मक्का की फसल के बीच उगा रखा था अवैध गांजा, बैतूल पुलिस ने हरे पौधे किए जब्त, आरोपी गिरफ्तार
बैतूल: मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस अवैध नशे के कारोबार पर शिकंजा कसते हुये आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज रही है। इसी क्रम में बैतूल जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुये अवैध गांजे की खेती का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से गांजे के हरे पौधे जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
बता दें कि जिले के बोरदेही थाना पुलिस ने ग्राम बोदुड़ में मक्का की बाड़ी के बीच अवैध रूप से उगाए गये गांजे के 29 हरे पौधे जब्त किए हैं। पुलिस ने मामले में 42 वर्षीय आरोपी भूरा अखण्डे को गिरफ्तार किया है। जब्त गांजे के पौधों का कुल वजन 7.450 किलोग्राम बताया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 44,700 रुपये है।
पुलिस के अनुसार, बोरदेही थाने की पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम बोदुड़ रैय्यत निवासी भूरा अखण्डे ने मक्का की बाड़ी में गांजे के पौधे उगा रखे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हो गई एवं सीधा खेत पर पहुंच गई। पुलिस को तलाशी के दौरान मक्का की फसल के बीच गांजे की हरे पौधे मिले। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से गांजे की फसल को उखाड़कर पौधों को जब्त कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस अधीक्षक ने लोगों से की अपील
गांजे की कार्रवाई के बाद पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने आमजन से अपील की है कि जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती, निर्माण, परिवहन एवं बिक्री जैसी गतिविधियों से वेधियों से दूर रहें। गांजा सहित अन्य मादक पदार्थों का अवैध कारोबार कानूनन अपराध है और इसमें संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि.. यदि किसी व्यक्ति को अपने आसपास अवैध मादक पदार्थों की खेती, बिक्री या तस्करी के संबंध में कोई जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाने अथवा पुलिस को दें। सूचना देने वाले नागरिकों की पहचान गोपनीय रखने का यथासंभव ध्यान रखा जाएगा। नशामुक्त समाज के निर्माण में पुलिस का सहयोग करें।
धार में भी गांजे की खेती का खुलासा
बता दें कि शुक्रवार को धार जिले में भी गांजे की खेती का खुलासा हुआ था। जहां राजगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम चोबारा में आरोपी द्वारा कपास और तुअर की फसल के बीच गांजे के पौधे उगाये गये थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुये मौके से 3345 पौधे बरामद किये। जो करीब 37 क्विंटल वजनी पौधे हैं। बरामद किये गये गांजे के पौधों की अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ 43 लाख रुपये आंकी गई है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है और दूसरा आरोपी फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार आरोपी की तलाश में जुटी है।
*ग्राम बोदुड़ में मक्का की बाड़ी में उगाए जा रहे गांजे के पौधे बरामद, आरोपी गिरफ्तार*
*29 हरे गांजे के पौधे, कुल वजन 7.450 किलोग्राम, जप्त*
*जप्त गांजे के पौधों की अनुमानित कीमत 44,700 रुपये*
#betulpolice #mppolice @BetulProjs @DGP_MP @DigHbd @igp_hbd @mohdept @MPPoliceDeptt https://t.co/oVn4POXqNg— SP BETUL (@SP_BETUL_) October 17, 2026
एफएसएसएआई का प्रस्ताव: 6 महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों में चीनी मिलाने पर लगेगी रोक
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिशुओं के लिए पोषण संबंधी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 में संशोधन का एक मसौदा प्रकाशित किया है। इसमें 6 महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए गए खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026 का उद्देश्य मौजूदा नियामक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशु पोषण उत्पाद उनकी उम्र के हिसाब से जरूरी पोषक तत्वों के आधार पर तैयार किए जाएं, जिसमें जीवन के शुरुआती चरणों के दौरान एडेड शुगर के सेवन को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है।
मौजूदा नियमों में जन्म से लेकर 24 महीने तक के बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के शिशु पोषण उत्पादों की पोषण संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान नियमों के तहत, कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है जबकि सुक्रोज या फ्रुक्टोज को केवल तभी मिलाया जा सकता है जब कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में उनकी आवश्यकता हो और वह भी निर्धारित सीमा के भीतर।
इन्हीं नियमों को आगे बढ़ाते हुए, संशोधन के इस मसौदे में 6 महीने तक के शिशुओं के लिए उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर एक विशेष प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित नियम में कहा गया है कि 6 महीने तक की उम्र के शिशुओं के लिए बनाए गए उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज नहीं मिलाया जाना चाहिए।
जीवन के पहले 6 महीने स्वस्थ विकास और वृद्धि के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधि होते हैं, इसलिए इस दौरान उचित पोषण मिलना विशेष रूप से आवश्यक है। प्रस्तावित प्रतिबंध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशुओं के पोषण उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज की अनावश्यक मात्रा मिलाए बिना इस आयु वर्ग की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जाए। इस कदम का मकसद सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी उन व्यापक कोशिशों को समर्थन देना भी है, जो बच्चों के शुरुआती जीवन में अतिरिक्त शर्करा के सेवन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए की जा रही हैं। इसमें बचपन में मोटापे और उससे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम कारकों को कम करना भी शामिल है।
यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी उन स्थापित सिफारिशों को और मजबूत करती है, जो जीवन के पहले छह महीनों में केवल स्तनपान कराने को बढ़ावा देती हैं। शिशुओं के पोषण उत्पादों के लिए मानकों को सख्त बनाकर, यह प्रस्तावित संशोधन बच्चों को सही तरीके से आहार देने की प्रथाओं को समर्थन देता है। साथ ही, यह निर्माताओं को ऐसे उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो छोटे शिशुओं की विशिष्ट पोषण संबंधी जरुरतों को प्राथमिकता देते हैं।
इस मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया है। इसमें हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। ये सुझाव उस तारीख से 60 दिनों के भीतर दिए जा सकते हैं, जिस दिन इस अधिसूचना वाली आधिकारिक राजपत्र की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले एफएसएसएआई तय समय सीमा के भीतर प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करेगा।
--आईएएनएस
एएसएच/पीएम
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