतजार के बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी की है, जिसके बाद अब दूसरे सीनियर खिलाड़ियों को भी दोबारा मौका मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसी बीच भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और पूरी तरह फिट है, तो उसकी उम्र को टीम में चयन के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए।

भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर करीब 1,425 दिन बाद भारतीय टीम में वापसी की है। उनके चयन से यह संकेत मिला है कि चयनकर्ता अनुभवी खिलाड़ियों को फिर से मौका देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की संभावित वापसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सुनील गावस्कर ने इस चर्चा के बीच क्रुणाल पांड्या का नाम आगे रखा है, जो पिछले कुछ समय से अपने खेल से प्रभावित कर रहे हैं।

क्रुणाल ने 2026 के आईपीएल सत्र में गेंद और बल्ले दोनों से अहम योगदान दिया। उन्होंने 16 मैचों में 14 विकेट हासिल किए। इस दौरान उनकी गेंदबाजी औसत 30.35 और रन देने की दर 8.45 रही। बल्लेबाजी में भी उन्होंने 226 रन बनाए। इसमें मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेली गई मैच जिताने वाली अर्धशतकीय पारी भी शामिल है। बता दें कि क्रुणाल अपनी टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पिछली 2 खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

जियोस्टार से बातचीत के दौरान सुनील गावस्कर ने क्रुणाल की गेंदबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि क्रुणाल गेंद को बहुत ज्यादा घुमाने वाले गेंदबाज नहीं हैं, लेकिन वह अपनी लाइन और लेंथ में लगातार बदलाव करते हैं। वह बल्लेबाज के इरादे को समझकर गेंदबाजी करते हैं और कभी पैड की तरफ गेंद डालते हैं, तो कभी बाउंसर का इस्तेमाल करते हैं। उनका मकसद केवल विकेट लेना ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने से रोकना भी होता है।

गावस्कर के मुताबिक, क्रुणाल खेल को समझने वाले खिलाड़ी हैं और मैदान पर हमेशा कोई न कोई योजना बनाकर उतरते हैं। उन्होंने बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण में भी क्रुणाल के योगदान की सराहना की। गावस्कर का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए टीम में उन खिलाड़ियों को शामिल करना जरूरी है, जो अपने प्रदर्शन से जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान ने साफ कहा कि टीम चुनते समय खिलाड़ियों की उम्र के बजाय उनके प्रदर्शन और फिटनेस को महत्व दिया जाना चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अच्छा खेल रहा है और शारीरिक रूप से फिट है, तो उसे भारतीय टीम में मौका देने पर विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए चयन का आधार खिलाड़ी की उपयोगिता होनी चाहिए, न कि उसकी उम्र।

गौरतलब है कि क्रुणाल पांड्या ने आखिरी बार 2021 में श्रीलंका दौरे पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद से वह राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं कर सके हैं। अब गावस्कर के समर्थन के बाद उनके दोबारा भारतीय टीम में चुने जाने की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उनकी वापसी को लेकर चयनकर्ताओं की ओर से कोई फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उनका प्रदर्शन आगे की राह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Sun, 18 Oct 2026 23:24:00 +0530

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