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Health Tips: रोजाना कम सोने से बढ़ता है Sleep Debt और कमजोर होता है Immune System

अक्सर हम सभी भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच में खुद का ध्यान रखना भूल जाते हैं। अक्सर हम यही सोचते हैं कि छुट्टी वाले दिन या वीकेंड पर नींद पूरी पूरी होने पर थकान दूर हो जाएगी। लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है। जब लंबे समय तक आपके शरीर को रोजाना उतनी नींद नहीं मिल पाती है, जितना कि शरीर को जरूरत होती है। तो इसका असर साफ तौर पर हमारे शरीर और मन पर नजर आने लगता है। नींद की कमी के पीछे कई वजह हो सकती हैं। 

वहीं कई बार तनाव की वजह से तो कई बार बिजी शेड्यूल की वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है। ऐसे में Sleep Debt बढ़ता जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि Sleep Debt क्या होता है और नींद पूरी न होने के क्या लक्षण हैं और कैसे आपका मन और शरीर इससे प्रभावित होता है।

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क्या है Sleep Debt

Sleep Debt तब होता है, जब आपकी नींद की जरूरत और असल में मिलने वाली नींद की मात्रा में अंतर होता है। ऐसा तब होता है, जब आपकी नींद पूरी नहीं होती है और आप देर तक काम किया करते हैं, तनाव के कारण सो नहीं पाते हैं या फिर आपके सोने का समय तय नहीं होता है। रोजाना एक या दो घंटे कम सोने से भी Sleep Debt हो सकता है और इसका आपकी हेल्थ पर बुरा असर हो सकता है।

नींद की कमी पर लक्षण

दिन में बहुत ज्यादा नींद आना
ध्यान और फोकस में कमी
सुबह उठने में मुश्किल
भूलने की आदत
चिड़चिड़ापन
सिरदर्द
थकान

शरीर पर पड़ता है बुरा असर

नींद की कमी होने पर फिजिकल और मेंटल हेल्थ खराब होने लगती है। नींद न आने के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, वेट पर असर प़ड़ता है, मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और बार-बार बीमार होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं पर्याप्त नींद न लेने से सीखने की क्षमता, याददाश्त और ध्यान लगाने की शक्ति पर असर पड़ता है। इसके साथ ही व्यक्ति तनाव और बेचैनी महसूस करने लगता है। नींद की भारी कमी के कारण व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

रोजाना कितनी नींद लेना है जरूरी

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो रोजाना कम से कम 8 से 9 घंटे की नींद लेना चाहिए। वहीं आपका स्लीप साइकिल भी तय होना चाहिए। अगर किसी कारण से आप पूरी नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो इस पर ध्यान देना चाहिए। वहीं अगर नींद आने में मुश्किल होती है या लाख कोशिश के बाद भी नींद नहीं आती है, तो आपको डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

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Gen Z युवा तनाव छिपाने के लिए ले रहे AI Chatbots का सहारा, Health Experts ने दी चेतावनी

वैश्विक स्तर मेंटल हेल्थ की समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के हिसाब से दुनियाभर में करीब हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से परेशान हैं। जिनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले सबसे आम हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि यह समस्याएं सिर्फ वयस्कों और कामकाजी वर्ग के लोगों तक सीमित नहीं है, लेकिन यहां कम उम्र वाले छात्रों में भी यह समस्या बढ़ती जा रही है।

वहीं भारतीय लोगों के लिए भी मानसिक विकार चिंता का कारण बने हैं। डब्ल्यूएचओ और राष्ट्रीय सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 15 करोड़ लोगों को एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्या से निदान की जरूरत है। करीब 10.6% वयस्क किसी न किसी ऐसी मेंटल हेल्थ की समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में मेंटल हेल्थ संबंधी समस्याओं में इलाफा अधिक है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो मेंटल हेल्थ की बढ़ती समस्या चिंता का विषय है, लेकिन ज्यादा चिंता की बात यह है कि लोगों को समय पर इसके बारे में पता न चल पाना या फिर इलाज न मिल पाना।

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युवा पीढ़ी में मेंटल हेल्थ का खतरा

हाल ही में एक सर्वे में बड़ा खुलासा हुआ है कि मेंटल हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरुकता के बाद बड़ी संख्या में देश के जेन-जी अब भी भावनात्मक चुनौतियों से परेशान हैं।

सर्वे के मुताबिक 13 से 29 साल की उम्र वाले देश के करीब 50% युवा अपनी मुश्किल भावनाओं को खुद संभालने का प्रयास करते हैं। सिर्फ 9-10% युवा ही मदद के लिए जाते हैं।

वहीं करीब 40.9% युवाओं ने इस बात को माना कि अंदर से परेशान होने की बजाय वह ऐसा दिखाने पर मजबूर हैं कि सब ठीक है। भावनाओं पर बात करने की जगह युवा खुद को बिजी रखते हैं। जिससे कि परेशान करने वाले ख्यालों के बारे में सोचने का समय न मिले।

सिर्फ 13.6% युवाओं ने बताया कि किसी ने बिना जज किए उनकी बातों को सुना और उनका साथ दिया।

सर्वे में क्या निकला

मेंटल हेल्थ को सिर्फ डिप्रेशन या एंग्जायटी जैसी बीमारियों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति अपने रिश्तों, विचारों और मुश्किल भावनाओं को कैसे संभालता है।

जब युवाओं को बार-बार काम पर ध्यान दो, मजबूत बनो जैसी बातें सुनने को मिलती हैं। तो उनके भावनात्मक दर्द और वास्तविक परेशानी को समझने की जगह पर उसको दबा दिया जाता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक बाहर से सब ठीक दिखने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह व्यक्ति अंदर से भी ठीक हो। मेंटल हेल्थ जैसी समस्याओं के निदान के दौरान कई बार देखने को मिलता है कि मरीज काम कर रहा है, पढ़ाई कर रहा, दोस्तों से बात हो रही लेकिन इसके बाद भी उनके दिल और दिमाग में किसी चीज की उथल-पुथल चल रही है, जो किसी से कहने का मन नहीं करता है।

युवाओं में मानसिक परेशानी और भावनात्मक तनाव को लेकर चुप्पी गंभीर चिंता का विषय है। आमतौर पर इसके लिए सामाजिक कलंक के भाव को सबसे बड़ी वजह के तौर पर देखा जाता है। मरीजों को डर रहता है कि अगर वह मदद लेने के लिए डॉक्टर के पास गए, तो लोग क्या सोचेंगे कि क्या ये पागल हो गया है।

जबकि असलियत यह है कि बीमारी को छिपाना समस्या को हर दिन के साथ ज्यादा बढ़ाता जाता है। जिसको स्ट्रेस-एंग्जायटी को समय रहते ध्यान देकर सही किया जा सकता है। लेकिन इसको लंबे समय तक छिपाए रखना, कई बार डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्या के रूप में सामने आता है।

युवा AI से लेते हैं मदद

एक रिपोर्ट के मुताबिक मेंटल हेल्थ की समस्या होने पर युवा चोरी-छिपे एआई का सहारा लेते हैं। एआई चैटबॉट मानसिक तनाव, भावनात्मक परेशानियों और अकेलेपन में लोगों को फौरन बातचीत का ऑप्शन दे रहे हैं। क्योंकि एआई परेशान लोगों की बात सुनता है, जवाब देता है तो युवा थोड़ा अच्छा महसूस करते हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक किसी भी सेहत संबंधी समस्या के निदान के लिए मरीज ही लाइफस्टाइल, हिस्ट्री और खानपान की आदत जैसी चीजों को समझना जरूरी है। जोकि एआई चैटबॉट नहीं करते हैं। वहीं एआई की सहायता लेना डिप्रेशन जैसे गंभीर मामलों में आत्महत्या के विचारों को बढ़ाने वाला हो सकता है।

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  Sports

उम्र नहीं फिटनेस और फॉर्म देखें, Sunil Gavaskar ने Team India के लिए की Krunal Pandya की वकालत

भारतीय क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी को लेकर चर्चा तेज है। तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने लंबे इंतजार के बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी की है, जिसके बाद अब दूसरे सीनियर खिलाड़ियों को भी दोबारा मौका मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसी बीच भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और पूरी तरह फिट है, तो उसकी उम्र को टीम में चयन के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए।

भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर करीब 1,425 दिन बाद भारतीय टीम में वापसी की है। उनके चयन से यह संकेत मिला है कि चयनकर्ता अनुभवी खिलाड़ियों को फिर से मौका देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की संभावित वापसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सुनील गावस्कर ने इस चर्चा के बीच क्रुणाल पांड्या का नाम आगे रखा है, जो पिछले कुछ समय से अपने खेल से प्रभावित कर रहे हैं।

क्रुणाल ने 2026 के आईपीएल सत्र में गेंद और बल्ले दोनों से अहम योगदान दिया। उन्होंने 16 मैचों में 14 विकेट हासिल किए। इस दौरान उनकी गेंदबाजी औसत 30.35 और रन देने की दर 8.45 रही। बल्लेबाजी में भी उन्होंने 226 रन बनाए। इसमें मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेली गई मैच जिताने वाली अर्धशतकीय पारी भी शामिल है। बता दें कि क्रुणाल अपनी टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पिछली 2 खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

जियोस्टार से बातचीत के दौरान सुनील गावस्कर ने क्रुणाल की गेंदबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि क्रुणाल गेंद को बहुत ज्यादा घुमाने वाले गेंदबाज नहीं हैं, लेकिन वह अपनी लाइन और लेंथ में लगातार बदलाव करते हैं। वह बल्लेबाज के इरादे को समझकर गेंदबाजी करते हैं और कभी पैड की तरफ गेंद डालते हैं, तो कभी बाउंसर का इस्तेमाल करते हैं। उनका मकसद केवल विकेट लेना ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने से रोकना भी होता है।

गावस्कर के मुताबिक, क्रुणाल खेल को समझने वाले खिलाड़ी हैं और मैदान पर हमेशा कोई न कोई योजना बनाकर उतरते हैं। उन्होंने बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण में भी क्रुणाल के योगदान की सराहना की। गावस्कर का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए टीम में उन खिलाड़ियों को शामिल करना जरूरी है, जो अपने प्रदर्शन से जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान ने साफ कहा कि टीम चुनते समय खिलाड़ियों की उम्र के बजाय उनके प्रदर्शन और फिटनेस को महत्व दिया जाना चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अच्छा खेल रहा है और शारीरिक रूप से फिट है, तो उसे भारतीय टीम में मौका देने पर विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए चयन का आधार खिलाड़ी की उपयोगिता होनी चाहिए, न कि उसकी उम्र।

गौरतलब है कि क्रुणाल पांड्या ने आखिरी बार 2021 में श्रीलंका दौरे पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद से वह राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं कर सके हैं। अब गावस्कर के समर्थन के बाद उनके दोबारा भारतीय टीम में चुने जाने की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उनकी वापसी को लेकर चयनकर्ताओं की ओर से कोई फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उनका प्रदर्शन आगे की राह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Sun, 18 Oct 2026 23:24:00 +0530

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