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बांग्लादेश को लगा बड़ा झटका, ODI ट्राई सीरीज के शुरू होने से ठीक पहले कप्तान लिटन दास हुए बाहर

Litton Das: बांग्लादेश क्रिकेट टीम के लिए एक बेहद बुरी खबर सामने आई है. टीम के नियमित कप्तान और स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज लिटन दास चोट के कारण यूएई में खेली जा रही वनडे ट्राई सीरीज से बाहर हो गए हैं. सीरीज का पहला मैच शुरू होने से ठीक पहले बांग्लादेश को यह तगड़ा झटका लगा, जिससे टीम मैनेजमेंट की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लिटन दास के दाहिने कूल्हे में चोट लगी है और वह फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पाए हैं. उनकी अनुपस्थिति में अब युवा खिलाड़ी तौहीद हृदय को टीम की कप्तानी की कमान सौंपी गई है.

इंजरी की वजह से ODI ट्राई सीरीज से बाहर हुए लिटन दास

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के मुताबिक, कप्तान लिटन दास के दाहिने कूल्हे (Right Hip Joint) में चोट लगी है. मैच से ठीक पहले 16 अक्टूबर को उन्होंने दर्द की शिकायत की थी, जिसके बाद उनका MRI स्कैन कराया गया. रिपोर्ट में समस्या आने के बाद लिटन दास ने मैच के दिन एक फिटनेस टेस्ट भी दिया, लेकिन वह इसे पास करने में नाकाम रहे. इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी और वह पूरी सीरीज से बाहर हो गए.

अब यह खिलाड़ी संभालेगा टीम की कप्तानी

लिटन दास के अचानक बाहर होने के बाद उपकप्तान तौहीद हृदय को बांग्लादेश की कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. तौहीद अब इस पूरी ट्राई सीरीज में टीम की कमान संभालते हुए नजर आएंगे. कप्तान के तौर पर यह उनके करियर की एक बड़ी परीक्षा होने वाली है. वह जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले जा रहे पहले मुकाबले में बतौर कप्तान मैदान पर उतरे, जहां उन्होंने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. नियमित कप्तान की गैरमौजूदगी में युवा तौहीद हृदय पर न सिर्फ अपनी बल्लेबाजी, बल्कि अपनी कप्तानी से भी टीम को जीत दिलाने का भारी दबाव रहेगा.

बांग्लादेश टीम को एक और बड़ा झटका, यह दिग्गज भी हुआ बाहर

कप्तान लिटन दास की इंजरी के साथ-साथ बांग्लादेश के लिए एक और परेशान करने वाली खबर आई. टीम के सीनियर ऑलराउंडर मेहदी हसन मिराज भी पहले मैच की प्लेइंग 11 का हिस्सा नहीं बन सके. रिपोर्ट के अनुसार, मेहदी हसन पिछले तीन दिनों से तेज बुखार से पीड़ित हैं और फिलहाल डॉक्टर की देखरेख में होटल में ही आराम कर रहे हैं. मिराज का बाहर होना टीम के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि वह अपनी शानदार स्पिन गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी से मैच का रुख बदलने में माहिर हैं. टीम मैनेजमेंट को उम्मीद है कि वह अगले मैच से पहले पूरी तरह फिट हो जाएंगे.

अगले साल होने वाले वर्ल्ड कप के लिहाज से अहम है यह सीरीज

यूएई में खेली जा रही इस वनडे ट्राई सीरीज में बांग्लादेश के अलावा अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे की टीमें हिस्सा ले रही हैं. बांग्लादेश के नजरिए से यह सीरीज बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीम अगले साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप के लिए पहले ही सीधे क्वालीफाई कर चुकी है. ऐसे में वर्ल्ड कप की तैयारियों को पुख्ता करने और युवा खिलाड़ियों को आजमाने के लिए बांग्लादेश के पास यह एक बेहतरीन मौका है। हालांकि, अपने नियमित कप्तान के बिना मैदान पर उतरना टीम के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा.

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गुजरात की बोट एम्बुलेंस ने संभाले 777 आपात मामले, गर्भावस्था संबंधी केस सबसे अधिक

गांधीनगर, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। अप्रैल 2018 से सितंबर 2026 के बीच गुजरात की दो बोट एम्बुलेंसों द्वारा संभाली गई 777 चिकित्सीय आपात स्थितियों में से लगभग 46 प्रतिशत मामले गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं से जुड़े थे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि द्वीपों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में जल-आधारित आपातकालीन सेवाएं कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

दूरदराज के द्वीपीय और समुद्री तटीय समुदायों में रहने वाले निवासियों के लिए ये बोट एम्बुलेंस समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी हैं, खासकर गर्भवती महिलाओं और आपात स्वास्थ्य जरूरतों वाले मरीजों के लिए।

राज्य की 108 आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा के अंतर्गत संचालित इस सेवा में दो नौका सेवाएं हैं, जिनमें से एक देवभूमि द्वारका जिले के ओखा में और दूसरी पोरबंदर में तैनात है। ये नौकाएं आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान करती हैं और उन क्षेत्रों में रोगियों को स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचाती हैं जहां सड़क मार्ग से पहुंचना कठिन या असंभव है।

इस अवधि के दौरान दर्ज की गई 777 आपातकालीन हस्तक्षेपों में से ओखा इकाई ने 720 मामलों (लगभग 92.7 प्रतिशत) को संभाला, जबकि पोरबंदर इकाई ने 57 मामलों पर कार्रवाई की।

गर्भावस्था संबंधी आपात स्थितियां सबसे आम कारण थीं, जिनके 355 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 350 मामले ओखा इकाई और पांच मामले पोरबंदर इकाई द्वारा संभाले गए।

अधिकारियों ने बताया कि इनमें से अधिकांश मामले बेत द्वारका के निवासियों से संबंधित थे, जहां पहले सड़क संपर्क नहीं था, जिसके कारण गर्भावस्था के दौरान चिकित्सा सहायता की आवश्यकता वाली महिलाओं के लिए नाव परिवहन महत्वपूर्ण हो जाता था।

पेट में तेज दर्द आपातकालीन स्थानांतरण का दूसरा सबसे आम कारण था, जिसके 105 मामले सामने आए, जिनमें से 91 ओखा में और 14 पोरबंदर में संभाले गए। गैर-वाहन संबंधी चोटें, जिनमें मछली पकड़ने वाली नौकाओं, बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में लगी चोटें शामिल हैं, 83 मामलों के लिए जिम्मेदार थीं।

ओखा इकाई ने ऐसी 71 आपात स्थितियों का इलाज किया, जबकि पोरबंदर इकाई ने 12 मामलों का इलाज किया। हृदय संबंधी आपात स्थितियों के 82 मामले सामने आए, जिनमें से 77 ओखा इकाई और पांच पोरबंदर इकाई द्वारा संभाले गए।

इस सेवा का उद्देश्य द्वीपों पर रहने वाले लोगों, दूरदराज के तटीय गांवों में रहने वाले लोगों और अपतटीय क्षेत्रों में काम करने वाले मछली पकड़ने वाले दल के सदस्यों द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों का समाधान करना है।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीजों को अस्‍पताल पहुंचाने में मदद करके, एम्बुलेंस भौगोलिक दूरी और सीमित सड़क संपर्क के बावजूद उन्हें चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचाने में सहायक होती हैं।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पनशेरिया ने कहा कि राज्य सरकार दूरदराज के क्षेत्रों, जिनमें मुख्य रूप से जलमार्ग से पहुंचने वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में हम राज्य के हर कोने तक, यहां तक ​​कि समुद्र में भी, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। द्वीप निवासियों, तटीय गांवों और अपतटीय मछली पकड़ने वाले दल के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को पूरा करने के लिए नाव एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। इस बेड़े ने पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण अस्पताल पहुंचने से पहले की देखभाल और जीवन रक्षक परिवहन सेवाएं प्रदान की हैं।”

राज्य सरकार ने कहा कि इन जहाजों की तैनाती का उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि तटीय और द्वीपीय समुदायों के मरीजों को जरूरत पड़ने पर अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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तुम्हें इंतजार करना होगा... वैभव सूर्यवंशी के साथ फिर नाइंसाफी? श्रेयस अय्यर ने खुद बताई सच्चाई

भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच टी20 मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर रही. इस सीरीज में दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने दमदार खेल का प्रदर्शन किया, तो कुछ प्लेयर ऐसे भी रहे जो मौके के इंतजार में रह गए. उन्हीं में से एक भारतीय टीम की युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी हैं. वैभव को एक भी मैच में मौका नहीं मिला. Sun, 18 Oct 2026 06:15:43 +0530

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