देवास की माता टेकरी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक शहर देवास में इन दिनों नवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। यहां स्थित माता टेकरी पर मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के दर्शन के लिए रोजाना दूर-दूर से हजारों लोग पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि पिछले सिर्फ 24 घंटे के अंदर ही चार लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में हाजिरी लगाकर आशीर्वाद लिया है, जिससे पूरे मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा हुआ है।
बसों की एंट्री बंद और जिगजैग बैरिकेडिंग से संभाली गई भीड़
दरअसल टेकरी के आसपास लगातार बढ़ती भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस प्रशासन ने शाम को ही कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए थे। शनिवार शाम करीब 6:30 बजे से ही शहर के अंदर भारी वाहनों और बसों की एंट्री पूरी तरह से बंद कर दी गई थी। इसके साथ ही रात ठीक 9 बजे से श्रद्धालुओं की लंबी कतारों को व्यवस्थित करने के लिए खास जिगजैग व्यवस्था शुरू की गई, ताकि लोग लाइन में ही आगे बढ़ें।
रात 11 बजे के बाद और बढ़ी भीड़
दरासल, जैसे-जैसे रात गहरी होती गई, माता टेकरी की तरफ आने वाले श्रद्धालुओं का रेला और भी ज्यादा बढ़ता चला गया। रात 11 बजे के बाद हालात यह हो गए कि शंख द्वार पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर लोगों को थोड़ी-थोड़ी देर रोककर आगे भेजा जाने लगा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि एक ही जगह पर बहुत ज्यादा भीड़ इकट्ठा न हो जाए और सीढ़ियों पर किसी भी तरह का दबाव या भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
एबी रोड पर लगा लंबा जाम
रातभर माता के जयकारों के साथ भक्तों का आना-जाना लगातार जारी रहा, जिसका असर मुख्य मार्गों पर भी साफ दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की बहुत ज्यादा आवाजाही होने की वजह से रात के वक्त एबी रोड पर भीषण जाम की स्थिति बन गई। इस ट्रैफिक जाम को तुरंत कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने सड़क के कई कट पॉइंट बंद कर दिए, ताकि गाड़ियां और पैदल चलने वाले लोग आपस में न उलझें।
रविवार सुबह भी जारी रहा भक्तों का आना
रविवार की सुबह होते ही माता टेकरी पर दर्शन के लिए पहुंचने वाले भक्तों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया और सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। खास बात यह रही कि ज्यादातर श्रद्धालु अपने परिवार के साथ इंदौर रूट से पैदल ही माता टेकरी तक पहुंचे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार मुस्तैद रहकर पूरी व्यवस्था पर नजर रख रहे हैं ताकि सभी लोग सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें।
महाष्टमी पर उज्जैन में होगी नगर पूजा, देवी और भैरव मंदिरों में चढ़ाई जाएगी मदिरा की धार
उज्जैन में नवरात्रि का रंग काफी खास होता है। यहां केवल घरों और पंडालों में माता की स्थापना कर उन्हें विराजित ही नहीं किया जाता बल्कि बहुत ही खास नगर पूजा भी की जाती है। लोग जहां अपने अपने घरों में और पंडाल में बैठाई गई माता की पूजा करते हैं। उस बीच उज्जैन के देवी और भैरव मंदिरों में नगर पूजा की जाती है।
हर साल महाष्टमी पर आयोजित होने वाली यह पूजा नगर की सुख समृद्धि के लिए की जाती है। इस दौरान मदिरा की धार से पूरे शहर में पूजा होती है। इसकी शुरुआत कलेक्टर द्वारा 24 खंबा मंदिर स्थित माता महामाया और महालाया को मदिरा की धार चढ़ाकर होती है। इस बार सोमवार को ये पूजा की जाएगी।
कैसे होती है नगर पूजा
उज्जैन में नगर पूजा की ये परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। ये पूजा नगर के राजा यानी जो कलेक्टर होता है के द्वारा की जाती है। दोनों माता को मदिरा की धार चढ़ाने के बाद शासकीय अधिकारी और कोटवारों का दल नगर के अलग-अलग स्थान पर विराजित 40 से ज्यादा देवी और भैरव मंदिरों में ये धार चढ़ाते हैं। गढ़कालिका के आगे हांडी फोड़ भैरव पर ये पूजा समाप्त होती है। 27 किलोमीटर लंबे पूजा मार्ग पर 25 लीटर से ज्यादा मदिरा का उपयोग होता है।
दो तरह की पूजा
इस नगर पूजा के दौरान तामसिक और सात्विक दोनों ही तरह की परंपराओं का ध्यान रखा जाता है। कुछ देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा अर्पित की जाती है। वहीं हनुमान मंदिर में नारियल, तेल सिंदूर और ध्वज अर्पित करने की परंपरा है। इस दौरान मंदिरों में भोग भी अर्पित किया जाता है। मान्यताओं के मुताबिक नगर में मौजूद अतृप्त आत्माओं को तृप्ति प्रदान करने के लिए ऐसा किया जाता है।
2100 साल से चल रही परंपरा
नगर पूजा की ये परंपरा लगभग 2100 साल पुरानी बताई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सम्राट विक्रमादित्य ने इसकी शुरुआत की थी। सिंधिया स्टेट के समय भी इसे निभाया गया और अब लगातार इसका निर्वहन किया जा रहा है। इस बार 19 अक्टूबर को यह पूजा की जाने वाली है।
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