फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुंबई पहुंच गए हैं। एयरपोर्ट पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इमैनुएल मैक्रों का जोरदार स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रों आज द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेता नवाचार वर्ष 2026 का शुभारंभ करेंगे। पीएम मोदी के निमंत्रण पर मैक्रों की ये चौथी भारत यात्रा है। भारत और फ्रांस के संबंध और ज्यादा मजबूत होंगे। भारत और फ्रांस के बीच और भी कई साली डील्स होने की संभावना है। मैक्रों के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि उनकी इस भारत यात्रा का मकसद भारत के साथ सहयोग को और मजबूत करना तथा फ्रांस की आर्थिक और व्यापारिक साझेदारियों में विविधता लाना है।
17 फरवरी | मुंबई
15:15 बजे — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात
स्थान: लोक भवन
16:30 बजे — समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान और प्रेस विज्ञप्ति
स्थान: राज भवन, मुंबई
17:20 बजे — भारत-फ्रांस नवाचार मंच
स्थान: ताज महल पैलेस होटल
19:15 बजे — भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष और सांस्कृतिक स्मरणोत्सव
स्थान: गेटवे ऑफ इंडिया
आपसे मुलाकात मुंबई में होगी: मोदी
इमैनुएल मैक्रों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत आपकी यात्रा का स्वागत करता है और हमारे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ने को उत्सुक है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी बातचीत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगी और वैश्विक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगी। मेरे प्रिय मित्र, आप से मुंबई में मुलाकात होगी और उसके बाद दिल्ली में भी।
भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत करेंगे। मैक्रोन एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। बैठक में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों सहित प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। शाम को, दोनों नेता संयुक्त रूप से भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों के साथ बातचीत करेंगे, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के बढ़ते प्रौद्योगिकी-संचालित आयाम को उजागर किया जाएगा।
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भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। पूरी दुनिया यह सोचने पर मजबूर हो गई है कि आखिर मोदी सरकार अपनी वायु सेना को मजबूत करने के लिए क्या-क्या कदम उठा रही है और इसी बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील फाइनल हो चुकी है। लेकिन अब उससे भी बड़ी खबर सामने आ रही है और यह ऑफर चर्चा में है। जी हां, 114 राफेल लड़ाकू विमानों की फाइल आगे बढ़ने की खबरों के बीच रूस का ऑफर आ गया है भारत के सामने और रूस ने दे डाला है एसयू 57 का ऑफर फिर से और वो भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और विंगमैन स्टेल ड्रोन पैकेज के साथ। दरअसल भारत पहले ही 36 डिसॉल्ट राफेल शामिल कर चुका है। इसके अलावा अब 114 अतिरिक्त राफेल की प्रक्रिया तेज होने की खबर है।
अब राफेल की ताकत एडवांस एईएसए रडार स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर मैट्योर जैसी बीवीआर मिसाइल है जो इसे मल्टी रोल प्लेटफार्म के रूप में बेहद सक्षम बनाती है। अब 114 की संख्या इसलिए अहम है क्योंकि इससे कई नए स्क्वाडन बन सकते हैं और पुराने प्लेटफार्म की जगह ली जा सकती है। लेकिन अब रूस का पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट सुखोई एसयू57 भारत को पैकेज ऑफर के साथ प्रस्तावित बताया जा रहा है। इनमें प्रमुख बिंदु भी बताए जा रहे हैं। जैसे कि स्टील डिजाइन 100% टीओटी यानी कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का दावा है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस प्रोडक्शन की संभावना है। विंगमैन स्टील ड्रोन के साथ यह पैकेज ऑफर किया गया है। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे बड़े दावे आमतौर पर विस्तृत मूल्यांकन, लागत, समय सीमा और वास्तविक टेक्नोलॉजी शेयरिंग की शर्तों पर निर्भर करते हैं और अंतिम निर्णय इन सभी कारकों पर आधारित होते हैं। चलिए अब जानते हैं कि रूस ने जो ऑफर किया है उसका सबसे बड़ा यूएसपी यानी कि विंगमैन ड्रोन होता क्या है?
दरअसल रिपोर्ट में जिस स्ट्रेंथ विंगमैन की बात की गई है उसे रूस में Sukhoi S70 के नाम से जाना जाता है। यह लॉयड विंगमैन कॉन्सर्ट पर आधारित ड्रोन है जो फाइटर जेट के साथ उड़कर खतरनाक इलाकों में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉनिक वॉारफेयर लक्ष्य साधना हथियार डिलीवरी और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करना है। अब अगर यह पैकेज भारत को टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग विकल्पों के साथ मिल जाता है तो यह फोर्स मल्टीप्लायर साबित हो जाएगा। अब रूस की टीम ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित एचएल अब अगर 140 एसयू 57 का आर्डर होता है और 114 राफेल भी शामिल होते हैं तो कुल मिलाकर 250 प्लस नए जेट जुड़ सकते हैं। यानी कि हिंदुस्तान एयररोनॉटिक्स लिमिटेड सुविधा का आकलन किया। जहां Sukhoi एसयू 30 एमKI का निर्माण होता है। टारगेट था उद्देश्य था एसयू 57 के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव कितने लागत कितनी कितनी संख्या पर मेड इन इंडिया आर्थिक रूप से व्यवहारिक होगा। तो रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़ी संख्या जैसे कि 120 से 140 पर लोकल मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा व्यवहार मानी जाती है क्योंकि स्केल से लागत घटती है।
इंडियन एयरफोर्स की स्वीकृति स्क्वाड्रन शक्ति 42 के आसपास मानी जाती है। जबकि वास्तविक संख्या इससे कम है। ऐसे में बड़े ऑर्डर से स्क्वाडन गैप कम हो जाएगा। 4.5 और पांचवी पीढ़ी का संतुलन बनेगा। दीर्घकालीन आत्मनिर्भरता टीओटी के जरिए बल मिलेगा। लेकिन यह सब लागत, समय सीमा और वास्तविक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की गहराई पर निर्भर करेगा। अब सबसे बड़ी बात भारत का स्वदेशी पांचवी पीढ़ी का कार्यक्रम एचएल एमका है।
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