Captain Smit Machchhar ने बताई आपबीती, Cockpit Door खोलकर ऐसे टाला बड़ा विमान हादसा
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में को-पायलट के जानलेवा हमले से बाल-बाल बचे भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने एक इंटरव्यू में उस खौफनाक घटना की पूरी कहानी बताई है। इस घटना ने दुनियाभर में लोगों को हैरान कर दिया था। 38 वर्षीय कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि कैसे एक सामान्य उड़ान अचानक उनकी जिंदगी बचाने की लड़ाई में बदल गई।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई थी। बोइंग 737 विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और उसमें 170 से अधिक लोग सवार थे।
कैप्टन स्मित मच्छार ने ‘स्काई न्यूज अरबिया’ को दिए इंटरव्यू में बताया कि उड़ान सामान्य रूप से चल रही थी। उड़ान भरने के करीब दो घंटे बाद ओमान के रहने वाले को-पायलट हमाम अल हमामी ने नमाज पढ़ने की इच्छा जताई। कैप्टन मच्छार ने सम्मान के तौर पर अपना ध्यान दूसरी तरफ कर लिया और अपनी सीट पर बैठकर कंप्यूटर पर लैंडिंग और ईंधन से जुड़ी जानकारी देखने लगे।
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पीछे से कुल्हाड़ी से किया हमला
इसी दौरान हमामी ने पीछे से आकर आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाली कुल्हाड़ी से कैप्टन मच्छार के सिर के पिछले हिस्से पर जोरदार वार किया। कैप्टन मच्छार ने घटना को याद करते हुए कहा, "मेरे सिर के पीछे बहुत जोर से वार हुआ। यह इतना तेज था कि पहले मुझे लगा कि विमान की छत से कोई भारी चीज टूटकर मेरे सिर पर गिर गई है। लेकिन कुछ ही सेकंड में मुझे समझ आ गया कि मुझ पर हमला किया जा रहा है।"
बार-बार बेहोश हो रहे थे कैप्टन मच्छार
हमले के बाद कैप्टन मच्छार की नजर धुंधली हो गई और उन्हें केवल कुछ इंच तक ही साफ दिखाई दे रहा था। लगातार हो रहे हमलों के कारण वह बार-बार बेहोश हो रहे थे। उन्होंने अपनी सीट बेल्ट खोली और खुद को बचाने की कोशिश की। मुश्किल हालात को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने खुद से कहा- स्मित, कुछ करो। तुम ऐसे नहीं मर सकते। मैं अपनी मौत स्वीकार नहीं कर सकता।"
ऐसे खोला कॉकपिट का दरवाजा
अपनी जान बचाने की कोशिश में कैप्टन मच्छार किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने वाले स्विच तक पहुंचे। हालांकि, वह बार-बार बेहोश हो रहे थे और उन्हें इसके बाद की पूरी घटना ठीक से याद नहीं है।
इसके बावजूद वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। दरवाजा खुलते ही यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को अंदर आने का मौका मिला। उन्होंने मिलकर हमलावर को-पायलट को पकड़ लिया।
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विमान को क्रैश करने की थी कथित योजना
संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक, को-पायलट की कथित योजना विमान पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करने और उसे तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल से टकराने की थी। इस हाईजैक की कोशिश और हमले के मामले की जांच की जा रही है। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।
इलाज के बाद सेहत में हुआ सुधार
हमले के बाद कैप्टन मच्छार को पहले ताबूक के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें अबू धाबी भेजा गया। भारतीय दूतावास ने अक्टूबर की शुरुआत में उनकी सेहत में सुधार की पुष्टि की थी।
कैप्टन स्मित मच्छार की सूझबूझ, बहादुरी और मुश्किल समय में संयम बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई वैश्विक नेताओं ने उनकी सराहना की है।
दिल्ली में बसेगा नया शहर! 12 लाख घर बनाने की तैयारी, नरेला-बवाना से द्वारका-नजफगढ़ तक होगा विकास
दिल्ली में किफायती दरों पर घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी योजना पर काम किया जा रहा है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) मास्टर प्लान 2047 के तहत लैंडपूलिंग नीति को आगे बढ़ाने की तैयारी में है. इसके जरिए राजधानी के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़े स्तर पर शहरी विकास की योजना बनाई जा रही है. प्रस्तावित योजना के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 12 लाख नए घर विकसित करने पर विचार किया जा रहा है. इसका उद्देश्य मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए आवास के विकल्प बढ़ाना और अनियोजित बस्तियों के विस्तार को रोकना है.
200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में होगा विकास
डीडीए की योजना के मुताबिक, दिल्ली के बाहरी इलाकों में जमीन को एक साथ लेकर सुनियोजित तरीके से आवासीय और अन्य शहरी सुविधाओं का विकास किया जाएगा. लैंडपूलिंग नीति के तहत किसानों और जमीन मालिकों को विकास प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया जाता है. इसके लिए संबंधित जमीन मालिकों के साथ बैठकें शुरू की गई हैं, जिनमें उन्हें नीति, विकास मॉडल और उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी जा रही है. इस योजना का प्रमुख उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि आवासीय क्षेत्रों के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करना भी है. इससे मध्यम आय वर्ग के लोगों को घर खरीदने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं. हालांकि, मकानों की वास्तविक कीमत और उपलब्धता संबंधित परियोजनाओं की शर्तों पर निर्भर करेगी.
600 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का नेटवर्क
नई आवासीय परियोजनाओं को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए सड़क नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है. योजना के तहत 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाना है. इसके अंतर्गत 600 किलोमीटर से ज्यादा अतिरिक्त सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना है. सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित होने से इन क्षेत्रों में आवागमन आसान बनाने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, नए आवासीय इलाकों को दिल्ली के दूसरे हिस्सों से जोड़ने और भविष्य की आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी अहम होगी.
दिल्ली के किन इलाकों में लागू है लैंडपूलिंग नीति?
लैंडपूलिंग नीति के तहत दिल्ली के कई प्लानिंग जोन में विकास की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इनमें द्वारका और वसंत कुंज से जुड़े K-1 जोन, द्वारका और नजफगढ़ का L जोन, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नरेला, बवाना और कंझावला क्षेत्र के N तथा P-2 जोन और दक्षिणी दिल्ली का घिटोरनी क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा, अकबरपुर माजरा, बुराड़ी, बापरोला, धूलसिरस, बवाना, इब्राहिमपुर, झड़ौदा माजरा, घेवरा, नजफगढ़ और नंगली पूना जैसे गांव भी इस व्यापक विकास योजना के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं. संबंधित क्षेत्रों में विकास की वास्तविक स्थिति और परियोजनाओं का दायरा आधिकारिक योजना तथा अधिसूचनाओं के अनुसार तय होगा.
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घरों के साथ कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं पर भी जोर
इस योजना में आवासीय विकास के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी संभावना है. इसके लिए डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना की गई है, जहां किफायती आवास के अलावा व्यावसायिक जमीन, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसी सुविधाओं को भी जगह मिल सकती है. इन सुविधाओं के विकसित होने से कारोबार को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, आवासीय क्षेत्रों के आसपास जरूरी आर्थिक गतिविधियां विकसित होने से लोगों को कामकाज के लिए दूर जाने की जरूरत भी कम हो सकती है.
लैंडपूलिंग नीति से क्या बदलेगा?
दिल्ली में तेजी से बढ़ती आबादी और आवास की मांग के बीच लैंडपूलिंग नीति को सुनियोजित शहरी विकास के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है. इसके जरिए जमीन, सड़क, आवास और व्यावसायिक सुविधाओं को एक व्यापक योजना के तहत विकसित करने का लक्ष्य है. हालांकि, 12 लाख घरों का आंकड़ा प्रस्तावित योजना से जुड़ा है. इसे तैयार मकानों या तत्काल बिक्री के लिए उपलब्ध फ्लैटों की संख्या नहीं समझना चाहिए. परियोजनाओं की प्रगति, जमीन मालिकों की भागीदारी, बुनियादी ढांचे और संबंधित मंजूरियों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि घरों का निर्माण कब और किस चरण में शुरू होगा.
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