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Meerut Saurabh Rajput Murder Case: अब फांसी की सजा को चुनौती देगी मुस्कान; हाईकोर्ट में अपील की तैयारी

Meerut Saurabh Rajput Murder Case: मेरठ के सबसे सनसनीखेज मामलों में शामिल सौरभ राजपूत हत्याकांड में अब एक नया मोड़ आ गया है. अपने ही पति की बेरहमी से जान लेकर शव को सीमेंट के ड्रम में छिपाने वाली मुख्य आरोपी मुस्कान ने फांसी के फंदे से बचने के लिए कानूनी दांव आजमाना शुरू कर दिया है. जिला अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद अब मुस्कान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है. सलाखों के पीछे बंद मुस्कान ने निचली अदालत के इस बड़े फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करने की इच्छा जाहिर की है. उसकी इसी मांग को देखते हुए जेल प्रशासन की तरफ से उसे मुफ्त कानूनी मदद और सरकारी वकील दिलाने की कवायद तेज कर दी गई है.

जेल से ही अपील करने का बनाया मन

मेरठ की जिला जेल में बंद मुस्कान को जब से अदालत ने मौत का हुक्म सुनाया है, तभी से उसके अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं. इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान ने जेल के अंदर से ही इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है. कानून के मुताबिक हर कैदी को अपने बचाव और ऊपरी अदालत में जाने का पूरा अधिकार होता है. इसी नियम के तहत मुस्कान को कानूनी सहायता दिलाने के लिए स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी को बाकायदा पत्र लिखा जा चुका है. उम्मीद है कि जल्द ही उसे सरकारी वकील मिल जाएगा, जो हाईकोर्ट में उसकी तरफ से याचिका दाखिल करेगा.

परिजनों से दूरी, कानून का सहारा

हैरानी की बात यह भी सामने आई है कि फांसी की सजा पाने के बाद भी मुस्कान ने अभी तक अपने परिवार के किसी सदस्य से संपर्क करने की कोशिश नहीं की है. जेल अधिकारियों का कहना है कि उसने अपने घरवालों या रिश्तेदारों को कोई खत नहीं लिखा है और न ही किसी से मिलने की कोई गुहार लगाई है. इससे यह साफ लगता है कि उसका पूरा ध्यान अब केवल कानूनी प्रक्रिया के जरिए खुद को बचाने पर टिका हुआ है. जैसे ही लीगल सर्विस अथॉरिटी की तरफ से वकील की नियुक्ति पूरी होगी, मुस्कान की ओर से हाईकोर्ट में विधिवत अपील दायर कर दी जाएगी. इसके बाद ऊपरी अदालत में उसके मामले की नए सिरे से सुनवाई की राह खुलेगी.

रोंगटे खड़े कर देने वाली थी साजिश

मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड जब सामने आया था, तो पूरे इलाके के लोग सहम गए थे. मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने ही सुहाग को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का बेहद खौफनाक ताना बाना बुना था. साजिश के तहत सौरभ की जान ली गई और फिर मामले को छुपाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं. दोनों ने शव को एक बड़े नीले ड्रम में डाला और ऊपर से सीमेंट का घोल भरकर उसे पूरी तरह जमा दिया, ताकि किसी को भनक तक न लगे और कोई बदबू बाहर न आए. पुलिस ने जब इस गुत्थी को सुलझाया और ड्रम को तोड़कर सच्चाई बाहर निकाली, तो हर कोई दंग रह गया था. अदालत ने मामले की गंभीरता और वहशीपन को देखते हुए इसे दुर्लभ से दुर्लभतम माना और मुस्कान को सीधे फांसी की सजा सुनाई.

रविता और अमरदीप का मामला भी सुर्खियों में

मेरठ में पति की हत्या का केवल यही एक अकेला खौफनाक मामला नहीं है. इसी तरह का एक और सनसनीखेज मामला रविता और उसके प्रेमी अमरदीप का भी रहा है, जो इलाके में काफी चर्चा बटोर चुका है. इस मामले में भी पति को रास्ते से हटाने के लिए रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश रची गई थी. आरोप था कि पति की हत्या करने के बाद मामले को हादसा दिखाने के लिए शव को जहरीले सांप से डसवाया गया था. हालांकि इस मामले में दोनों दोषियों की तरफ से फिलहाल किसी नई अपील या राहत की अर्जी को लेकर कोई हलचल सामने नहीं आई है.

अब हाईकोर्ट के रुख पर टिकी निगाहें

मुस्कान की इस नई कोशिश के बाद अब कानूनी जानकारों और आम लोगों की नजरें हाईकोर्ट की कार्रवाई पर टिक गई हैं. सरकारी वकील मिलने के बाद अपील का मसौदा तैयार होगा और निचली अदालत के फैसले की कमियों को आधार बनाकर चुनौती दी जाएगी. हालांकि निचली अदालत ने जिस तरह पुख्ता सबूतों, गवाहों के बयानों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर मुस्कान को मौत की सजा सुनाई है, उसे देखते हुए हाईकोर्ट की राह उसके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है. आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि ऊपरी अदालत इस अर्जी पर क्या रुख अपनाती है और कानूनी लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है.

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न्यूजीलैंड दौरे से पहले भारतीय कप्तान शुभमन गिल का बड़ा फैसला, रणजी ट्रॉफी में अचानक कराई वाइल्ड कार्ड एंट्री

Ranji Trophy: भारतीय टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान शुभमन गिल घरेलू क्रिकेट में वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. गिल ने रणजी ट्रॉफी 2026-27 के दूसरे दौर के मुकाबले में पंजाब की टीम से खेलने का फैसला किया है. छत्तीसगढ़ के खिलाफ होने वाले इस अहम मैच में गिल की मौजूदगी से पंजाब की टीम को बड़ा बूस्ट मिला है. यह मुकाबला न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा. 

पहला मैच क्यों नहीं खेले थे गिल?

टूर्नामेंट के पहले दौर में असम के खिलाफ खेले गए मैच में शुभमन गिल पंजाब की टीम का हिस्सा नहीं थे. उनके न होने पर भारत की अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान उदय सहारन ने टीम की कमान संभाली थी और वह इस दूसरे मैच में भी कप्तान बने रहेंगे. पहले मैच में गिल के न होने की वजह उनका व्यस्त अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल था, लेकिन अब वे मैदान पर जलवा बिखेरने के लिए तैयार हैं.

न्यूजीलैंड दौरे की तैयारी का है सुनहरा मौका

शुभमन गिल के इस मैच में खेलने का सबसे बड़ा कारण न्यूजीलैंड दौरा है. भारत को अगले महीने में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे और टेस्ट सीरीज खेलनी है. नवंबर के शुरुआती हफ्तों होने वाली इस सीरीज से पहले गिल रेड-बॉल क्रिकेट में बेहतरीन मैच प्रैक्टिस हासिल करना चाहते हैं. रणजी ट्रॉफी का यह मैच उन्हें विदेशी दौरे से पहले अपनी बैटिंग की धार तेज करने का पूरा मौका देगा. 

न्यू चंडीगढ़ के मैदान पर पहली बार खेलेंगे रणजी

यह मुकाबला शुभमन गिल के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वे पहली बार मुल्लानपुर के न्यू चंडीगढ़ स्थित महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में पंजाब के लिए कोई फर्स्ट-क्लास मैच खेलने उतरेंगे. हालांकि, उन्होंने इसी साल जून में इस मैदान पर अफगानिस्तान के खिलाफ भारत के लिए एक ऐतिहासिक टेस्ट मुकाबला खेला था. उस मैच में गिल ने कप्तानी पारी खेलते हुए पहली पारी में नाबाद 103 रनों की पारी खेली थी. अब पंजाब के क्रिकेट प्रशंसकों को पूरी उम्मीद है कि वह छत्तीसगढ़ के खिलाफ भी अपने इसी घरेलू मैदान पर वैसी ही आतिशी पारी दोहराएंगे. 

पंजाब की बल्लेबाजी होगी और भी मजबूत

शुभमन गिल के स्क्वाड में शामिल होने से पंजाब का बैटिंग लाइन-अप बेहद मजबूत नजर आ रहा है. उनके साथ टीम में ओपनर प्रभसिमरन सिंह जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी मौजूद हैं. असम के खिलाफ पहला मैच ड्रॉ रहने के बाद, पंजाब की टीम छत्तीसगढ़ के खिलाफ इस मुकाबले को जीतकर सीजन की अपनी पहली सीधी जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी.

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  Sports

उम्र नहीं फिटनेस और फॉर्म देखें, Sunil Gavaskar ने Team India के लिए की Krunal Pandya की वकालत

भारतीय क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी को लेकर चर्चा तेज है। तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने लंबे इंतजार के बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी की है, जिसके बाद अब दूसरे सीनियर खिलाड़ियों को भी दोबारा मौका मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। इसी बीच भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और पूरी तरह फिट है, तो उसकी उम्र को टीम में चयन के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए।

भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर करीब 1,425 दिन बाद भारतीय टीम में वापसी की है। उनके चयन से यह संकेत मिला है कि चयनकर्ता अनुभवी खिलाड़ियों को फिर से मौका देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की संभावित वापसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, सुनील गावस्कर ने इस चर्चा के बीच क्रुणाल पांड्या का नाम आगे रखा है, जो पिछले कुछ समय से अपने खेल से प्रभावित कर रहे हैं।

क्रुणाल ने 2026 के आईपीएल सत्र में गेंद और बल्ले दोनों से अहम योगदान दिया। उन्होंने 16 मैचों में 14 विकेट हासिल किए। इस दौरान उनकी गेंदबाजी औसत 30.35 और रन देने की दर 8.45 रही। बल्लेबाजी में भी उन्होंने 226 रन बनाए। इसमें मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेली गई मैच जिताने वाली अर्धशतकीय पारी भी शामिल है। बता दें कि क्रुणाल अपनी टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पिछली 2 खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

जियोस्टार से बातचीत के दौरान सुनील गावस्कर ने क्रुणाल की गेंदबाजी को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि क्रुणाल गेंद को बहुत ज्यादा घुमाने वाले गेंदबाज नहीं हैं, लेकिन वह अपनी लाइन और लेंथ में लगातार बदलाव करते हैं। वह बल्लेबाज के इरादे को समझकर गेंदबाजी करते हैं और कभी पैड की तरफ गेंद डालते हैं, तो कभी बाउंसर का इस्तेमाल करते हैं। उनका मकसद केवल विकेट लेना ही नहीं, बल्कि बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने से रोकना भी होता है।

गावस्कर के मुताबिक, क्रुणाल खेल को समझने वाले खिलाड़ी हैं और मैदान पर हमेशा कोई न कोई योजना बनाकर उतरते हैं। उन्होंने बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण में भी क्रुणाल के योगदान की सराहना की। गावस्कर का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए टीम में उन खिलाड़ियों को शामिल करना जरूरी है, जो अपने प्रदर्शन से जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान ने साफ कहा कि टीम चुनते समय खिलाड़ियों की उम्र के बजाय उनके प्रदर्शन और फिटनेस को महत्व दिया जाना चाहिए। अगर कोई खिलाड़ी आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अच्छा खेल रहा है और शारीरिक रूप से फिट है, तो उसे भारतीय टीम में मौका देने पर विचार होना चाहिए। उनके अनुसार, बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए चयन का आधार खिलाड़ी की उपयोगिता होनी चाहिए, न कि उसकी उम्र।

गौरतलब है कि क्रुणाल पांड्या ने आखिरी बार 2021 में श्रीलंका दौरे पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद से वह राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं कर सके हैं। अब गावस्कर के समर्थन के बाद उनके दोबारा भारतीय टीम में चुने जाने की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उनकी वापसी को लेकर चयनकर्ताओं की ओर से कोई फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उनका प्रदर्शन आगे की राह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Sun, 18 Oct 2026 23:24:00 +0530

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