मंगल के चांद से मिट्टी लाएगा जापानी यान, इतिहास का पहला राउंड-ट्रिप मिशन 20 अक्टूबर को होगा लॉन्च
टोक्यो, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। जापान मंगल के चांद फोबोस से सैंपल लाने के लिए ऐतिहासिक मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (एमएमएक्स) मिशन लॉन्च करने जा रहा है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) का एच3 रॉकेट 20 अक्टूबर को तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा। यह मानव इतिहास में मार्स सिस्टम का पहला राउंड-ट्रिप मिशन होगा।
प्रोब 1 साल बाद मंगल पर पहुंचकर 3 साल तक फोबोस की परिक्रमा करेगा और कम से कम 10 ग्राम मिट्टी लेकर 2031 में धरती पर लौटेगा। मिशन का मकसद सौरमंडल और जीवन की उत्पत्ति के रहस्य सुलझाना है।
एमएमएक्स नाम का यह मानवरहित मिशन, अमेरिका और यूरोप की अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ-साथ कई विश्वविद्यालयों और तकनीकी कंपनियों का एक संयुक्त प्रयास है। यह भविष्य में इंसानों द्वारा मंगल की खोज के लिए आधार तैयार करने में भी मदद कर सकता है।
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के अनुसार, एमएमएक्स को ले जाने वाला प्रमुख एच3 रॉकेट मंगलवार सुबह 4:41 बजे (भारत के समयानुसार तड़के 01:11) तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा।
आईडेफिक्स नाम का एक रोवर—जो कॉमिक हीरो एस्टेरिक्स के कुत्ते का फ्रांसीसी नाम है—सबसे पहले सतह का निरीक्षण करेगा ताकि सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की जा सके। फोबोस से नमूने लेना दुनिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है।
जेएएक्सए ने कहा कि यह मिशन फोबोस को एक प्राकृतिक अंतरिक्ष स्टेशन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं का भी पता लगाएगा। इसके लिए मंगल तक की राउंड-ट्रिप की जरूरतों को समझा जाएगा, जो इंसानों के साथ मंगल की खोज के लिए बहुत जरूरी है। पृथ्वी पर लौटने से पहले, यह यान मंगल के दूसरे चंद्रमा डीमोस का भी निरीक्षण करेगा, हालांकि यह उस पर उतरेगा नहीं।
जेएएक्सए को उम्मीद है कि इस मिशन से पता चलेगा कि मंगल और उसके दो चंद्रमा कैसे बने। यह जानकारी सौर मंडल की उत्पत्ति को समझने में एक अहम कड़ी साबित हो सकती है।
मंगल के चंद्रमाओं की उत्पत्ति के बारे में एक सिद्धांत जायंट इम्पैक्ट (विशाल टकराव) परिकल्पना है। इसके अनुसार, ये चंद्रमा तब बने जब कोई खगोलीय पिंड मंगल से टकराया था।
वहीं, दूसरी ओर कैप्चर परिकल्पना यह मानती है कि ये चंद्रमा असल में क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) थे, जिन्हें मंगल के गुरुत्वाकर्षण बल ने अपनी ओर खींच लिया था। जेएएक्सए ने सूर्य के सबसे करीब मौजूद चार चट्टानी ग्रहों बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें से कौन-सा सही है, यह जानने से यह समझने में मदद मिलेगी कि “स्थलीय ग्रहों पर जीवन के लिए रहने योग्य वातावरण कैसे बना होगा।”
एमएमएक्स मिशन, फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर स्पेस स्टडीज (सीएनईएस), जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (डीएलआर), नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और लगभग 20 विश्वविद्यालयों व तकनीकी कंपनियों का एक संयुक्त प्रयास है।
जेएएक्सए के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अंतरिक्ष यान के लैंडिंग लेग्स (उतरने वाले पैर) को विकसित करना विशेष रूप से कठिन था, क्योंकि फोबोस पर गुरुत्वाकर्षण बहुत ही कमजोर है।
जापान का मानवरहित स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टिगेटिंग मून (स्लिम) जिसे “मून स्नाइपर” भी कहा जाता है 2024 में पृथ्वी के चंद्रमा पर उतरने के बाद पलट गया था। इसके बावजूद, इसने डेटा भेजना जारी रखा और चंद्रमा की दो-सप्ताह लंबी कई रातों तक सुरक्षित बना रहा।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एआई से स्वास्थ्य सेवाएं होंगी अधिक सुलभ और प्रभावी, क्लिनिकल निर्णय लेने में भी मिलेगी मदद : एमईआईटीवाई सचिव
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव एस. कृष्णन ने रविवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि बीमारी की जांच, मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, रिमोट आईसीयू मॉनिटरिंग और एआई-सहायता प्राप्त सर्जिकल प्लानिंग जैसे क्षेत्रों में इसके उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, वहनीयता और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
यह बात उन्होंने वाराणसी में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) और आईआईटी-बीएचयू के सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एआई फॉर हेल्थ एंड असिस्टिव टेक्नोलॉजीज विषयक टेक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कही।
इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों और स्टार्टअप संस्थापकों ने भाग लिया तथा स्वास्थ्य सेवाओं, पहुंच और नागरिक कल्याण को आगे बढ़ाने में एआई की भूमिका पर चर्चा की।
अपने मुख्य संबोधन में कृष्णन ने विभिन्न विषयों में एआई शिक्षा को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान और अनुसंधान के बीच बढ़ते समन्वय का उपयोग व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने आईआईटी-बीएचयू, एसटीपीआई, उद्योग जगत और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत सहयोग की भी आवश्यकता बताई, ताकि बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य और सहायक प्रौद्योगिकी समाधान विकसित किए जा सकें।
इसके साथ ही उन्होंने कहा, एआई स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने, क्लिनिकल निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने और सेवा वितरण में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, विशेष रूप से उन समुदायों के लिए जहां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।
एमईआईटीवाई सचिव ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए इंडियाएआई मिशन और अन्य सरकारी पहलों के तहत उपलब्ध सहायता का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि एसटीपीआई स्टार्टअप्स को निवेशकों, वेंचर कैपिटल नेटवर्क और बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे एक मजबूत और टिकाऊ नवाचार इकोसिस्टम विकसित हो सकता है।
वहीं, कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारत का प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम उल्लेखनीय रूप से विकसित हुआ है और अब देश के पास आईटी सेवा क्षेत्र में मिली सफलता को स्वदेशी एआई नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से दोहराने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम युवा नवाचारकर्ताओं को रोजगार पाने वालों से रोजगार सृजित करने वालों में बदलने में सफल रहा है। उन्होंने ट्रांसलेशनल रिसर्च, बौद्धिक संपदा सृजन और बाजार तक पहुंच के महत्व पर भी जोर दिया।
कुमार ने एसटीपीआई के 27 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के नेटवर्क का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थापित तकनीकी केंद्रों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच और अधिक सहयोग जरूरी है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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