Benefits Of Jalkumbhi: तालाब की घास नहीं, सेहत का खजाना है जलकुंभी- थायराइड, बीपी और अस्थमा में भी फायदेमंद!
Benefits Of Jalkumbhi: तालाबों में उगने वाली जलकुंभी को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. हाई बीपी, थायराइड, अस्थमा, खांसी-जुकाम और पेट के कीड़ों जैसी समस्याओं में इसके पत्तों का उबालकर या काढ़े के रूप में सेवन लाभकारी बताया जाता है. एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और पोषक तत्वों से भरपूर जलकुंभी इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती है.
संजीवनी से कम नहीं है यह 'जादुई काढ़ा'! टाइफाइड, शुगर और लिवर की बीमारियों को जड़ से मिटाएगी यह बूटी
आयुर्वेद में जड़ी-बूटी का सदियों से बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है. आज के दौर में जहां लोग तुरंत राहत के लिए अंग्रेजी दवाओं की ओर भागते हैं, वहीं आयुर्वेद में एक ऐसी औषधि है जिसे संजीवनी का छोटा भाई कहा जाए तो गलत नहीं होगा. बलिया की अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना उपाध्याय के अनुसार, चिरायता (Chirata) एक ऐसा जादुई पौधा है जो टाइफाइड जैसे जिद्दी बुखार से लेकर शुगर और लिवर की गंभीर समस्याओं तक में तुरंत आराम पहुंचाता है. खून साफ करने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में इसका कोई मुकाबला नहीं है. आइए जानते हैं चिरायता का काढ़ा कैसे शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है और इसका सेवन कैसे करना चाहिए.
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