तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की खबर पर मुहर लगते ही काफी समीकरण बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। जहां बांग्लादेश और भारत के संबंध फिर से मजबूत होने के संकेत मिलने लगे हैं। तो वहीं अब बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर बहुत बड़ा सिग्नल मिला है। यह सिग्नल शेख हसीना की वतन वापसी और बीएनपी के साथ दोस्ती का है। पहला संकेत तो शेख हसीना के बेटे ने तभी दे दिया था जब बांग्लादेश के चुनाव नतीजों में तारिक रहमान की पार्टी बाजी मारती हुई दिखाई दी। इस दौरान शेख हसीना के बेटे सजीव वाजेद जॉय ने चौंकाने वाला दावा किया था। वाजेद ने दावा किया था कि उनकी पार्टी जल्द ही तारिक रहमान के साथ संपर्क साध सकती है। वाजेद का यह कदम जमात इस्लामी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की एक सोची समझी कोशिश मानी जा रही है।
वाजेद ने चेतावनी दी थी कि अगर जमात सत्ता में आती या संसद में प्रभाव बढ़ाती तो बांग्लादेश में आतंकवाद का दौर फिर से शुरू हो जाता। बीएनपी देश का बड़ा राजनीतिक दल है। हम जल्द ही उनसे संपर्क करेंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि आने वाले समय में आवामी लीग वापसी करेगी। शेख हसीना के बेटे का यह बयान आवामी लीग की उस पुरानी रणनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव है जो दशकों से बीएनपी को अपना सबसे कट्टर दुश्मन मानती रही है। लेकिन कहते हैं कि राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ कह नहीं सकते। राजनीति में विरोधी कब दोस्त बन जाए, कब दोस्त बागी हो जाए, किसी को कुछ नहीं पता है। ऐसा ही कुछ अब बांग्लादेश की राजनीति से संकेत मिल रहे हैं। वहीं चुनाव के तुरंत बाद बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग की गतिविधि शुरू हो गई है। खुलना में आवामी लीग के नेताओं ने नए सिरे से दफ्तर खोले हैं। दफ्तर में नेताओं का आनाजाना भी शुरू हो गया है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद बांग्लादेश में आवामी लीग की गतिविधियों पर बैन लगा दिया गया था।
पार्टी को आम चुनाव में भाग लेने की भी अनुमति नहीं दी गई थी। लेकिन अब खुलना में पार्टी दफ्तर को नए सिरे से जीवित किया गया है। इस दफ्तर को जुलाई विद्रोह के दौरान जला दिया गया था। खुलना को एक वक्त में आवामी लीग का गढ़ माना जाता था। तो वहीं हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें कहा गया था कि आवामी लीग के बड़े नेता देश लौटने की तैयारी में है। ये नेता मौके की तलाश में है। ये नेताओं की कोशिश फिर से जमीन पर आवामी लीग को मजबूत करना है। फिलहाल शेख हसीना भारत में है। हसीना की वापसी हो पाएगी या नहीं इसके बारे में पार्टी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। हसीना पर बांग्लादेश में 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। उन्हें फांसी की सजा भी सुनाई जा चुकी है।
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बांग्लादेश के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान आज दोपहर बाद देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। 13वें संसदीय चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद रहमान की ताजपोशी के लिए ढाका पूरी तरह तैयार है। आमतौर पर प्रधानमंत्री का शपथ ग्रहण राष्ट्रपति निवास में होता है, लेकिन इस बार इसे जनता के करीब लाने के उद्देश्य से जातीय संसद के साउथ प्लाजा में आयोजित किया जा रहा है।
बांग्लादेश में मंगलवार को एक बड़ा पॉलिटिकल पल देखने को मिलेगा, जब तारिक रहमान देश के नए प्राइम मिनिस्टर के तौर पर शपथ लेंगे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के 60 साल के चेयरमैन ने अपनी पार्टी को 13वें पार्लियामेंट्री इलेक्शन में बड़ी जीत दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह प्रेसिडेंशियल रेजिडेंस के बजाय जातीय संसद के साउथ प्लाजा में दोपहर 3:30 PM (लोकल टाइम के हिसाब से शाम 4 PM) होगा और प्रेसिडेंट मोहम्मद शहाबुद्दीन कैबिनेट के साथ प्राइम मिनिस्टर को शपथ दिलाएंगे।
दिन में पहले, सरकार के फॉर्मल फॉर्मेशन से पहले सभी नए चुने गए पार्लियामेंट मेंबर्स को शपथ दिलाई जाएगी।
पार्लियामेंट में BNP को साफ बहुमत
BNP को 297 में से 209 सीटें मिलीं, जिससे उसे सरकार बनाने का पक्का मैन्डेट मिला। जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें जीतीं, जबकि अवामी लीग ने इलेक्शन नहीं लड़ा। पॉलिटिकल जानकार इन नतीजों को महीनों की अनिश्चितता के बाद बांग्लादेश के पॉलिटिकल माहौल में एक बड़ा बदलाव बता रहे हैं।
माइनॉरिटीज़ के लिए एक बड़ा मैसेज
ऑफिस संभालने से पहले, रहमान ने अपनी सरकार की दिशा के बारे में एक पक्का मैसेज दिया। विरोधी पार्टियों के सपोर्टर्स से कैसे निपटेंगे, इस बारे में सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि “बदले की पॉलिटिक्स के लिए कोई जगह नहीं है।” उन्होंने साफ चेतावनी दी कि पॉलिटिकल जुड़ाव या अलग राय के आधार पर कोई भी हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कानून का राज उनके एडमिनिस्ट्रेशन को गाइड करेगा और गवर्नेंस में पर्सनल या पॉलिटिकल बदले की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारे रास्ते अलग हो सकते हैं, हमारी राय अलग हो सकती है, लेकिन देश के लिए हमें एकजुट रहना चाहिए,” और देश में एकता की अपील की।
यह चुनाव एक टेंशन भरे समय के बाद हुआ, जिसमें माइनॉरिटी कम्युनिटीज़ के खिलाफ हिंसा की घटनाएं शामिल थीं। इस बैकग्राउंड में, रहमान की एकता की अपील का खास मतलब है। माइनॉरिटी कम्युनिटीज़ के चार नेताओं ने BNP टिकट पर सीटें जीतीं, जिनमें दो हिंदू और दो बौद्ध शामिल हैं। उनकी जीत को नई पार्लियामेंट में रिप्रेजेंटेशन के एक अहम संकेत के तौर पर देखा गया है।
रहमान ने माना कि नई सरकार के सामने गंभीर चुनौतियाँ हैं। उन्होंने कमज़ोर अर्थव्यवस्था, कमज़ोर संस्थानों और कानून-व्यवस्था की चिंताओं को ज़रूरी मुद्दे बताया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन स्थिरता बहाल करने और अच्छा शासन पक्का करने पर ध्यान देगा। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया और दिवंगत राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान के बेटे रहमान पहली बार कोई सरकारी पद संभाल रहे हैं। वह कई साल विदेश में रहने के बाद हाल ही में बांग्लादेश लौटे हैं।
समारोह में इंटरनेशनल मौजूदगी
शपथ ग्रहण समारोह में देश और विदेश से करीब 1,200 मेहमानों के आने की उम्मीद है। शामिल होने वाले विदेशी मेहमानों में मोहम्मद मुइज़्ज़ू और पड़ोसी देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह बदलाव अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के बाद हुआ है, जिन्होंने पिछले साल राजनीतिक अशांति के बाद कार्यभार संभाला था।
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