इजराइली पीएम नेत्यनाहू का बड़ा ऐलान, अगले हफ्ते इजराइल दौरे पर रहेंगे पीएम मोदी
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यनाहू ने भारत और इजराइल के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की खुलकर सराहना की है. उनका यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित इजराइल यात्रा से ठीक पहले आया है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है.
नेतन्याहू ने कॉन्फ्रेंस ऑफ प्रेसिडेंट ऑफ मेजर अमेरिका जेविश ऑर्गेनाइजेशन में अपने संबोधन के दौरान भारत के साथ साझेदारी को “शानदार गठबंधन” बताया. उन्होंने उत्साह के साथ कहा कि आने वाले दिनों में नरेंद्र मोदी इजराइल पहुंचने वाले हैं और यह यात्रा दोनों देशों के सहयोग को नई दिशा देगी.
रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
भारत और इजराइल के रिश्ते बीते एक दशक में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं. खासकर 2017 में प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक इजराइल यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों ने रणनीतिक रूप लिया. वह दौरा पहली बार था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजराइल की यात्रा की थी, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में निर्णायक मोड़ माना गया.
अब मोदी के तीसरे कार्यकाल में प्रस्तावित यह यात्रा कई अहम समझौतों और चर्चाओं का मंच बन सकती है. रक्षा, तकनीक, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर जोर रहेगा.
रक्षा क्षेत्र में गहरी होती साझेदारी
भारत इजराइल के प्रमुख रक्षा साझेदारों में से एक बन चुका है. भारतीय सशस्त्र बलों ने इजराइल से अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां खरीदी हैं, जिनमें स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल जैसे सिस्टम शामिल हैं. इसके अलावा ड्रोन तकनीक, निगरानी उपकरण और सीमा सुरक्षा से जुड़े सहयोग में भी तेजी आई है.
रक्षा उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझा परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देती हैं.
कृषि से स्टार्टअप तक सहयोग
रक्षा के अलावा कृषि और जल प्रबंधन में इजराइल की उन्नत तकनीक का भारत में व्यापक उपयोग हो रहा है। ड्रिप इरिगेशन और जल संरक्षण के मॉडल कई भारतीय राज्यों में अपनाए जा चुके हैं. साथ ही, स्टार्टअप इकोसिस्टम और हाई-टेक इनोवेशन में भी साझेदारी मजबूत हुई है. साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल समाधान जैसे क्षेत्रों में दोनों देश साझा परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं.
नई दिशा की ओर कदम
नेतन्याहू का बयान इस बात का संकेत है कि भारत-इजराइल संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यापक रणनीतिक सहयोग का आधार बन चुके हैं.
मोदी की संभावित यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, तकनीकी नवाचार और सुरक्षा सहयोग के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को वैश्विक एआई मानचित्र पर स्थापित किया: राघव चड्ढा
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को कहा कि एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और प्रौद्योगिकी शासन से संबंधित चर्चाओं को आकार देने में भारत को वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है।
यहां शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में चड्ढा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के शासन, विकास और जनहित में इसके उपयोग को लेकर वैश्विक बहसों में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
उन्होंने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि एक रणनीतिक मुद्दा है।
उन्होंने कहा कि मजबूत कंप्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचे वाले देश आने वाले वर्षों में विश्व पर हावी होने की संभावना रखते हैं।
चड्ढा ने कहा कि प्रसंस्करण क्षमता और डिजिटल बुनियादी ढांचा यह तय करेगा कि एआई युग में कौन से देश नेतृत्व करेंगे।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तीन वैश्विक एकाधिकारों की ओर भी इशारा किया।
चड्ढा ने कहा कि एआई डिजाइन पर नियंत्रण कुछ ही कंपनियों के हाथों में है, उत्पादन सीमित क्षेत्रों में केंद्रित है, और अमेरिका जैसी नीतियों के कारण निर्यात प्रतिबंधित है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत अभी तक इन तीनों स्तंभों पर नियंत्रण नहीं कर पाया है, लेकिन मानव संसाधन के मामले में देश की एक बड़ी ताकत है।
भारत की प्रतिभाओं की प्रचुरता पर जोर देते हुए, चड्ढा ने कहा कि विश्व एआई पेशेवरों और कुशल मानव संसाधन के लिए भारत की ओर तेजी से देख रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करनी होगी, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लानी होगी और मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा।
ऐतिहासिक तुलना करते हुए चड्ढा ने कहा कि जिस प्रकार 20वीं शताब्दी में तेल, गैस और इस्पात ने वैश्विक शक्ति को परिभाषित किया, उसी प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर निर्माण 21वीं शताब्दी में भू-राजनीतिक प्रभाव को आकार देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि इस नई वैश्विक व्यवस्था में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए भारत को निर्णायक कदम उठाने होंगे।
--आईएएनएस
एमएस/
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