होर्मुज में बारूदी सुरंग से टकराकर सुपरटैंकर, 20 लाख बैरल तेल से लटे जहाज में जोरदार विस्फोट
US Iran War: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा कच्चे तेल से लदा एक विशाल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंग की चपेट में आ गया. ईरान का दावा है कि इस जहाज पर 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ था. कथित घटना के बाद टैंकर में विस्फोट हो गया और उसमें आग लग गई. हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी ने पुष्टि नहीं की है.
बिना इजाजत वाले रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था जहाज
ईरान के सरकारी मीडिया संस्थान प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने आरोप लगाया कि टैंकर ऐसे समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जिसे तेहरान की मंजूरी नहीं मिली थी. ईरानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि जहाज ने अपनी वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए पोजिशनिंग और रडार सिस्टम बंद कर दिए थे.
इस घटना के बाद ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले अन्य जहाजों को भी चेतावनी दी है. IRGC के मुताबिक, इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को ईरान के नियमों के तहत बंद रखा गया है. संगठन ने चेतावनी दी कि निर्देशों की अनदेखी करने वाले जहाजों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
Oil Tanker explodes in Strait of Hormuz after hitting naval mine: IRGC
— Press TV ???? (@PressTV) October 17, 2026
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होर्मुज में बढ़ता तनाव, समुद्री कारोबार पर संकट
होर्मुज में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पहले से अधिक जोखिम भरी हो गई है. अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों और नाकेबंदी के बीच तेहरान ने भी अपनी कार्रवाई तेज की है.
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से होर्मुज बेहद अहम है. संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया के समुद्री रास्तों से होने वाले तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) के कुल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता था. ऐसे में यहां लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.
बता दें कि इसी साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से तेहरान ने इस समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है. ईरान समुद्री यातायात को सीमित करके वाशिंगटन पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है.
तेल की कीमतों और अमेरिकी राजनीति पर दबाव बनाने की कोशिश
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि तेहरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के खिलाफ नई रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीति का एक उद्देश्य तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखना और अमेरिका के मध्यावधि चुनावों पर प्रभाव डालना है. इस संकट के दौरान केवल तेल टैंकर ही निशाने पर नहीं रहे हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, मालवाहक और कंटेनर जहाजों को भी हमलों, रोक-टोक और डूबने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा है. इससे समुद्री परिवहन कंपनियों, बीमा क्षेत्र और वैश्विक सप्लाई चेन के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं.
सरकार ने चीनी से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक, कमजोर मानसून से उत्पादन प्रभावित
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से सरकारी ईंधन कंपनियों को चीनी और गन्ने से बनने वाले प्रमुख कच्चे माल से तैयार एथेनॉल की खरीद रोकने का निर्देश दिया है।
टेंडर दस्तावेज के अनुसार, मौसम शुष्क रहने से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने के बाद यह निर्देश एक नवंबर से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष से लागू होगा।
सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने सरकार के नए निर्देशों का हवाला देते हुए नए आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद का संयुक्त टेंडर जारी किया है।
दस्तावेज के अनुसार, “इस मात्रा-आधारित टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल के लिए कोई प्रस्ताव नहीं मांगा गया है।”
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक भारत इस साल पिछले साल की तुलना में कम उत्पादन की स्थिति का सामना कर रहा है। अल नीनो के प्रभाव के कारण एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून दर्ज किया गया, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हुई।
भारत आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और अनाज का इस्तेमाल लगातार बढ़ा रहा है।
नए टेंडर में भाग लेने वाले आपूर्तिकर्ता सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से उत्पादित एथेनॉल की पेशकश कर सकते हैं।
इसके अलावा, सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी को (नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त) अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान बेचने की अनुमति दी है।
सरकारी आदेश के अनुसार, अगर कोई चीनी मिल अक्टूबर के दौरान 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह इस मात्रा को अक्टूबर और नवंबर में बेच सकती है। यह बिक्री नियमित मासिक रिलीज कोटे के तहत आवंटित मात्रा के अतिरिक्त होगी।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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