Air India और Express ने बढ़ाई पाबंदी, Saudi Arabia उड़ानें 24 अक्टूबर तक स्थगित
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण शनिवार को एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने सऊदी अरब के लिए उड़ानों को रद्द रखे जाने की अवधि को 24 अक्टूबर तक बढ़ा दिया। इस हफ्ते की शुरुआत में, इंडिगो और अकासा एयर ने भी सऊदी अरब के शहरों के लिए अपनी उड़ानें रद्द करने की घोषणा की थी। एअर इंडिया ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मौजूदा हालात को देखते हुए, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने 24 अक्टूबर 2026 तक जेद्दा, रियाद और दम्माम के लिए अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।’’ साथ ही, एअर इंडिया ने यह भी कहा कि इस दौरान वह यात्रियों को हर संभव सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
एयरलाइन ने कहा कि वह स्थिति पर करीबी नजर रख रही है। शुक्रवार को, एअर इंडिया ने 20 अक्टूबर तक सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानों को रद्द कर दिया, जबकि एअर इंडिया एक्सप्रेस ने पहले ही 17 अक्टूबर तक इस खाड़ी देश के लिए अपनी सेवाएं निलंबित कर दी थीं। इंडिगो ने बृहस्पतिवार को घोषणा की थी कि सऊदी अरब के शहरों के लिए उड़ानों को रद्द करने की अवधि 24 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है।
बृहस्पतिवार को अकासा एयर ने कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए, उसने रियाद आने-जाने वाली सभी उड़ानों को 24 अक्टूबर तक और जेद्दा आने-जाने वाली सभी उड़ानों को 21 अक्टूबर तक निलंबित रखने का फैसला किया है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब में नागरिक अवसंरचना, जिसमें रियाद हवाई अड्डा भी शामिल है, को निशाना बनाकर किये गए हमलों के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है।
2 साल से हिरासत में थे Sandip Ghosh, Supreme Court ने ट्रायल की धीमी गति पर दी जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को जमानत दे दी है। उन पर कथित वित्तीय अनियमितताओं और अयोग्य उम्मीदवारों को दाखिला दिलाने के लिए मेरिट स्कोर में हेरफेर करने का आरोप है। जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 23 फरवरी के उस आदेश के खिलाफ घोष की अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनके लंबे समय तक हिरासत में रहने और मुकदमे की धीमी गति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। पीठ ने गौर किया कि घोष दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और 147 गवाहों में से अब तक केवल सात गवाहों से ही पूछताछ हुई है।
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पीठ ने कहा इतना कहना ही काफी है कि अपीलकर्ता दो साल से अधिक समय से जेल में है और हमें बताया गया है कि 147 गवाहों में से अब तक केवल 7 गवाहों से ही पूछताछ हुई है। अपने आदेश में बेंच ने कहा इस मामले को देखते हुए, जेल में बिताई गई अवधि और मुकदमे के चरण पर विचार करते हुए, हम हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करने और इस अपील को स्वीकार करने का निर्णय लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घोष की जमानत की शर्तें ट्रायल कोर्ट तय करेगा। कोर्ट ने कहा इसके अनुसार, हाई कोर्ट द्वारा 23 फरवरी, 2026 को पारित आदेश को रद्द किया जाता है, और अपीलकर्ता को उन शर्तों पर जमानत दी जाती है जो संबंधित ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाएंगी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच की और 24 अगस्त 2024 को अपनी चार्जशीट में घोष का नाम शामिल किया। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 120B, 409, 420, 468 और 471 के तहत आपराधिक साजिश रचने, विश्वासघात करने, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए। इसके साथ ही, उन पर 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के तहत भी अपराधों का आरोप है।
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ये आरोप कॉलेज में हुई वित्तीय अनियमितताओं और मेरिट स्कोर में हेरफेर करके अयोग्य उम्मीदवारों को दाखिला दिलाने से जुड़े हैं। 7 जनवरी 2025 को ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने और 23 फरवरी 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा उनकी अपील ठुकरा दिए जाने के बाद, घोष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में बिताए गए समय और ट्रायल के मौजूदा चरण को ध्यान में रखते हुए उन्हें जमानत दे दी है।
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