साइबर लिटरेसी- अब ठगों के निशाने पर पेंशनर्स:ऐसे फंसाते हैं ठगी के जाल में, समझें पूरा खेल, घर के बड़े-बुजुर्गों को सावधान करें
इन दिनों एक नया फ्रॉड चल रहा है। इसमें साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर ‘पेंशन बेनिफिट कार्ड’ का फर्जी एड दिखाकर रिटायर्ड कर्मचारियों और पेंशनर्स को निशाना बना रहे हैं। वे दावा कर रहे हैं कि सभी पेंशनर्स के लिए यह कार्ड बनवाना जरूरी है। इसके साथ ही हेल्थ बेनिफिट, FD पर 9.2% ब्याज और अनलिमिटेड एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस जैसे फायदों का झांसा दे रहे हैं। हाल ही में गह मंत्रालय और ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (I4C) ने ऐसे फर्जी पोस्ट और विज्ञापनों से सावधान रहने की सलाह दी है। इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में ‘पेंशन बेनिफिट कार्ड’ के नाम पर होने वाले इस स्कैम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- पेंशन बेनिफिट कार्ड के नाम पर चल रहा फ्रॉड क्या है? जवाब- यह एक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग सोशल मीडिया पर ‘पेंशन बेनिफिट कार्ड’ का फर्जी पोस्ट या विज्ञापन दिखाते हैं। वे कार्ड के फायदों का झांसा देकर पेंशनर्स को फर्जी लिंक पर क्लिक करने, फॉर्म भरने या पर्सनल डिटेल्स शेयर करने को उकसाते हैं। ठग इसके जरिए फ्रॉड को अंजाम देते हैं। सवाल- ठग इस कार्ड से कौन-से फायदे देने का दावा कर रहे हैं? जवाब- ठग पेंशनर्स को फंसाने के लिए कार्ड के साथ कई अलग-अलग तरह के फायदे देने का दावा कर रहे हैं, जैसेकि- सवाल- ठग पेंशनर्स को ही क्यों निशाना बना रहे हैं? जवाब- इसके पीछे कई वजहें हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- ठगों को पेंशनर्स के बारे में कौन-सी जानकारी पहले से मिल सकती है? जवाब- ठग अलग-अलग सोर्सेस से पेंशनर्स की बेसिक जानकारी जुटाकर उसका इस्तेमाल फर्जी कॉल, मैसेज या लिंक भेजने के लिए करते हैं। ठगों के पास पेंशनर्स की ये जानकारी पहले से मौजूद हो सकती है- सवाल- स्कैमर्स पेंशनर्स को कैसे ठगते हैं? सिलसिलेवार ढंग से पूरा समझाएं? जवाब- साइबर ठग आमतौर पर पेंशनर्स को भरोसे में लेकर फ्रॉड को अंजाम देते हैं। स्कैम का पूरा खेल ग्राफिक से समझिए- सवाल- फोन या वॉट्सएप पर ऐसे कौन-से खतरे के संकेत हैं, जिनसे हर किसी को सावधान और जागरूक रहना चाहिए? जवाब- चाहे पेंशन फ्रॉड हो या और किसी भी तरह का साइबर फ्रॉड, ठगों के व्यवहार में एक चीज हमेशा कॉमन होगी। वे लालच देंगे, डर दिखाएंगे और दबाव डालेंगे। अगर आप इन संकेतों को समझते हैं और इनसे सावधान रहते हैं तो आप ठगों के जाल में नहीं फंसेंगे। खतरे के सभी संकेत नीचे ग्राफिक में देखिए- फोन या वॉट्सएप पर दबाव, डर या लालच वाले मैसेज/कॉल को खतरे का संकेत मानें। ऐसे सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- सरकारी योजना और उसके नाम पर चल रहे फर्जी ऑफर में अंतर कैसे पहचानें? जवाब- मुख्य बात ये है कि सरकारी योजना की जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर होगी। वहीं फर्जी ऑफर की जानकारी सोशल मीडिया, ई-मेल, फोन और वॉट्सएप, कहीं भी आ जाएगी। इसके अलावा कुछ और सॉलिड संकेत हैं, जिनसे साफ समझ में आता है कि ऑफर असली है या फर्जी। दोनों के बीच का अंतर नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- किसी भी सरकारी योजना की सही जानकारी कैसे हासिल करें? जवाब- इसके लिए सोशल मीडिया पोस्ट या फॉरवर्ड मैसेज पर भरोसा करने की बजाय इन तरीकों से पुष्टि करें- सवाल- सरकारी वेबसाइट की पहचान कैसे करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- अगर पेंशनर ने गलती से OTP बता दिया तो तुरंत क्या करें? जवाब- ऐसे में घबराएं नहीं। पैसे और डिटेल्स की सुरक्षा के लिए तुरंत ये कदम उठाएं- सवाल- अगर बैंक खाते से पैसा निकल गया है तो पहला कदम क्या होना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- अगर पैसा नहीं गया, लेकिन ठगी की कोशिश हुई तो क्या करें? जवाब- इसे नजरअंदाज न करें। संदिग्ध नंबर, मैसेज, लिंक या एप की डिटेल्स सुरक्षित रखें, उसे ब्लॉक करें। साथ ही नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। अगर बैंक या कार्ड की डिटेल्स शेयर किया है तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचना दें। सवाल- बच्चे अपने माता-पिता/बुजुर्गों को इस तरह के स्कैम से कैसे बचा सकते हैं? जवाब- अपने माता-पिता या बुजुर्गों को स्कैम के प्रति जागरूक करें। उन्हें समझाएं कि किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। इसके लिए उन्हें ये जरूरी बातें सिखाएं-समझाएं- सवाल- ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत कहां दर्ज करें? जवाब- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं। फाइनेंशियल फ्रॉड हुआ है तो तुरंत 1930 पर भी कॉल करें। सवाल- साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करते समय कौन-सी जानकारी तैयार रखनी चाहिए? जवाब- शिकायत दर्ज करने से पहले फ्रॉड से जुड़ी जरूरी जानकारी और सबूत अपने पास रखें, जैसेकि- ध्यान रखें: सबूतों को डिलीट न करें और ओरिजनल चैट/मैसेज सुरक्षित रखें। ******************* ग्राफिक्स- अजीत सिंह ………………… ये खबर भी पढ़ें साइबर लिटरेसी- ‘मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो स्कैम’ से सावधान: अश्लील फोटो वायरल की धमकी मिले तो क्या करें, फोटो कैसे हटवाएं? सोचिए, एक दिन आपके फोन पर आपकी ही अश्लील तस्वीर या वीडियो आ जाए, जिसे आपने कभी बनाया ही नहीं। AI के यूज से ऐसा संभव है। साइबर ठग लोगों की तस्वीरें उठाकर फर्जी अश्लील कंटेंट तैयार कर रहे हैं और फिर बदनामी का डर दिखाकर ब्लैकमेल कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए…
जरूरत की खबर- दिवाली पर घर पेंट कराते समय सावधान:लेड फ्री पेंट चुनें, जब तक पुताई चले, वहां से दूर रहें, 19 सावधानियां याद रखें
दिवाली का त्योहार नजदीक है। घरों में रंगाई-पुताई और पुराने फर्नीचर को नया लुक देने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस रंग से घर की खूबसूरती बढ़ती है, वही रंग सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है? दरअसल कुछ पेंट में लेड यानी सीसा होता है। साल 2019 की ‘टॉक्सिक लिंक’ की एक स्टडी के मुताबिक, भारतीय बाजार में बिक रहे 17 में से लगभग 13 पेंट में लेड की मात्रा 10,000 ppm (पार्ट्स पर मिलियन) से ज्यादा थी। जबकि भारत सरकार द्वारा पेंट में लेड की तय सीमा 90 ppm है। लेड एक ऐसा हानिकारक तत्व है, जिसका बच्चों के ब्रेन डेवलपमेंट पर बहुत खतरनाक असर पड़ता है। यूनिसेफ और ‘प्योर अर्थ’ की 2020 की रिपोर्ट ‘द टॉक्सिक ट्रुथ’ के अनुसार, दुनिया में करीब 80 करोड़ बच्चों (हर 3 में से 1) के ब्लड में लेड का लेवल 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे ज्यादा था। जबकि बच्चों में इसका कोई भी लेवल सुरक्षित नहीं माना जाता। वहीं ‘इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन’ (IHME) की ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) की स्टडी के मुताबिक, साल 2021 में दुनिया भर में लेड एक्सपोजर के कारण लगभग 15 लाख लोगों की मौत हुई थी। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर‘ में दिवाली पर घर की रंगाई-पुताई से जुड़ी सावधानियाें पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– डॉ. अली शेर, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- घर की रंगाई-पुताई के दौरान सेहत को क्या खतरे हो सकते हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पेंट में कौन-से खतरनाक केमिकल होते हैं और इसका सेहत पर क्या असर है? जवाब- पेंट में कई तरह के खतरनाक केमिकल्स यूज किए जाते हैं, जिनके एक्सपोजर से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- लेड यानी सीसा शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचाता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या पेंट में लेड की मौजूदगी का पता उसकी स्मेल या रंग से लगाया जा सकता है? जवाब- नहीं, सिर्फ स्मेल या रंग से पेंट में लेड होने का पता नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए ये तरीके अपनाएं- सवाल- VOC (वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स) क्या हैं और ये क्यों खतरनाक हैं? जवाब- ये ऐसे केमिकल हैं, जिनका यूज कुछ पेंट, वार्निश और थिनर में होता है। इसे पेंट को जल्दी सूखने, सतह पर आसानी से फैलने उसकी फिनिश बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। इनके एक्सपोजर से- सवाल- क्या वाटर-बेस्ड पेंट सॉल्वेंट बेस्ड-पेंट से ज्यादा सुरक्षित हैं? जवाब- आमतौर पर वाटर-बेस्ड पेंट में कई सॉल्वेंट-बेस्ड प्रोडक्ट्स की तुलना में VOC’s कम हो सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें- ऐसे में पेंट खरीदते समय इन बाताें का ध्यान रखें- सवाल- पुराने पेंट को खुरचने या घिसने में ज्यादा रिस्क क्यों है? जवाब- पुराने पेंट को खुरचने या घिसने से उसमें मौजूद लेड के बारीक कण धूल में मिल सकते हैं। इससे घर की हवा और सतहें दूषित हो सकती हैं। यह धूल बच्चों के खिलौनों, हाथों और खाने-पीने की चीजों तक पहुंचकर शरीर में लेड पहुंचने का खतरा बढ़ाती है। सवाल- घर की पुताई के दौरान बच्चों और गर्भवती महिलाओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पेंटिंग के दौरान घर में वेंटिलेशन कैसे बनाए रखें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- दिवाली पर घर की पुताई करवाते समय सबसे जरूरी सावधानियां क्या हैं? जवाब- इस दौरान ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें- सवाल- क्या पुताई के दौरान सिर्फ मास्क पहनना पर्याप्त है? जवाब- नहीं, सामान्य मास्क पेंट की रासायनिक गैसों और केमिकल्स के बारीक कणों से पूरी सुरक्षा नहीं देता। इसके लिए सही रेस्पिरेटर, अच्छा वेंटिलेशन और पेंट के संपर्क को कम करना भी जरूरी है। सवाल- वुडन फर्नीचर, खिड़की और दरवाजों की पॉलिश से क्या रिस्क हो सकता है? जवाब- इसमें VOCs और दूसरे केमिकल हो सकते हैं। इनके संपर्क में आने से हेल्थ प्रॉब्लम्स होती हैं, जैसेकि– लंबे समय में कुछ केमिकल्स लिवर, किडनी और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सवाल- पेंटिंग के कितनी देर बाद घर में लौटना सुरक्षित है? जवाब- इसका कोई एक निश्चित समय नहीं है। यह पेंट की किस्म, इस्तेमाल की मात्रा, वेंटिलेशन, तापमान और नमी पर निर्भर करता है। आमतौर पर 5-7 दिन बाद जोखिम काफी कम हो जाता है। सवाल- क्या पेंट की धूल और बचे हुए केमिकल की सफाई के लिए खास सावधानी जरूरी है? जवाब- हां, इस दौरान इन बातों का ध्यान रखें- सवाल- पुताई के दौरान किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? जवाब- केमिकल वेपर्स या धूल के संपर्क में आने पर ये लक्षण दिख सकते हैं- ऐसे में तुरंत उस जगह से बाहर निकलें और ताजी हवा में जाएं। सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल मेडिकल हेल्प लें। *********************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- एनर्जी ड्रिंक यानी बीमारियों को दावत: शुगर से फैटी लिवर, किडनी डैमेज का रिस्क, पिएं ये 10 होममेड हेल्दी ड्रिंक्स साल 2019 में ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ’ में पब्लिश एक सिस्टमैटिक रिव्यू के मुताबिक, एनर्जी ड्रिंक में मौजूद हाई शुगर से फैटी लिवर का रिस्क बढ़ता है। पूरी खबर पढ़िए…
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