Delhi Police विशेष प्रकोष्ठ ने अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़
नयी दिल्ली, चार अगस्त दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने एक अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए आठ कथित तस्करों को गिरफ्तार किया है और उनके पास 18 पिस्तौलें और कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यहां बताया कि आरोपी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से अर्धस्वचालित पिस्तौल और देसी तमंचे खरीदकर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों के अपराधियों को बेचने वाले गिरोह से जुड़े हैं। विशेष प्रकोष्ठ में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) एन. चैतन्य ने बताया कि आरोपियों की पहचान हरीश चंद्र (24), प्रीतपाल सिंह (24), शीशपाल सिंह उर्फ यश चौधरी (26), कुलदीप सागर (20), अगेश कुमार (25), नूर मोहम्मद उर्फ तसलीम (36), मोहम्मद शान (19) और विक्रम सिंह (36) के रूप में हुई है।
उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्य तस्करों और खरीदारों के साथ समन्वय करने के लिए सोशल मीडिया ऐप, ‘वर्चुअल नंबर’ और ऑनलाइन फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते थे। डीसीपी ने एक बयान में बताया कि दिल्ली-एनसीआर में अवैध हथियारों की तस्करी की गुप्त सूचना पर कई हफ्तों तक काम किया गया जिसके बाद आरोपियों को पकड़ कर उनके पास से पिस्तौलें बरामद की गईं। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान पुलिस ने 12 अर्धस्वचालित पिस्तौल, पांच देसी तमंचे, एक रिवॉल्वर, 10 अतिरिक्त मैगज़ीन, पांच नौ एमएम के प्रतिबंधित कारतूस, एक अन्य कैलिबर का कारतूस और एक दरांती बरामद की।
डीसीपी ने कहा कि जांच पांच जुलाई को शुरू हुई जब हरीश चंद्र को मध्य प्रदेश से तस्करी कर लाई गई आठ अर्ध स्वचालित पिस्तौल और आठ मैगजीन के साथ पकड़ा गया। पुलिस ने कहा कि पूछताछ के दौरान, उसने खुलासा किया कि वह और उसका भाई गिरोह के कथित सरगना शीशपाल सिंह के निर्देश पर अवैध हथियारों को ले जा रहे थे। उसके खुलासे के आधार पर, पुलिस ने प्रीतपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया और बाद में हरियाणा के बल्लभगढ़ से शीशपाल को भी पकड़ लिया गया और उसके किराए के आवास से एक और अवैध पिस्तौल बरामद की।
पुलिस के अनुसार, शीशपाल लगभग तीन वर्षों से अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल था और उसने कई राज्यों में अपना एक नेटवर्क बनाया था जिसमें हथियारों की आपूर्ति करने वाले, तस्कर व उन्हें ले जाने वाले लोग शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि 15 जुलाई को विक्रम सिंह को गिरफ्तार किया गया और उसके घर से नौ एमएम के पांच कारतूस बरामद हुए। इसी तरह अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया और उनके पास भी हथियार बरामद हुए।
Supreme Court ने Uttarakhand Bar Council याचिका पर केंद्र और BCI से मांगा जवाब
नयी दिल्ली, चार अगस्त उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड विधिज्ञ परिषद के 10 निर्वाचित सदस्यों की उस याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) से मंगलवार को जवाब मांगा, जिसमें जुलाई के एक प्रस्ताव और परिपत्र को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि बीसीआई ने चुनाव संपन्न होने के बाद निर्वाचित राज्य विधिज्ञ परिषदों की संरचना में बदलाव कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तराखंड राज्य विधिज्ञ परिषद के निर्वाचित सदस्यों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी की दलीलों पर संज्ञान लिया और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय तथा बीसीआई को नोटिस जारी किए। कुलदीप कुमार और नौ अन्य निर्वाचित सदस्यों द्वारा वकील ध्रुव जोशी के माध्यम से दायर इस याचिका में बीसीआई के 19 जुलाई के प्रस्ताव और उसके परिणामस्वरूप 21 जुलाई को जारी सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि ये उपाय अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 3(2)(बी) के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करते हैं। याचिका के अनुसार, उत्तराखंड राज्य विधिज्ञ परिषद के चुनाव शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत गठित एक उच्चाधिकार-प्राप्त चुनाव समिति की देखरेख में आयोजित किए गए थे। इसमें कहा गया कि चुनाव परिणाम 28 फरवरी को घोषित किए गए थे और 13 मार्च को आधिकारिक तौर पर उत्तराखंड राजपत्र में अधिसूचित किए गए थे, जिससे निर्वाचित सदस्यों को पद संभालने का वैधानिक अधिकार मिल गया।
इसमें कहा गया है कि अधिवक्ता अधिनियम की धारा 3(2)(बी) किसी राज्य विधिज्ञ परिषद के लिए अधिकतम 25 निर्वाचित सदस्यों का प्रावधान करती है, जहां मतदाता वकीलों की संख्या 10,000 से अधिक हो। याचिका में कहा गया है कि बीसीआई का बाद का प्रस्ताव, जो महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुविधाजनक बनाने के लिए ऐसे राज्यों में अधिकतम 32 सदस्यों के गठन का प्रावधान करता है, संसद द्वारा बिना किसी संशोधन या शीर्ष अदालत की विशिष्ट अनुमति के प्रभावी रूप से वैधानिक संरचना (संरचनात्मक संख्या) को बढ़ाता है। इसमें कहा गया कि पहले से ही राजपत्र में प्रकाशित चुनाव परिणामों को संशोधित करके पुन: प्रकाशित करने का निर्देश देने वाला बीसीआई का परिपत्र, संपन्न हो चुकी चुनावी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के समान है।
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