सूखे के बीच BJP नेताओं ने गरबा पर बहाए करोड़ों रुपये, Congress ने लगाया आरोप
कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और मुंबई क्षेत्र से सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने भव्य गरबा कार्यक्रम आयोजित कर सूखे से प्रभावित किसानों के साथ ‘‘क्रूर मजाक’’ किया है। इस पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर हिंदू त्योहारों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि त्योहारों के उत्सव को सूखे से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि राज्य सरकार सूखे की समस्या से निपट रही है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के वरिष्ठ मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे ने आरोप लगाया कि मुंबई क्षेत्र से भाजपा के मंत्री और पार्टी के अन्य विधायक ऐसे आयोजनों पर लगभग 80 करोड़ से 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने डोंबिवली में ‘नमो रामो रमझट 2026’ नाम से भव्य नवरात्र कार्यक्रम आयोजित किया है, जिस पर प्रतिदिन लगभग 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। डोंबिवली के संत सावलाराम महाराज क्रीड़ा संकुल में वातानुकूलित (एसी) पंडाल बनाया गया है।’’ लोंढे ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, “इस आयोजन में हर दिन करोड़ों रुपये खर्च करके भव्य रोशनी और साउंड सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम पर कुल 18 करोड़ से 20 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि केवल चव्हाण ही नहीं, बल्कि मंत्री आशीष शेलार और मुंबई क्षेत्र के भाजपा के अन्य विधायक भी ऐसे आयोजनों पर लगभग 80 करोड़ से 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा, “जबकि सूखे से प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से केवल 5,000 रुपये की मामूली सहायता मिल रही है, वहीं भाजपा के नेता गरबा आयोजनों पर करोड़ों रुपये लुटा रहे हैं। यह सूखे की मार झेल रहे किसानों के साथ क्रूर मजाक है।’’ उन्होंने भाजपा नेताओं पर मुख्यमंत्री की त्योहारों को सादगी से मनाने की अपील को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे किसानों के घावों पर नमक छिड़क रहे हैं। इस बारे में पूछे जाने पर भाजपा प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी ने कहा कि त्योहारों के आयोजनों को सूखे की समस्या से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सूखे की समस्या से निपट रही है और कई लोग भी व्यक्तिगत स्तर पर जरूरतमंदों को राहत प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ जगहों पर त्योहार मनाए जा रहे हैं। कुलकर्णी ने सवाल किया, ‘‘मुझे आश्चर्य होता है कि कांग्रेस हमेशा हिंदू त्योहारों के विरोध में क्यों खड़ी नजर आती है।
CM Yogi Adityanath ने SP को बताया सैफई सिंडिकेट, कहा- BJP राज में खत्म हुआ दंगों का दौर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) की कड़ी आलोचना करते हुए उसे सैफई सिंडिकेट करार दिया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अराजकता, टकराव और दंगे हमारी नियति बन गए थे। लखनऊ में बोलते हुए, मुख्यमंत्री ने राज्य की पिछली कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शासन में मौजूदा स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ पिछली सरकारों ने उत्तर प्रदेश को अराजकता और पहचान के संकट में धकेल दिया था, वहीं अब राज्य में शारदीय नवरात्रि और रामलीलाओं के बड़े आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से होते हैं, जिनमें परेशानी का रत्ती भर भी नामोनिशान नहीं होता।
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योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा कि समाजवादी पार्टी—यानी यह ‘सैफई सिंडिकेट’। यह सिंडिकेट रोजगार के अवसरों को खत्म कर देता था और पहचान का संकट पैदा करता था। त्योहारी माहौल का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आज आप शारदीय नवरात्रि के उत्सव में शामिल हो रहे हैं। हर जगह देवी दुर्गा की पूजा हो रही है, अनुष्ठान किए जा रहे हैं और रामलीलाओं का मंचन हो रहा है। इन आयोजनों में हजारों लोग हिस्सा ले रहे हैं, और कहीं भी किसी तरह की परेशानी का कोई नामोनिशान नहीं है—चारों तरफ बस उत्सव का ही माहौल है।
सांप्रदायिक अशांति और कानून-व्यवस्था की विफलता को लेकर पिछली सपा सरकार पर निशाना साधते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले, जश्न के बजाय हर तरफ अफरा-तफरी थी। उथल-पुथल, टकराव और दंगे हमारी नियति बन गए थे। 2017 में सत्ता संभालने के बाद से, आदित्यनाथ ने इस बदलाव का श्रेय सख्त पुलिसिंग और अपराध के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' (सख्त बर्दाश्त न करने की) नीति को दिया है। उनका दावा है कि इसी वजह से उत्तर प्रदेश दंगामुक्त राज्य बन गया है।
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इसी कार्यक्रम में, लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने भारत के राजनीतिक इतिहास के कुछ अहम पलों को याद किया। उन्होंने 1975 के आपातकाल और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का जिक्र करते हुए, देश के लोकतांत्रिक ढांचे में असहमति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह वही उत्तर प्रदेश है, जिसके हाई कोर्ट ने 12 जून को भारत की सबसे शक्तिशाली कुर्सी पर बैठे व्यक्ति का चुनाव रद्द कर दिया था। ठीक 13 दिन बाद, इसके बदले में देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लगा दिया गया... उस समय, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हंसराज खन्ना ने अकेले असहमति जताई थी, और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी। लेकिन इतिहास कभी बेकार नहीं जाता। हाल ही में, आपने देखा होगा कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उसी अकेली असहमति को सही माना। 1975 ने देश को ‘कानून के शासन’ (rule of law) और ‘कानून के जरिए शासन’ (rule by law) के बीच का अंतर सिखाया। देश के लिए 1975 का यही सबक है।
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