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Arundhati Roy ने जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर PM Modi की छवि पर दिया बयान

नयी दिल्ली, चार अगस्त मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय ने कहा है कि शिक्षा क्षेत्र में अनियमितताओं को लेकर दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दो दशक से ज्यादा समय में बनी सार्वजनिक छवि को महज दो हफ्ते में “ध्वस्त” कर दिया और उन्हें ऐसा राजनीतिक झटका दिया, जो “किसी भी चुनावी जीत से कहीं बड़ा” है। अरुंधति ने सोमवार को अपनी किताब ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ के हिंदी अनुवाद संस्करण ‘मेरी मां, मेरी गैंगस्टर’ के विमोचन के मौके पर कहा कि चुनावी हार-जीत सिर्फ राजनीति का एक पहलू है और हाल में हुए जन-आंदोलनों ने दिखा दिया है कि दशकों में गढ़े गए विमर्श की चूलों को भी कुछ ही हफ्तों में हिलाया जा सकता है। उन्होंने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में खचाखच भरे सभागार में कहा, “मुझे सबसे अच्छी बात यह लगती है कि किसी को नहीं पता कि हमारा, देश का क्या होगा।

पटकथा अभी लिखी जा रही है और हर किसी की अपनी भूमिका है। लोगों को अक्सर लगता था कि उन्हें हजारों साल तक इन्हीं हालात में जीना होगा, लेकिन दो हफ्ते में ही सब कुछ थोड़ा हिल गया, वो भी जड़ से।” अरुंधति ने कहा, “24 साल में करोड़ों रुपये खर्च करके बनाई गई (प्रधानमंत्री मोदी की) छवि, जिसमें उन्होंने एक भी संवाददाता सम्मेलन को संबोधित नहीं किया और जिस दौरान कुछ लोगों ने उन्हें विष्णु का अवतार बताया... दो हफ्ते में कॉकरोचों ने उन 24 वर्षों (में बनाई गई छवि) को ध्वस्त कर दिया।” उन्होंने कहा, “एक तरह से यह चुनावों से भी बड़ी जीत है।” हालांकि, बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ की लेखिका ने आगाह किया कि अगर सरकार संस्थानों और सत्ता के प्रमुख साधनों पर अपना नियंत्रण बनाए रखती है, तो चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। अरुंधति ने कहा, “अगर यह सरकार... संस्थानों या सत्ता के प्रमुख साधनों पर नियंत्रण बनाए रखती है, तो हमारे लिए बहुत मुश्किल होगी।” उन्होंने विपक्षी दलों और नागरिक समाज के सदस्यों से लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

अरुंधति ने विपक्षी दलों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले लोगों से सीख लेने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद युवा प्रतिभागियों ने “समझदारी” का परिचय दिया, भले ही वे शायद हर मुद्दे पर एक-दूसरे से सहमत न हों। अरुंधति ने कहा, “प्रदर्शनकारियों ने अपनी भूमिका बहुत जिम्मेदारी से निभाई।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच तालमेल की तुलना संगीत बैंड के सदस्यों से की और कहा कि हर व्यक्ति की भूमिका अलग-अलग थी, लेकिन सभी एक ही मकसद के लिए योगदान दे रहे थे।

अरुंधति ने कहा, “गिटार वादक गायक नहीं हो सकता, गायक ड्रम वादक नहीं हो सकता, ड्रम वादक गिटार वादक नहीं हो सकता... उन सभी ने अपनी भूमिकाएं अलग-अलग तरह से निभाई हैं। अब बड़ों को भी समझदारी दिखानी होगी।” अरुंधति ने पिछले दो दशक में ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ समेत कई गैर-गल्प किताबें और विभिन्न विषयों पर ढेर सारे निबंध भी लिखे हैं। इन विषयों में कश्मीर, बड़े बांध, वैश्वीकरण, दलित नेता डॉ. बीआर आंबेडकर, माओवादी विद्रोहियों से मुलाकात और व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन तथा हॉलीवुड अभिनेता जॉन क्यूसैक के साथ उनकी बातचीत शामिल हैं।

पेन पिंटर पुरस्कार विजेता लेखिका के काम को उनके प्रशंसक बहुत सम्मान देते हैं, जबकि आलोचक लगभग हमेशा ही उनकी कड़ी आलोचना करते रहे हैं। अरुंधति के लेखन पर कई बार तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं और इनके कारण उन्हें कानूनी मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा है। प्रभात सिंह द्वारा अनूदित और राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘मेरी मां, मेरी गैंगस्टर’ अरुंधति और उनकी मां मैरी रॉय के बीच के मुश्किल रिश्तों पर आधारित है।

मैरी रॉय एक जानी-मानी शिक्षिका और महिला अधिकार कार्यकर्ता थीं, जिन्होंने केरल की सीरियाई ईसाई महिलाओं को उनके पिता की संपत्ति में बराबरी का अधिकार दिलाने वाला ऐतिहासिक मुकदमा लड़ा था। अरुंधति ने दावा किया कि यह किताब “न तो उनकी आत्मकथा है और न ही उनकी मां की जीवनी”, बल्कि यह दो महिलाओं के “रिश्ते की कहानी” है, जो संयोग से मां और बेटी थीं। उन्होंने किताब में अपनी मां का जिक्र ‘गैंगस्टर’ के रूप में किए जाने की वजह भी बताई।

अरुंधति ने कहा, “कुछ लोग, संभवत: हिंदी भाषी क्षेत्र के लोग, इस बात से नाराज हो जाते हैं कि मैंने अपनी मां को ‘गैंगस्टर’ कहा। लेकिन आलोचना करने वाले और मेरा बचाव करने वाले, दोनों ही असल बात को नहीं समझ पा रहे हैं। आलोचक कहते हैं, ‘आप अपनी मां को गैंगस्टर कैसे कह सकती हैं?’ दूसरी तरफ, मेरा बचाव करने वाले कहते हैं, ‘वह बहुत ज्यादा रक्षात्मक थीं।’ दोनों ही गलत हैं।

वह एक गैंगस्टर ही थीं।” उन्होंने कहा, “और सच कहूं तो, जब भी मुझ पर हमला होता है---जैसा कि आजकल हर किसी के साथ होता है---तो मैं खुद से कहती हूं, ‘क्या तुम्हें पता है, मेरी मां कौन हैं? क्या तुम्हें पता है, मैं किसकी बेटी हूं? तुम मेरा क्या बिगाड़ लोगे?” अरुंधति ने ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ के ‘कोलैटरल’ अध्याय का जिक्र करते हुए अपने बचपन की एक घटना साझा की, जब उनकी मां ने आधी रात को उनके भाई को नींद से जगाकर स्केल से पीटा, क्योंकि वह एक ऐसा रिपोर्ट कार्ड घर लाया था, जिसमें उसे ‘औसत छात्र’ बताया गया था।

उन्होंने बताया कि अगली सुबह अच्छे अंक लाने के लिए उन्हें गर्मजोशी से गले लगाकर शाबाशी दी गई। अरुंधति के मुताबिक, इस घटना ने सफलता और विशेषाधिकार के बारे में उनकी समझ पर गहरा असर डाला। उन्होंने किताब में लिखा, “तब से मेरे लिए हर निजी कामयाबी के साथ एक तरह की आशंका भी जुड़ी होती है।

जब भी मेरी तारीफ होती है या तालियां बजती हैं, तो मुझे हमेशा ऐसा लगता है कि किसी और को-किसी शांत व्यक्ति को-दूसरे कमरे में पीटा जा रहा है।” अरुंधति ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि तब से “दूसरा कमरा” उनके लेखन का मुख्य हिस्सा बन गया। उन्होंने कहा, “लोग सोचते हैं कि मैं एक सफल लेखिका हूं, पर मैं ऐसी नहीं हूं। वे मेरा सम्मान करते हैं, मुझे पुरस्कार देते हैं, मुझे बुकर पुरस्कार देते हैं... लेकिन ‘दूसरे कमरे’ में किसी को पीटा जा रहा होता है।

मेरा सारा लेखन इसी बारे में है।” अरुंधति ने कहा कि हर जगह “किसी न किसी को पीटा जा रहा है”---“गाजा में, बस स्टैंड पर, किसी गांव में, जंतर-मंतर पर”--- और उनके काम ने हमेशा उन लोगों की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है, जो व्यक्तिगत सफलता के सार्वजनिक जश्न के बावजूद अनदेखे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे अन्याय को सामान्य माने जाने का विरोध करें। अरुंधति ने कहा, “अब हमें दिखाना होगा कि हम और मार नहीं खाएंगे।” उनकी इस बात पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

‘मेरी मां, मेरी गैंगस्टर’ की कीमत 577 रुपये है और यह ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों उपलब्ध है। किताब के अंग्रेजी संस्करण का अनुवाद पहले ही 40 से ज्यादा भाषाओं में किया जा चुका है, जिनमें सभी यूरोपीय भाषाएं, जापानी, चीनी और मंगोलियाई शामिल हैं।

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Delhi Police विशेष प्रकोष्ठ ने अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़

नयी दिल्ली, चार अगस्त दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने एक अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए आठ कथित तस्करों को गिरफ्तार किया है और उनके पास 18 पिस्तौलें और कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यहां बताया कि आरोपी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से अर्धस्वचालित पिस्तौल और देसी तमंचे खरीदकर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों के अपराधियों को बेचने वाले गिरोह से जुड़े हैं। विशेष प्रकोष्ठ में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) एन. चैतन्य ने बताया कि आरोपियों की पहचान हरीश चंद्र (24), प्रीतपाल सिंह (24), शीशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी (26), कुलदीप सागर (20), अगेश कुमार (25), नूर मोहम्मद उर्फ तसलीम (36), मोहम्मद शान (19) और विक्रम सिंह (36) के रूप में हुई है।

उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्य तस्करों और खरीदारों के साथ समन्वय करने के लिए सोशल मीडिया ऐप, ‘वर्चुअल नंबर’ और ऑनलाइन फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते थे। डीसीपी ने एक बयान में बताया कि दिल्ली-एनसीआर में अवैध हथियारों की तस्करी की गुप्त सूचना पर कई हफ्तों तक काम किया गया जिसके बाद आरोपियों को पकड़ कर उनके पास से पिस्तौलें बरामद की गईं। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान पुलिस ने 12 अर्धस्वचालित पिस्तौल, पांच देसी तमंचे, एक रिवॉल्वर, 10 अतिरिक्त मैगज़ीन, पांच नौ एमएम के प्रतिबंधित कारतूस, एक अन्य कैलिबर का कारतूस और एक दरांती बरामद की।

डीसीपी ने कहा कि जांच पांच जुलाई को शुरू हुई जब हरीश चंद्र को मध्य प्रदेश से तस्करी कर लाई गई आठ अर्ध स्वचालित पिस्तौल और आठ मैगजीन के साथ पकड़ा गया। पुलिस ने कहा कि पूछताछ के दौरान, उसने खुलासा किया कि वह और उसका भाई गिरोह के कथित सरगना शीशपाल सिंह के निर्देश पर अवैध हथियारों को ले जा रहे थे। उसके खुलासे के आधार पर, पुलिस ने प्रीतपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया और बाद में हरियाणा के बल्लभगढ़ से शीशपाल को भी पकड़ लिया गया और उसके किराए के आवास से एक और अवैध पिस्तौल बरामद की।

पुलिस के अनुसार, शीशपाल लगभग तीन वर्षों से अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल था और उसने कई राज्यों में अपना एक नेटवर्क बनाया था जिसमें हथियारों की आपूर्ति करने वाले, तस्कर व उन्हें ले जाने वाले लोग शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि 15 जुलाई को विक्रम सिंह को गिरफ्तार किया गया और उसके घर से नौ एमएम के पांच कारतूस बरामद हुए। इसी तरह अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया और उनके पास भी हथियार बरामद हुए।

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  Sports

PAK vs WI टेस्ट में बड़ा हादसा, बाबर आजम को आउट करने वाला खिलाड़ी स्ट्रैचर पर गया बाहर, लगी गंभीर चोट

Brandon King: वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बीच दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन एक बड़ी घटना घटी. बाबर आजम को रन आउट करने की कोशिश में विंडीज के ओपनर ब्रैंडन किंग गंभीर रूप से चोटिल हो गए. Tue, 04 Aug 2026 23:57:16 +0530

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