सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को 5 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया
दिल्ली में जंतर-मंतर मामले में CJP के सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को 5 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल भेज दिया गया है। तीनों को एक दिन पहले जंतर-मंतर में घुसने के मामले में कस्टडी में लिया गया था। रात करीब 3 बजे उनकी गिरफ्तारी दर्ज की गई और आज सुबह पुलिस स्टेशन में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने इससे पहले सोशल मीडिया पर तीनों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। उनके मुताबिक सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया गया। तीनों पर बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं।
रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि तीनों को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रात करीब 3 बजे उन्हें एक प्राइवेट वैन से पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन लाया गया था। इसके बाद सुबह मजिस्ट्रेट के सामने पेशी हुई, जहां से तीनों को 5 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया।
तीन दिन पहले ही 50 हजार रूपये के बॉन्ड पर हुए थे रिहा
सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। उनके साथ CJP के अभिजीत दिपके भी पकड़े गए थे। 11 अक्टूबर को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीनों को एक साल तक शांति व्यवस्था बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इसके लिए ₹50 हजार का बॉन्ड भरवाया गया था। लेकिन 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका फिर जंतर-मंतर पहुंचे। पुलिस ने बिना अनुमति प्रवेश करने और सरकारी काम में बाधा डालने के साथ बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है। इस बार उनके साथ अजिंक्य शिंदे को भी हिरासत में लिया गया।
थोक महंगाई 5 महीने में सबसे ज्यादा:खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; फुटकर महंगाई में भी तेजी
थोक महंगाई सितंबर में बढ़कर 11.39% पहुंच गई है। सरकार ने आज, 14 अक्टूबर को ये आंकड़े जारी किए। यह पांच महीने में सबसे ज्यादा है। अगस्त में यह 9.92% थी। थोक महंगाई बढ़ने की वजह खाने-पीने की चीजें, फ्यूल, पावर और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का महंगा होना है। सितंबर में रिटेल महंगाई भी बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई है। अगस्त में यह 4.82% थी। थोक महंगाई दर 11.39% होने का मतलब यह है कि जो सामान पिछले साल इस समय थोक बाजार में ₹100 का मिल रहा था, वह आज लगभग ₹111.39 का है। ये आंकड़े नए बेस ईयर के मुताबिक हैं। सरकार ने 15 जून 2026 को WPI का नया बेस ईयर 2022-23 लागू किया था। इसने पुरानी 2011-12 की सीरीज की जगह ली है। थोक महंगाई दर से जुड़ी 6 बड़ी बातें… बेस ईयर और सबसे बड़ी बढ़त का मतलब 1. बेस ईयर क्या होता है? जब भी सरकार महंगाई नापती है, तो वह किसी एक पुराने साल को ‘पैमाना’ मान लेती है, ताकि उससे तुलना करके पता चल सके कि आज चीजें कितनी महंगी हुई हैं। सरकार ने 2022-23 को नया पैमाना यानी बेस ईयर बनाया है। इसका मतलब है कि आज के सामानों की कीमतों की तुलना 2022-23 के दामों से की जा रही है। 2. पांचवीं सबसे बड़ी बढ़त का क्या मतलब है? जब से सरकार ने 2022-23 का यह नया पैमाना लागू किया है, तब से लेकर सितंबर 2026 तक महंगाई दर में यह पहला मौका है, जब थोक कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं। आसान शब्दों में कहें तो, नए नियमों और नए पैमाने के तहत देश में यह अब तक की पांचवीं सबसे ज्यादा महंगाई दर्ज की गई है। थोक महंगाई का आम आदमी पर असर थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) को कंट्रोल कर सकती है, जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। रिटेल महंगाई 5.54% पर पहुंची सितंबर में रिटेल महंगाई बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई है। अगस्त में यह 4.82% थी। आलू, प्याज, टमाटर जैसी सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़े हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से कच्चा तेल भी महंगा हुआ है। इन कारणों से महंगाई लगातार 11वें महीने बढ़ी है। दो तरह की होती है महंगाई भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News








