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पोप लियो की सेहत में सुधार, वेटिकन ने कहा- जल्द होंगे अस्पताल से डिस्चार्ज

रोम, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। पोप लियो XIV (चौदहवें) की सेहत में सुधार के बाद उन्हें शनिवार को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाएगा। वेटिकन ने बताया कि 71 वर्षीय पोप के ब्लड टेस्ट और चेस्ट एक्स-रे के बाद डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज के लिए फिट घोषित किया है। पोप मंगलवार से रोम के जेमेली अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनके दाहिने फेफड़े के निचले हिस्से को ऑपरेट किया गया था।

वेटिकन के अनुसार पोप रविवार को अपने अपार्टमेंट से सेंट पीटर्स स्क्वायर में मौजूद तीर्थयात्रियों के लिए प्रार्थना का नेतृत्व करेंगे। अस्पताल में भर्ती होने के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी।

हेल्थ अपडेट के मुताबिक, पोप लियो XIV के चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें जेमेली अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। होली सी प्रेस ऑफिस ने पुष्टि की है कि वह शनिवार दोपहर को वेटिकन लौट आएंगे और रविवार को अपने अपार्टमेंट की खिड़की से एंजेलस प्रार्थना करेंगे।

शनिवार सुबह, होली सी प्रेस ऑफिस ने पोप लियो XIV के डॉक्टरों का एक बयान जारी किया। कहा गया कि वह स्वस्थ हैं और जेमेली अस्पताल से उन्हें डिस्चार्ज किया जा सकता है।

डॉ. लुइगी कार्बोन और प्रोफेसर स्टेफानो मार्गारीटोरा ने बताया कि सुबह पोप के ब्लड टेस्ट और चेस्ट का एक्स-रे किया गया, जिससे पुष्टि होती है कि उनकी चिकित्सीय स्थिति उन्हें अस्पताल से जाने की अनुमति देती है।

होली सी प्रेस ऑफिस के एक अलग बयान में कहा गया है कि पोप को शनिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी और वह वेटिकन लौट आएंगे।

बयान में कहा गया, शनिवार सुबह डॉक्टरों के आकलन के बाद, पोप लियो XIV को जेमेली अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी, जहां उनके दाहिने फेफड़े की सर्जरी के लिए उन्हें भर्ती किया गया था। वह दोपहर के समय अस्पताल से निकलेंगे और वेटिकन लौट आएंगे। रविवार को, वह अपने अपार्टमेंट की खिड़की से एंजेलस प्रार्थना का नेतृत्व करेंगे।

प्रेस ऑफिस के अनुसार, वेटिकन लौटने से पहले, पोप जेमेली अस्पताल की 10वीं मंजिल पर इस उद्देश्य के लिए तय किए गए कमरे में मास (प्रार्थना सभा) का आयोजन करेंगे।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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UP Election 2027: बिजनौर की 8 सीटों पर 2027 से पहले कैसा है चुनावी गणित...

UP Election 2027: गंगा किनारे बसा बिजनौर जिला यूपी की उन जगहों में गिना जाता है, जहां लगभग आधी आबादी मुस्लिम समुदाय की है और दलित, जाट, सैनी, चौहान जैसी बिरादरियां हर सीट का हिसाब बदल देती हैं. 2022 में यहां भाजपा और सपा ने चार-चार सीटें जीतीं थीं. मगर यहां मतदान की असली कहानी जीत के अंतर में छिपी है. दरअसल, यहां तीन सीटों का फैसला 300 वोट से भी कम में हुआ और चौथी सीट डेढ़ हजार से कम पर जाकर अटक गई थी. 2027 विधानसभा से पहले आइए आपको बताते हैं बिजनौर जिले की राजनीति की पूरी तस्वीर.

77 प्रतिशत और महिलाएं करीब 60 प्रतिशत पढ़े-लिखे

जनगणना 2011 के मुताबिक बिजनौर जिले की आबादी करीब 36 लाख 83 हजार थी. इसमें पुरुष करीब 19 लाख 21 हजार और महिलाएं करीब 17 लाख 61 हजार दर्ज हुईं थी. यहां हर हजार पुरुषों पर 917 महिलाएं हैं. साक्षरता दर की बात करें तो यहां 68 साक्षरता दर है. जिसमें पुरुष करीब 77 प्रतिशत और महिलाएं करीब 60 प्रतिशत पढ़े-लिखे हैं. जिले की करीब 75 प्रतिशत आबादी गांवों में और 25 प्रतिशत शहरों में रहती है. धर्म के हिसाब से हिंदू आबादी करीब 55 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 43 प्रतिशत है, जबकि सिख समुदाय की हिस्सेदारी करीब 1.4 प्रतिशत है. यही संतुलन जिले की राजनीति की धुरी है.

जिले में आठ सीटें, जिनमें से दो आरक्षित

बिजनौर जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें हैं, जिनके नाम हैं नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर. इनमें नगीना और नहटौर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, बाकी छह सीटें सामान्य श्रेणी की हैं. संसदीय हिसाब से बताएं तो यहां की नगीना, नजीबाबाद, धामपुर, नूरपुर और नहटौर नगीना लोकसभा क्षेत्र में आती हैं, जबकि बिजनौर और चांदपुर बिजनौर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं. आइए आपको अब इन सीटों पर 2022 विधानसभा नतीजों के बारे में शॉर्ट में बताते हैं. 

नजीबाबाद विधानसभा सीट पर 2022 में सपा के तसलीम अहमद ने भाजपा के राजा भारतेंद्र सिंह को करीब 23 हजार 770 वोटों से हराया था. उन्हें करीब 1 लाख 2 हजार से ज्यादा वोट मिले थे.

नगीना (सुरक्षित) सीट पर सपा के मनोज कुमार पारस ने भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह को 26 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. यह जिले की सबसे बड़ी जीतों में रही थी.

बढ़ापुर विधानसभा सीट पर भाजपा के कुंवर सुशांत सिंह ने सपा के कपिल कुमार को 14 हजार 345 वोटों से हराया था. सुशांत सिंह को 1 लाख 100 वोट मिले थे.

धामपुर सीट पर जिले का सबसे करीबी नतीजा यहीं आया था, बता दें यहां भाजपा के अशोक कुमार राणा ने सपा के नईम उल हसन को सिर्फ 203 वोट से हराया था.

नहटौर (सुरक्षित) सीट पर भाजपा के ओम कुमार ने रालोद के मुंशीराम को महज 258 वोट के अंतर से शिकस्त दी थी. 

बिजनौर सीट पर भाजपा की सूची मौसम चौधरी ने रालोद के नीरज चौधरी को 1,445 वोट से हराया थाा. सूची को 97,165 और नीरज को 95,720 वोट मिले थे.

चांदपुर सीट पर सपा के स्वामी ओमवेश ने भाजपा की मौजूदा विधायक कमलेश सैनी को केवल 234 वोट से हराया था. 

नूरपुर सीट पर सपा के राम अवतार सिंह ने भाजपा के सीपी सिंह को 6,065 वोटों से हराया था. 

कभी बसपा थी मजबूत, 2017 में भाजपा ने बदले नतीजे 

जानकारी के मुताबिक बिजनौर लंबे समय तक मुस्लिम-दलित गठजोड़ पर चलने वाली बसपा की राजनीति का केंद्र रहा था. 1989 में मायावती पहली बार यहीं से लोकसभा पहुंची थीं और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बिजनौर और नगीना, दोनों सीटें बसपा के खाते में गई थीं. नजीबाबाद सीट पर 2012 तक बसपा का दबदबा रहा और चांदपुर में भी लगातार दो बार बसपा के इकबाल ठेकेदार विधायक बने थे.

भाजपा ने जिले की आठ में से छह सीटें जीतीं...

2017 की भाजपा लहर में तस्वीर बदली, उस चुनाव में भाजपा ने जिले की आठ में से छह सीटें जीतीं, जबकि सपा सिर्फ नगीना और नजीबाबाद बचा सकी. नजीबाबाद में तसलीम अहमद की 2017 की जीत सिर्फ 2,002 वोट की थी, जो 2022 में बढ़कर करीब 23 हजार हो गई. इसी तरह नहटौर सीट 2008 के परिसीमन के बाद बनी और यहां ओम कुमार का सफर दिलचस्प है. 2012 में वे बसपा से पहले विधायक बने, फिर भाजपा में आकर 2017 और 2022 में चुनाव जीते. नूरपुर की बात करें तो यहां 2017 के भाजपा विधायक के निधन के बाद हुए उपचुनाव में सपा के नईम उल हसन जीते थे और 2022 में सीट सपा के पास ही रही. 

बिजनौर जिले में अब क्या हैं राजनीतिक हालात?

2024 के लोकसभा चुनाव में जिले की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया. दरअसल, यहां नगीना सीट से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के चंद्रशेखर आजाद करीब 1 लाख 51 हजार वोटों से जीते हैं. चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो इस चुनाव में भाजपा को करीब 3 लाख 61 हजार और सपा को सिर्फ 1 लाख 2 हजार वोट मिले. जबकि बसपा 13 हजार पर सिमटकर रह गई. बिजनौर लोकसभा सीट पर एनडीए की सहयोगी रालोद के चंदन चौहान जीते. अब 2027 की तस्वीर कई मायनों में 2022 से अलग होती दिखाई पड़ रही है. जिले में रालोद जो 2022 में सपा के साथ थी अब एनडीए का हिस्सा है इसलिए जाट वोट किस तरफ जाता है. यह बिजनौर और चांदपुर जैसी सीटों पर निर्णायक होगा. उधर, आजाद समाज पार्टी ने ऐलान कर दिया है कि वह 2027 में किसी बड़े दल से गठजोड़ नहीं करेगी और अकेले लड़ेगी. नगीना, नहटौर और नजीबाबाद जैसी दलित-मुस्लिम बहुल सीटों पर इसका असर सपा और भाजपा, दोनों के गणित को बिगाड़ सकता है. 

​बिजनौर की सीटों पर समझें जातीय समीकरण 

- नजीबाबाद सीट पर मुस्लिम वोट बैंक करीब 1 लाख, दलित करीब 50 हजार, जाट करीब 30 हजार, रवा राजपूत करीब 15 हजार, वैश्य और ब्राह्मण करीब 8-8 हजार है.

- नगीना (सुरक्षित) सीट पर मुस्लिम करीब 1.30 लाख, अनुसूचित जाति करीब 80 हजार, सैनी करीब 35 हजार, जाट करीब 20 हजार, कश्यप करीब 10 हजार हैं.

- बढ़ापुर सीट पर मुस्लिम, राजपूत, गुर्जर और दलित वोटरों का मिला-जुला असर रहता है. 

- धामपुर सीट पर ठाकुर, दलित और मुस्लिम मतदाता प्रमुख हैं, चौहान समाज भी करीब 30 हजार बताया जाता है.

- नहटौर (सुरक्षित) सीट पर मुस्लिम करीब 80 हजार, दलित करीब 70 हजार, चौहान और सैनी करीब 35-35 हजार हैं. इसके अलावा इस सीट पर जाट वोट करीब 30 हजार हैं.

- बिजनौर सीट पर मुस्लिम करीब 1 लाख, जाट करीब 70 हजार, दलित करीब 50 हजार, सैनी करीब 25 हजार, राजपूत करीब 22 हजार, कश्यप और पाल करीब 10-12 हजार हैं.

- चांदपुर सीट पर मुस्लिम करीब 1.25 लाख, दलित करीब 48 हजार, जाट करीब 35 हजार, सैनी और चौहान करीब 25-25 हजार, ब्राह्मण करीब 20 हजार हैं.

- नूरपुर सीट पर मुस्लिम करीब 1 लाख, ठाकुर-चौहान समाज की बड़ी हिस्सेदारी (करीब 33 हजार चौहान), दलित करीब 30 हजार, सैनी करीब 17 हजार, त्यागी करीब 15 हजार, यादव करीब 12 हजार हैं.

(FAQ)

Q. बिजनौर जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
A. जिले में कुल आठ सीटें हैं, नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर.

Q बिजनौर जिले में कौन-सी सीटें आरक्षित हैं?
A. नगीना और नहटौर अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हैं, बाकी छह सीटें सामान्य श्रेणी की हैं.

Q. 2022 में बिजनौर जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
A. भाजपा को चार सीटें (बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर) और सपा को चार सीटें (नजीबाबाद, नगीना, चांदपुर, नूरपुर) मिलीं.

Q. किन सीटों पर सबसे करीबी मुकाबला हुआ था?
A. धामपुर में भाजपा सिर्फ 203 वोट से, चांदपुर में सपा 234 वोट से और नहटौर में भाजपा 258 वोट से जीती थी. बिजनौर सीट का अंतर भी महज 1,445 वोट रहा.

Q. बिजनौर जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय का हिस्सा कितना है?
A. जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 55 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 43 प्रतिशत है.

Q. जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
A. लंबे समय तक मुस्लिम-दलित समीकरण के सहारे बसपा मजबूत रही, 2017 में भाजपा ने आठ में से छह सीटें जीतीं और 2022 में सपा और भाजपा चार-चार पर बराबर रहीं.

Q. 2027 से पहले जिले का राजनीतिक माहौल कैसा है?
A. रालोद अब एनडीए में है, चंद्रशेखर आजाद की पार्टी अकेले लड़ने का ऐलान कर चुकी है और बिजनौर सीट पर 2024 में सपा को मामूली बढ़त मिली थी। कुल मिलाकर इस बार भी कई सीटों पर बेहद कड़ा और बहुकोणीय मुकाबला दिखने की संभावना है.

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