किम-जोंग की बहन या बेटी देश की अगली तानाशाह कौन:एक्सपर्ट बोले- भाई जितनी ही खूंखार; राष्ट्रपति को छोड़ सबको फांसी दे सकती हैं
उत्तर कोरिया में तानाशाह किम जोंग की बाद अगला तानाशाह बनने के लेकर उनकी बहन और बेटी में संघर्ष छिड़ सकता है। यह दावा दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। दरअसल किम जोंग पिछले कुछ समय से लगातार अपनी 13 साल की बेटी 'किम जू ऐ' के साथ सर्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि वो किम जू-ऐ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर सकते हैं। इसे लेकर दक्षिण कोरिया के पूर्व राजदूत राह जोंग-यिल ने कहा कि किम जू-ए के लिए रास्ता बिल्कुल आसान नहीं होगा। उनकी सबसे बड़ी चुनौती किम जोंग-उन की छोटी बहन ‘किम यो-जुंग’ होंगी, जो अपने भाई जितनी ही खूंखार मानी जाती हैं। 38 साल की किम यो-जुंग को उत्तर कोरिया में दूसरी सबसे ताकतवर शख्स हैं। पार्टी से लेकर सेना तक उनकी मजबूत पकड़ है। यहां तक कहा जाता है कि वे राष्ट्रपति को छोड़कर पार्टी की 250 सदस्यीय केंद्रीय समिति के किसी भी नेता को मौत की सजा दे सकती हैं। एक्सपर्ट्स बोले- सत्ता पाने से पीछे नहीं हटेंगी किम यो-जुंग राह जोंग-यिल का कहना है कि अगर किम यो-जुंग को लगा कि उनके पास शीर्ष नेता बनने का मौका है, तो वे बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगी। यानी सत्ता संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अन्य एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि अगर अचानक किम जोंग-उन को कुछ हो जाता है या वे शासन करने की हालत में नहीं रहते, तो किम यो-जुंग तुरंत सत्ता संभालने की कोशिश कर सकती हैं। किम यो-जुंग को बचपन में ‘स्वीट प्रिंसेस यो-जोंग’ कहा जाता था। 2014 से वह प्रोपेगेंडा एंड एगिटेशन डिपार्टमेंट (PAD) की हेड हैं। इस विभाग का काम उत्तर कोरिया में सरकारी विचारधारा को फैलाना है। जापानी शेफ केंजी फुजिमोटो, जिन्होंने 13 साल तक किम जोंग-इल के लिए काम किया, उनके मुताबिक वे बचपन से ही मजबूत इरादों वाली थीं। उन्हें ‘प्रिंसेस’ कहकर बुलाया जाता था और भोजन के समय वह पिता (किम जोंग-इल) के बगल में बैठती थीं। किम यो-जुंग को सत्ता के लिए तैयार किया गया था किम जोंग उन के पिता किम जोंग-इल ने अपने बच्चों को जिनेवा, बर्न और मॉस्को में पढ़ने भेजा था। 2004 में मां को योंग-हुई की मौत के बाद भी किम यो-जुंग को सत्ता के लिए तैयार किया जाता रहा। 2009 में वह अपने भाइयों के साथ वोनसान एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में पिता के साथ दिखीं। 2012 में उन्हें पहली बार सार्वजनिक रूप से सफेद घोड़े पर अपनी बुआ किम क्यॉन्ग-हुई के साथ देखा गया। 2019 में वह अपने भाई के साथ माउंट पैकतु पर घुड़सवारी करती नजर आईं। उन्हें संगठन और मार्गदर्शन विभाग में भी प्रभावशाली भूमिका मिली, जहां से सेना और पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों पर निगरानी रखी जाती है। 2021 में उन्हें स्टेट अफेयर्स कमीशन में शामिल किया गया। जनवरी 2023 में वह रूस-यूक्रेन युद्ध पर उत्तर कोरिया की मुख्य प्रवक्ता बनीं। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि यूक्रेन को दिए जाने वाले टैंक ‘जला दिए जाएंगे’ और रूस के साथ खड़े रहने की बात कही। भाई किम जोंग की सीक्रेट डायरी कहा जाता है एक्सपर्ट्स का मानना है कि देश और विदेश में किम की सार्वजनिक छवि बनाने के पीछे उनकी बहन किम यो जोंग का बड़ा हाथ है। उन्हें किम जोंग उन की ‘सीक्रेट डायरी’ भी कहा जाता है। माना जाता है कि वह अपने भाई को कई अहम मुद्दों पर सलाह देती हैं और उनके कई कामों में उनकी भागीदारी भी रहती है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ किम जोंग उन की 2018 न्यूक्लियर समिट के पीछे भी उनका ही दिमाग बताया जाता है। इसके अलावा, 2018 में प्योंगचांग में हुए शीतकालीन ओलंपिक में किम जोंग की मौजूदगी के पीछे भी वही थीं। किम को उन पर बहुत भरोसा है। किम की बेटी सत्ता संभालने के लिए अभी छोटी हैं दूसरी तरफ, किम जोंग-उन की बेटी किम जू-ए की उम्र अभी लगभग 13 साल है। वह किम जोंग-उन और उनकी पत्नी री सोल-जू की इकलौती बेटी हैं, जिन्हें सार्वजनिक तौर पर लोगों के सामने लाया गया है। पिछले कुछ सालों में वह अपने पिता के साथ मिसाइल परीक्षण, सेना की परेड और बड़े सरकारी कार्यक्रमों में नजर आई हैं। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी का मानना है कि यह सब उनकी तैयारी का हिस्सा हो सकता है। यानी उन्हें धीरे-धीरे आगे की जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां तक कहा गया है कि उन्होंने कुछ बड़े फैसलों पर अपनी राय भी दी है, जो उत्तर कोरिया जैसे बंद देश में बहुत अलग बात मानी जाती है। हालांकि, कई जानकारों का कहना है कि वह अभी बहुत छोटी हैं। वॉशिंगटन के एक थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अचानक सत्ता खाली होती है तो ज्यादा अनुभव वाले नेता, जैसे किम यो-जुंग, आगे आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में देश के अंदर हलचल और अस्थिरता भी बढ़ सकती है। नॉर्थ कोरिया में सत्ता के लिए पहले भी खून खराबा हुआ उत्तर कोरिया में सत्ता परिवर्तन पहले भी शांत नहीं रहा। जब 2011 में किम जोंग-उन ने अपने पिता किम जोंग इल के बाद गद्दी संभाली थी, तो उन्होंने अपने चाचा जांग सोंग-थाएक को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार करवाया और बाद में गोली मारने का आदेश दिया था। 2017 में उनके सौतेले भाई किम जोंग-नाम की मलेशिया के कुआलालंपुर एयरपोर्ट पर VX नर्व एजेंट से हत्या कर दी गई थी। माना जाता है कि वे भी कुर्सी के संभावित दावेदार थे। किम जोंग-उन की उम्र अभी 42 साल है, लेकिन उनकी सेहत को लेकर सवाल उठते रहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे ज्यादा शराब और सिगरेट लेते हैं, उन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। 2024 में उनका वजन करीब 140 किलो बताया गया था। हालांकि कहा जाता है कि उन्होंने कुछ वजन घटाया है, फिर भी दिल की बीमारी का खतरा बना हुआ है। उनके पिता किम जोंग-इल की भी तबीयत खराब रहती थी और 70 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई थी। नॉर्थ कोरिया कोरोना के बाद दुनिया से और कट गया कोविड-19 के बाद उत्तर कोरिया और भी ज्यादा दुनिया से कट गया है। सीमाएं लगभग बंद हैं और ज्यादातर विदेशी दूतावास जा चुके हैं। ऐसे में अंदर की सटीक जानकारी मिलना और मुश्किल हो गया है। अब सबकी नजर उस बड़े राजनीतिक सम्मेलन पर है, जो पांच साल में एक बार होता है। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी देखेगी कि क्या किम जू-ए वहां शामिल होती हैं, उन्हें किस तरह पेश किया जाता है और क्या कोई आधिकारिक पद दिया जाता है। इससे भविष्य के संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि अगर आज अचानक सत्ता खाली होती है तो सबसे तैयार चेहरा किम यो-जुंग ही मानी जाती हैं। लेकिन अगर किम जोंग-उन लंबी राजनीतिक तैयारी करते हैं, तो उनकी बेटी किम जू-ए भी भविष्य में देश की पहली महिला सर्वोच्च नेता बन सकती हैं। ------------ यह खबर भी पढ़ें… दावा-किम जोंग ने 13 साल की बेटी को उत्तराधिकारी चुना:बीजिंग दौरे पर पिता के साथ दिखी थीं; पब्लिक प्रोग्राम्स में भी नजर आ रहीं उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अपनी 13 साल की बेटी किम जू ऐ को अपना उत्तराधिकारी चुन लिया है। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने गुरुवार को सांसदों को दी गई जानकारी में यह दावा किया। पढ़ें पूरी खबर…
बांग्लादेश में हिंदू नेता को मंत्री बना सकते हैं रहमान:30 साल पहले भी मिनिस्टर रहे थे गोयेश्वर, बांग्लादेश में 2 हिन्दुओं ने जीता चुनाव
चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) नई सरकार बनाने की तैयारी में है। सरकार ने निर्वाचित सांसदों की आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी कर दी है। पार्टी से 2 हिंदू सांसद भी चुने गए हैं। इनमें से ढाका-3 सीट से जीत दर्ज करने वाले गोयेश्वर चंद्र रॉय को नई कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। रॉय BNP के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वह खालिदा जिया की BNP सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) राज्य मंत्री थे। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, तारीक रहमान प्रधानमंत्री पद समेत रक्षा मंत्रालय और दूसरे पांच मंत्रालय अपने पास रख सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 148 के मुताबिक, आधिकारिक नतीजे आने के तीन दिन के भीतर निर्वाचित प्रतिनिधियों को शपथ लेनी होती है। 13वें संसदीय चुनाव के निर्वाचित सदस्य मंगलवार को शपथ लेंगे, जबकि कैबिनेट भी उसी दिन बाद में शपथ लेगी। यह जानकारी चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने शनिवार को प्रेस ब्रीफिंग में दी। जिया परिवार के करीबी माने जाते हैं गोयेश्वर चंद्र रॉय गोयेश्वर चंद्र रॉय बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं। उनका जन्म 1 नवंबर 1951 को ढाका जिले के केरानीगंज में एक बंगाली हिंदू परिवार में हुआ था। वे 1978 से ही BNP से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में पार्टी की स्थायी समिति के सदस्य हैं, जो BNP का सर्वोच्च नीति-निर्माण निकाय है। 1990 के दशक में खालिदा जिया की सरकार में उन्होंने राज्य मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां वे पर्यावरण, वन, मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालयों के प्रभार में रहे। हाल ही में 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में उन्होंने ढाका-3 निर्वाचन क्षेत्र से BNP के टिकट पर भारी बहुमत से जीत हासिल की, जहां उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार मोहम्मद शाहिनुर इस्लाम को लगभग 17,000 वोटों से हराया। वे खुद को धरती का बेटा बताते हैं और जोर देते हैं कि बांग्लादेश में हिंदू या अन्य अल्पसंख्यक अलग नहीं हैं, बल्कि सभी नागरिक समान अधिकारों वाले हैं। जिया परिवार से उनके गहरे संबंध हैं और नई सरकार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की संभावना है। बांग्लादेश में 4 अल्पसंख्यक सांसद चुने गए, इनमें 2 हिंदू बांग्लादेश के आम चुनाव में 4 अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार सांसद चुने गए हैं। इनमें दो हिंदू, जबकि दो अन्य बौद्ध समुदाय से हैं। हिंदू नेता में गोयेश्वर चंद्र रॉय और उनके समधी निताई रॉय चौधरी BNP की टिकट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। निताई रॉय चौधरी BNP के प्रमुख उपाध्यक्षों में शामिल हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं। दोनों ने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशियों को हराया। तीसरे अल्पसंख्यक सांसद साचिंग प्रू हैं, जो बंदरबन के पहाड़ी जिले से चुने गए। वे मरमा जातीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और BNP के वरिष्ठ नेता हैं। चौथे विजेता दिपेन दीवान रंगामाटी सीट से जीते। वे चकमा समुदाय से आते हैं, जो बौद्ध बहुल जनजातीय समूह है। 30 से 40 सदस्यों की कैबिनेट बनाने की तैयारी में BNP BNP के कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया है कि कैबिनेट बहुत बड़ा नहीं होगा। इसमें 30 से 40 सदस्य शामिल हो सकते हैं। इसमें 2001 की BNP सरकार के पूर्व मंत्री, स्टैंडिंग कमेटी सदस्य और नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। तारिक रहमान ने कैबिनेट गठन को लेकर वरिष्ठ नेताओं से परामर्श शुरू कर दिया है। हालांकि, किसे कौन सा मंत्रालय मिलेगा, यह शपथ ग्रहण के बाद ही साफ होगा। BNP की स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि देश को कैबिनेट का अंतिम स्वरूप देखने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। पार्टी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया में समय लग सकता है। तब तक उनके किसी अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने की संभावना जताई जा रही है। किन नामों पर चल रही चर्चा विदेश मंत्री पद के लिए BNP के संयुक्त महासचिव हुमायूं कबीर का नाम चर्चा में है। पार्टी के अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत करने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। डॉ. रेजा किब्रिया को वित्त मंत्री पद के लिए विचार किया जा रहा है। वे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में वरिष्ठ अर्थशास्त्री रह चुके हैं। आमिर खुसरो महमूद चौधरी को वाणिज्य मंत्रालय दिया जा सकता है। वे पहले भी इस पद पर रह चुके हैं। BNP महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का नाम स्थानीय सरकार मंत्रालय के लिए सामने आया है। वे पहले कृषि राज्य मंत्री और बाद में नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री रह चुके हैं। पूर्व अटॉर्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मोहम्मद असदुज्जमान का नाम कानून मंत्रालय के लिए चर्चा में है। सलाहुद्दीन अहमद का नाम गृह मंत्रालय के लिए और मिर्जा अब्बास का नाम सड़क परिवहन एवं पुल मंत्रालय के लिए लिया जा रहा है। डॉ. एजेडएम जाहिद हुसैन स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल सकते हैं, जबकि रुहुल कबीर रिजवी को सूचना मंत्रालय की जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा नज्रुल इस्लाम खान, डॉ. अब्दुल मोयीन खान, गायेश्वर चंद्र रॉय, हाफिज उद्दीन अहमद, इकबाल हसन महमूद टुकू, सेलीमा रहमान, अंदलीव रहमान पार्थो, मिजानुर रहमान मिनू और शमा ओबैद सहित कई अन्य नामों पर भी चर्चा चल रही है। मंत्रियों के चयन का प्रोसेस जानिए पार्टी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की अंतिम संरचना का फैसला BNP की स्थायी समिति और अध्यक्ष तारिक रहमान करेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में वे अंतिम सूची में कभी भी बदलाव कर सकते हैं। मंगलवार सुबह मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाएंगे। सांसदों के शपथ लेने के बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष अलग-अलग बैठक कर अपने संसदीय नेता का चुनाव करेंगे। बहुमत दल का नेता इसके बाद बंगभवन जाकर राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन से मुलाकात करेगा। राष्ट्रपति औपचारिक रूप से उसे सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदार मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उपमंत्रियों की सूची राष्ट्रपति को सौंपेंगे। राष्ट्रपति सूची कैबिनेट डिवीजन को भेजेंगे, जो शपथ समारोह की तैयारी पूरी करेगा। कैबिनेट सचिव नामित मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर शपथ समारोह में शामिल होने का निमंत्रण देंगे और उनके घरों पर आधिकारिक वाहन भेजे जाएंगे। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश-यूनुस के खिलाफ जांच आयोग बैठा सकती है रहमान सरकार:18 मंत्रियों की संपत्ति में इजाफा; यूनुस की प्रॉपर्टी ₹12 करोड़ हुई, पेरिस जाने की तैयारी में बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद गठित मोहम्मद यूनुस सरकार के मंत्रियों की संपत्ति में उछाल आया है। सरकार के मुखिया यूनुस की संपत्ति में एक साल में लगभग 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
















/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)







