क्या Mounjaro से डायबिटीज मरीजों में अंधेपन का खतरा कम होता है? नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा
Mounjaro Injection: वजन घटाने वाले इंजेक्शन को लेकर जहां एक तरफ आंखों की सेहत बिगड़ने की चेतावनी दी जाती है. वहीं, अब एक नई अमेरिकी स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. इस शोध में पाया गया है कि मौंजारो लेने वाले टाइप-2 डायबिटीज मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारी होने या उसके गंभीर चरणों में पहुंचने के खतरे को कम कर सकती है.
क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी?
डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, डायबिटिक रेटिनोपैथी एक गंभीर आंखों की बीमारी है, जो लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से होती है. इसमें रेटिना यानी आंख का वह हिस्सा होता है, जो प्रकाश को पहचानकर मस्तिष्क तक संकेत भेजता है. ये धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है. अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो यह स्थिति स्थायी अंधेपन का कारण बन सकती है.
अनुमान है कि मधुमेह से पीड़ित एक चौथाई से अधिक लोगों में रेटिनोपैथी के लक्षण पाए जाते हैं. यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए आंखों की नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है.
स्टडी में क्या सामने आया?
अमेरिका में170,000 से अधिक मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया है. शोधकर्ताओं ने इसमें उन लोगों की तुलना की है जिन्होंने सिर्फ लाइफस्टाइल में बदलाव किया है और उन लोगों से जो मौंजारों का इंजेक्शन ले रहे थे.
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इसके परिणाम चौंकाने वाले थे. Mounjaro लेने वाले मरीजों में-
- डायबिटिक रेटिनोपैथी विकसित होने का खतरा बहुत कम था.
- पहले से मौजूद बीमारी को गंभीर होने से रोकने की संभावनाएं भी कम पाई गई थी.
सेमाग्लूटाइड से जुड़ी चेतावनियां
हाल ही में ब्रिटेन की औषधि नियामक संस्था Medicines and Healthcare products Regulatory Agency (MHRA) ने चेतावनी दी थी कि सेमाग्लूटाइड, जो Wegovy और Ozempic जैसी दवाओं में का एक तत्व है. कई दुर्लभ मामलों में दृष्टि हानि का कारण बनती है. वहीं, मौंजारो काफी हद तक सुरक्षित है.
पुरानी रिसर्च और नई रिसर्च में अंतर
2016 में की गई एक स्टडी में पाया गया था कि सेमाग्लूटाइड लेने वाले डायबिटिक रेटिनोपैथी के लगभग 10% मरीजों में लक्षण और बिगड़ सकते हैं. इसी वजह से वजन घटाने वाले इंजेक्शनों को लेकर आशंका बनी हुई थी. हालांकि, नई रिसर्च के लेखक, न्यूयॉर्क स्थित Weill Cornell Medicine के आई साइंस स्पेशलिस्ट डॉ. स्जिलार्ड किस के अनुसार, तिरजेपेटाइड (Mounjaro का एक सक्रिय घटक) के मामले में ऐसा जोखिम नहीं पाया गया. उनके मुताबिक, 'डायबिटिक रेटिनोपैथी वाले मरीजों को यह जानकर राहत मिल सकती है कि तिरजेपेटाइड उनकी आंखों की स्थिति को और खराब नहीं करता है, बल्कि जोखिम कम कर सकता है.
मरीजों के लिए लाभकारी सूचना
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह अध्ययन संकेत देता है कि टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे मरीजों के लिए Mounjaro दो तरीके से लाभ दे सकता है. ब्लड शुगर कंट्रोल और आंखों की गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में. हालांकि, विशेषज्ञ अब भी सलाह देते हैं कि किसी भी दवा को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है.
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Rajasthan News: राजस्थान के भिवाड़ी में केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग, 7 लोगों की जिंदा जलकर मौत
Rajasthan Factory Fire: राजस्थान के अलवर जिले की एक केमिकल फैक्ट्री में धमाके की खबर है. बताया जा रहा है कि इस धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई है. जबकि कई लोग घायल हुए हैं. बताया जा रहा है कि राजस्थान के अलवर जिले के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद पड़ी फैक्ट्री में सोमवार को अचानक तेज धमाका हो गया. जिससे भीषण आग लग गई. आग इतनी तेज थी कि वहां मौजूद सात लोग जिंदा जल गए. घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. सूचना मिलते ही आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे कर्मचारी और मजदूर अपनी-अपनी जान बचाकर बाहर निकल आए.
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बरामद किए गए 7 शव
बताया जा रहा है कि भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की एक केमिकल फैक्ट्री में अचानक से हुए धमाके से भीषण आग लग गई. जिसमें 7 लोग जिंदा जल गए. ये केमिकल फैक्ट्री प्लॉट नंबर G1/118B में बताई जा रही है. जहां सोमवार सुबह ये भीषण अग्निकांड हुआ. अभी तक हादसे के कारणों का पता नहीं चला है. दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान फैक्ट्री से 7 शव बरामद किए गए हैं.
डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पाया गया आग पर काबू
घटना की जानकारी मिलते ही भिवाड़ी एसपी, तिजारा डीएसपी शिवराज सिंह और अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुमित्रा मिश्र मौके पर पहुंच गए. प्रशासन के मुताबिक, सोमवार सुबह भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई. घटना की जानकारी मिलते ही दमकल की कई गाड़ियों को मौके पर भेजा गया. इसके बाद कर्मचारियों के इनपुट के आधार पर भिवाड़ी, तिजारा और आसपास के इलाकों से दमकल की कई और गाड़ियों को मौके पर भेजा गया. जहां करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों ने आग पर काबू पाया. इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. इस दौरान फैक्ट्री से 7 कर्मचारियों के शव बरामद किए गए.
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