IIM लखनऊ में रिकॉर्डतोड़ समर प्लेसमेंट, 16.5% उछला एवरेज पैकेज, हर महीने 3.95 लाख का स्टाइपेंड
IIM Lucknow Summer Placement Report: आईआईएम लखनऊ ने समर प्लेसमेंट रिपोर्ट 2025-26 जारी कर दी है. PGP बैच के लिए सबसे ज्यादा स्टाइपेंड 3.95 लाख रुपये महीना और एवरेज स्टाइपेंड 1.67 लाख रुपये महीना दर्ज किया गया है. कंसल्टिंग और आईटी सेक्टर वालों को सबसे ज्यादा ऑफर्स मिले.
Donald Trump की पाबंदियों से छूट के बाद भारत में Russian Oil का आयात जारी रहेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों पर एक नए कानून के तहत अनिवार्य प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट दिए जाने के बाद विश्लेषकों का मानना है कि भारत मौजूदा स्तर के करीब ही रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखेगा। ट्रंप ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट के तहत लगाए जाने वाले प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देते हुए शुक्रवार देर रात एक कार्यकारी आदेश जारी किया। यह कदम कानून लागू करने की 30 दिवसीय समयसीमा खत्म होने से ठीक एक दिन पहले उठाया गया।
उन्होंने इस कानून पर 18 सितंबर को हस्ताक्षर किए थे। यह छूट केवल भारत के लिए नहीं है और इससे चीन को भी लाभ मिल सकता है। यह आदेश प्रशासन को बाद में इस पर पुनर्विचार करने का अधिकार भी देता है।
जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों से पता चलता है कि भारत इस साल औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) के साथ समुद्री मार्ग से रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक रहा है, जो चीन (12 लाख बीपीडी) से अधिक है। इटली, तुर्किये और नीदरलैंड शीर्ष पांच देशों में शामिल हैं। ऊर्जा शोध संस्था केपलर को उम्मीद है कि अक्टूबर में आयात 18-19 लाख बीपीडी के आसपास बना रहेगा।
हालांकि, यह मात्रा साल के मध्य के उच्चतम स्तरों से काफी कम है। भारतीय आयात जून में 26 लाख बीपीडी और जुलाई में 25.7 लाख बीपीडी के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। विश्लेषकों का कहना है कि इस छूट के साथ तेल रिफाइनरी कंपनियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखने की संभावना है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि इस विधेयक के तहत भारत को 100 प्रतिशत तक के संभावित शुल्कों का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि वह रूसी तेल के शीर्ष पांच वैश्विक खरीदारों में शामिल है। अर्थशास्त्री ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य रूसी आपूर्ति को बाजार से बाहर होने से रोकना है, ताकि अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले वैश्विक तेल कीमतों में और तेजी न आए। अरोड़ा ने कहा, यह कदम भारत के लिए धारणा के स्तर पर सकारात्मक होना चाहिए।
हालांकि, हम रूस के प्रति ट्रंप के बार-बार बदलते रुख और अपने अब तक के कार्यकाल में भारत के प्रति उनके सामान्य विरोध को ध्यान में रखते हुए आगाह करते हैं कि मध्यावधि चुनावों के बाद इस मामले में नए सिरे से फैसले लिए जा सकते हैं।
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