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रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर संगीतकार देवा का निधन:75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, 400 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत

दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार देवा का शनिवार, 17 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हो गया। वे 75 साल के थे। देवा ने सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर इंट्रो म्यूजिक को अपनी धुनों से खास पहचान दी थी। करीब चार दशक के करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा की 400 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया। उनके निधन से दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे संगीतकार देवा को शनिवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद चेन्नई के सूर्या हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उपचार के बावजूद 75 वर्षीय देवा को नहीं बचाया जा सका। वे उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे। रजनीकांत की फिल्मों के इंट्रो म्यूजिक से मिली खास पहचान देवा का पूरा नाम देवनासन चोक्कालिंगम था। उन्हें तमिल फिल्म इंडस्ट्री में ‘थेनिसाई थेंद्रल’ के नाम से जाना जाता था। इस उपाधि का अर्थ है ‘मधुर संगीत की बयार’। रजनीकांत की फिल्मों में सुपरस्टार के नाम के साथ बजने वाली मशहूर धुन को तैयार करने का श्रेय भी देवा को जाता है। साल 1992 में आई फिल्म ‘अन्नामलाई’ के संगीत ने रजनीकांत की स्क्रीन इमेज को एक नई पहचान दी। इसके बाद फिल्म ‘बाशा’ में भी देवा के संगीत ने उनके स्टारडम को और मजबूत किया। रजनीकांत की फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली यह धुन दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई। देवा ने रजनीकांत के साथ ‘अरुणाचलम’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। उनकी धुनों में जोश, दमदार बीट्स और लोक संगीत का ऐसा मेल था, जो रजनीकांत के पर्दे पर आने के अंदाज के साथ खूब जंचता था। 1996 में 36 फिल्मों में दिया संगीत देवा का करियर करीब चार दशक लंबा रहा। इस दौरान उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। साल 1996 उनके करियर के सबसे व्यस्त वर्षों में से एक था। इस साल उन्होंने अकेले 36 फिल्मों में संगीत दिया। तमिल सिनेमा के अलावा उन्होंने तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी काम किया। उनकी खासियत यह थी कि वे लोक संगीत की धुनों को लोकप्रिय फिल्मी संगीत में ढालने में माहिर थे। उन्होंने चेन्नई की गलियों में लोकप्रिय गाना संगीत की शैली ‘गाना’ को मुख्यधारा के तमिल सिनेमा में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एमएस विश्वनाथन ने दिया था ‘थेनिसाई थेंद्रल’ नाम देवा को ‘थेनिसाई थेंद्रल’ की उपाधि दिग्गज संगीतकार एमएस विश्वनाथन ने 1985 में दी थी। चेन्नई के तिरुवेरकाडु मंदिर में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान उन्हें यह नाम मिला था। उस समय देवा भक्ति संगीत के कई एल्बम तैयार कर चुके थे। एमएस विश्वनाथन ने इस दौरान फिल्म इंडस्ट्री से देवा को फिल्मों में काम देने की अपील भी की थी। उन्होंने देवा की प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा था कि उनमें फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता है। इस प्रोत्साहन ने देवा के करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘आसई’ और ‘काधल कोट्टई’ जैसी फिल्मों में भी दिया संगीत देवा ने अपने करियर में कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘आसई’, ‘काधल कोट्टई’, ‘नेरुक्कु नेर’, ‘वाली’, ‘अव्वई षण्मुखी’, ‘खुशी’ और ‘पंचतंत्रम’ शामिल हैं। उनके संगीत में मेलोडी के साथ लोक संगीत और दमदार बैकग्राउंड स्कोर का खास मेल देखने को मिलता था। यही वजह रही कि उन्होंने 1990 के दशक में तमिल फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई। खुशबू सुंदर और विजय सेतुपति ने जताया दुख देवा के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों ने शोक जताया। अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वह करीब 10 दिन पहले ही देवा से मिली थीं। उन्होंने लिखा कि कुछ दिन पहले तक हंसते-मुस्कुराते और आशीर्वाद देते नजर आने वाले देवा का अचानक चले जाना बेहद दुखद है। खुशबू ने उन्हें मधुर संगीत और सरल स्वभाव वाला इंसान बताते हुए कहा कि संगीत और सिनेमा की दुनिया में उनका योगदान बहुत बड़ा है। अभिनेता विजय सेतुपति ने भी देवा के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि संगीतकार ने तमिल सिनेमा की संगीत दुनिया पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके गीत और संगीत हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेंगे। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने संगीतकार और गायक देवा के निधन पर गहरा दुख जताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एर सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से भारतीय फिल्म और संगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि देवा के सदाबहार गीत और उनकी विनम्रता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। AICWA ने दिवंगत आत्मा की शांति और उनके परिवार व प्रशंसकों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

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US से अस्थायी छूट के बदले स्थायी रियायतें न दे भारत, GTRI ने दी Energy Security की सलाह

थिंक टैंक जीटीआरआई ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट (एसआरआईए) के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से दी गई छूट भारत को केवल अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन इससे कोई स्थायी निश्चितता नहीं मिलेगी। थिंक टैंक ने कहा कि ऐसे में नयी दिल्ली को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करनी चाहिए और वाणिज्यिक शर्तों पर तेल खरीदना जारी रखना चाहिए। 

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले से भारत को रूसी तेल खरीद से जुड़े 100 प्रतिशत तक के संभावित अतिरिक्त शुल्कों के खतरे से राहत मिली है। इसने आगे कहा, लेकिन यह राहत वापस ली जा सकती है। वाशिंगटन कभी भी इन शुल्कों को बहाल कर सकता है, जिससे भारत और अन्य खरीदारों के लिए भविष्य में अमेरिकी कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। जीटीआरआई ने यह भी कहा कि एसआरआईए एक कानून बना हुआ है, जिससे वाशिंगटन द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में रियायतें हासिल करने के लिए शुल्क की धमकी को फिर से इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। 

थिंक टैंक ने बताया कि भारतीय तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई के 51 प्रतिशत से गिरकर अगस्त में 44 प्रतिशत रह गई, क्योंकि ऊंची कीमतों के बावजूद भारत ने अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से अधिक खरीदारी की। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, भारत के लिए यह छूट कुछ राहत जरूर देती है, लेकिन कोई स्थायी निश्चितता नहीं। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करनी चाहिए, वाणिज्यिक शर्तों पर तेल खरीदना चाहिए और नए सिरे से पड़ने वाले अमेरिकी दबाव के लिए तैयार रहना चाहिए। 

अस्थायी शुल्क राहत के चलते स्थायी व्यापार रियायतें नहीं देनी चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि यह छूट अमेरिकी व्यापार नीति में मौजूद अनिश्चितता को उजागर करती है, जहां वाशिंगटन पहले दंडात्मक कार्रवाई की धमकी देता है और फिर जब उन्हें लागू करना असुविधाजनक हो जाता है तो पीछे हट जाता है। उन्होंने कहा कि एसआरआईए 18 सितंबर को कानून बना, लेकिन नौ अक्टूबर को अमेरिका ने खुद रूसी डीजल खरीदने के लिए समझौता कर लिया।

 ऐसे में दूसरे खरीदारों को दंडित करना अमेरिका के लिए कठिन हो गया था। श्रीवास्तव ने कहा, संदेश बिल्कुल स्पष्ट है - अमेरिकी हित यह तय करते हैं कि दंड कब लागू होगा। चीन मुकाबला कर सकता है। जब तक भारत यह एहसास नहीं कराता है कि दबाव बनाने की एक कीमत चुकानी पड़ती है, तब तक उस पर बार-बार दबाव का जोखिम बना रहेगा।

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  Sports

टेस्ट में सबसे कम उम्र में तिहरा शतक जड़ने वाले 5 बल्लेबाज, 68 साल से नहीं टूटा विश्व कीर्तिमान

5 Youngest player to score triple hundred in Test: टेस्ट क्रिकेट में सबसे कम उम्र में तिहरा शतक लगाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के दिग्गज गैरी सोबर्स के नाम है, जिन्होंने 21 साल 213 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी. इस लिस्ट में सर डॉन ब्रैडमैन दूसरे और इंग्लैंड के लेन हटन तीसरे स्थान पर हैं. हनीफ मोहम्मद और ब्रायन लारा ने भी कम उम्र में तिहरा शतक जड़कर क्रिकेट जगत में नया इतिहास रचा था. Sun, 18 Oct 2026 17:47:48 +0530

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Bihar News: महाष्टमी पर निशांत कुमार ने ठाकुरबाड़ी मंदिर में की पूजा #nishantkumar #biharnews #short #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-18T14:11:32+00:00

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