Indigo के 20 साल पूरे होने पर Rahul Bhatia का बड़ा बयान, नए CEO संभालेंगे कमान
नयी दिल्ली, चार अगस्त देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) राहुल भाटिया ने कंपनी के 20 साल पूरे होने पर मंगलवार को कहा कि एयरलाइन का सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है और अब इसकी कमान नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विली वॉल्श संभालेंगे। भाटिया ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में कहा कि भारतीय विमानन क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में है और इसके प्रमुख विमानन केंद्र बनने की तरफ अग्रसर होने में इंडिगो की अहम भूमिका रही है। एयरलाइन का परिचालन चार अगस्त, 2006 को शुरू हुआ था।
फिलहाल यह 430 से अधिक विमानों के बेड़े के साथ रोजाना करीब 2,200 उड़ानों का संचालन करती है। भाटिया ने कहा कि एक महत्वाकांक्षी सोच से शुरू हुई यह यात्रा आज वैश्विक स्तर पर सराही जाने वाली सफलता की कहानी बन चुकी है और आगे का चरण अधिक वृद्धि, नवाचार और वैश्विक विस्तार का संकेत देता है। उन्होंने वॉल्श को इंडिगो की कमान सौंपते हुए कहा कि वह कंपनी को वृद्धि के अगले चरण में ले जाएंगे।
एयरलाइन ने वर्ष 2030 तक प्रतिदिन लगभग 3,000 उड़ानें संचालित करने, सालाना 20 करोड़ यात्रियों को सेवा देने और 550 से अधिक विमानों का बेड़ा तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इस साल मार्च में तत्कालीन सीईओ पीटर एल्बर्स के अचानक इस्तीफे के बाद भाटिया अंतरिम सीईओ के रूप में कार्य देख रहे थे।
NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन में पुलिस ने नियमावली की अनदेखी की: Kanhaiya Kumar
पटना, चार अगस्त कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि बिहार पुलिस ने हाल में नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से निपटने के दौरान ‘‘कानूनी प्रक्रियाओं और नियमावली’’ का उल्लंघन किया। कुमार ने यहां प्रेसवार्ता में शनिवार और रविवार को बिहार के छह जिलों में कांग्रेस द्वारा कराई गई तथ्यान्वेषी (फैक्ट फाइंडिंग) जांच के निष्कर्षों की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक प्रदर्शनों से निपटने के पुलिस के तौर-तरीकों में ‘‘खतरनाक बदलाव’’ आया है और अब लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के अंधाधुंध इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ‘लोकतंत्र’ को ‘लाठीतंत्र’ और ‘गोलीतंत्र’ में बदलने की कोशिश कर रही है। राज्य में असहमति के प्रति असहिष्णुता का माहौल बन गया है।’’ उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की तथ्यान्वेषी दलों ने पाया कि प्रदर्शनों से निपटने के दौरान पुलिस नियमावली की खुलेआम अनदेखी की गई। कुमार ने कहा, ‘‘हमने अपनी जांच के दौरान वीडियो, तस्वीरें, पीड़ितों की गवाही और पुलिसकर्मियों के बयान जुटाए।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया असंगत और बर्बरतापूर्ण थी।’’ उन्होंने जांच के निष्कर्षों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को ‘‘मारने की नीयत’’ से कमर के ऊपर गोली मारी गई, सिवान में एके-47 का इस्तेमाल किया गया, नाबालिगों और ऐसे विद्यार्थियों को हिरासत में लिया गया जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था तथा महिलाओं को कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन कर सूर्यास्त के बाद भी थानों में रखा गया। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे एक युवक के पैर में गोली लगी, जबकि अरवल के एक अन्य युवक के गर्दन के पास गोली लगी। नाबालिगों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया, गिरफ्तारी मेमो ठीक से तैयार नहीं किए गए और कई मामलों में परिजनों को हिरासत में लिए गए लोगों की जानकारी तक नहीं दी गई।’’ उन्होंने दावा किया कि विद्यार्थियों को अलग-अलग थानों में ले जाया गया, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों ने उन्हें ‘आतंकवादी’ तक कहा।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने अपने ‘‘राजनीतिक आकाओं’’ को खुश करने के लिए कानून को ताक पर रखकर विद्यार्थियों के खिलाफ ‘‘बर्बरता’’ की।
उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस ले लिए गए हैं। उनका आरोप था कि पटना में कुछ मामलों को वापस लेने की बात कही जा रही है, लेकिन भागलपुर जैसे जिलों में विद्यार्थियों के खिलाफ अब भी आपराधिक मामले दर्ज हैं और कई विद्यार्थी अब तक घर नहीं लौट पाए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस को स्पष्ट करना चाहिए कि कितने लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया, किन धाराओं में कार्रवाई हुई और उनमें से कितनों को रिहा किया गया।
यह भी बताया जाए कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया। बिहार लोकतंत्र की जननी है और हम इसे पुलिस राज्य नहीं बनने देंगे।
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