अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में वेनेजुएला से जुड़े एक और तेल टैंकर को रोका
वॉशिंगटन, 15 फरवरी (आईएएनएस)। पेंटागन ने रविवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में वेनेजुएला से जुड़े एक अन्य तेल टैंकर को रोका और उस पर सवार हो गई।
पेंटागन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान में कहा कि वेरोनिका III नामक पोत को अमेरिकी अधिकारियों ने कैरेबियन सागर से हिंद महासागर तक ट्रैक किया और फिर उसे रोककर निरीक्षण किया। बयान में कहा गया है, रात भर में, अमेरिकी सेना ने इंडोपाकॉम के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में बिना किसी घटना के वेरोनिका III पर कार्रवाई की।
अमेरिका का कहना है कि यह जहाज राष्ट्रपति के आदेश के तहत लगाए गए प्रतिबंधों से बचकर निकलने की कोशिश कर रहा था।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र किसी भी अवैध गतिविधि के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है।
बताया गया कि यह जहाज पनामा के झंडे वाला तेल टैंकर है और इस पर ईरान और वेनेजुएला से जुड़े तेल प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज करीब 19 लाख बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल लेकर जा रहा था और 2023 से रूस, ईरान और वेनेजुएला के तेल परिवहन से जुड़ा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिसंबर में वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर “पूरी तरह का ब्लॉकेड” लगाने का आदेश दिया था।
पिछले सप्ताह भी अमेरिकी सेना ने एक और टैंकर को हिंद महासागर में रोककर जांच की थी।
अमेरिका का कहना है कि वह जमीन, हवा और समुद्र—हर जगह प्रतिबंधों को लागू करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर में वेनेजुएला में आने या जाने वाले सभी अमेरिकी प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया था।
3 जनवरी को अमेरिका की कार्रवाई और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद से यह प्रतिबंध जारी है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने रविवार को एक पोस्ट में कहा, अंतरराष्ट्रीय जल कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। जमीन, हवा या समुद्र से, हम आपको ढूंढ लेंगे और न्याय दिलाएंगे। रक्षा विभाग अवैध तत्वों और उनके सहयोगियों को समुद्री क्षेत्र में आने-जाने की आजादी नहीं देगा।
मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म के मुताबिक, वेरोनिका III 3 जनवरी, 2026 को वेनेजुएला से निकला था, उसी दिन वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ा गया था, और इसमें लगभग 19 लाख बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल था।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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यूक्रेन के पूर्व ऊर्जा मंत्री गिरफ्तार, 'मिडास' भ्रष्टाचार मामले में देश छोड़ने की कर रहे थे कोशिश
यूक्रेन में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में पूर्व ऊर्जा मंत्री को देश छोड़ने की कोशिश करते समय हिरासत में लिया गया है. यह कार्रवाई यूक्रेन की राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी NABU (नेशनल एंटी-करप्शन ब्यूरो ऑफ यूक्रेन) ने की है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह गिरफ्तारी तथाकथित “मिडास केस” के तहत की गई है, जो देश के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े बड़े भ्रष्टाचार की जांच है.
क्या है पूर्व ऊर्जा मंत्री का नाम
NABU ने मंत्री का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और कहा है कि जांच की शुरुआती कार्रवाई कानून के अनुसार जारी है. “मिडास केस” में आरोप है कि ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा के लिए नियुक्त ठेकेदारों से अवैध कमीशन (किकबैक) लिया गया. इस घोटाले के कारण पहले एक मौजूदा और एक पूर्व ऊर्जा मंत्री को राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के अनुरोध पर इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि दोनों ने किसी भी गलत काम से इनकार किया था.
Former Ukrainian Energy Minister detained in 'Midas' corruption case while attempting to leave country
— ANI Digital (@ani_digital) February 15, 2026
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क्या हैं आरोप
जांच एजेंसियों का दावा है कि लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि सरकारी कंपनियों के जरिए हड़प ली गई. इनमें एनरगोएटम भी शामिल है, जो यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन करती है. आरोप है कि महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा मजबूत करने के नाम पर कंपनियों को भुगतान किया गया, लेकिन धन का दुरुपयोग हुआ.
कई स्थानों पर NABU ने की थी छापेमारी
जांच के दौरान NABU ने कई स्थानों पर छापेमारी भी की. हाल के वर्षों में यूक्रेन में भ्रष्टाचार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. 2023 से NABU कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच कर रहा है. जनवरी 2024 में यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) ने सैन्य हथियार खरीद में लगभग 40 मिलियन डॉलर के कथित घोटाले का खुलासा किया था.
जिनेवा में यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच होगी बैठक
इसी बीच राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका के अधिकारियों स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर के साथ जिनेवा में होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता पर चर्चा की. रूसी मीडिया के अनुसार 17-18 फरवरी को जिनेवा में यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच बैठक होगी. जेलेंस्की ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात कर रूस के हमलों और ऊर्जा संसाधनों पर उनके प्रभाव पर चर्चा की. उन्होंने उम्मीद जताई कि जिनेवा वार्ता सकारात्मक और परिणामदायक होगी.
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