बागेश्वर में चरवाहों का जीवन प्रकृति और पशुओं से जुड़ा, मौसम के अनुसार बदलते हैं ठिकाने, ऊन व अन्य उत्पाद से चलाते हैं जीविका
उत्तराखंड के बागेश्वर क्षेत्र में पहाड़ी चरवाहे मौसम के अनुसार अपने ठिकाने बदलते हैं। भेड़-बकरी पालन और पशुओं से मिलने वाले उत्पादों के सहारे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. पहाड़ों में सर्दियों के दौरान ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो जाता है. वहीं, गर्मियों में ऊंचे बुग्यालों में प्राकृतिक घास और पानी की उपलब्धता बढ़ने पर चरवाहे अपने पशुओं के साथ इन क्षेत्रों की ओर निकल पड़ते हैं. आमतौर पर अप्रैल से सितंबर के बीच उनका ठिकाना ऊंचाई वाले चरागाहों में होता है. इन दुर्गम इलाकों में चरवाहे अस्थायी तंबुओं या पत्थरों से बनी छोटी चन्नियों में रहते हैं. कई बार उन्हें खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ती है. दिनभर पशुओं को चराने, पानी की व्यवस्था करने और झुंड को सुरक्षित रखने में उनका समय गुजरता है.
लखनऊ में बनेगा यूपी का पहला ई-बस पोर्ट, 265 करोड़ होंगे खर्च, जानें कहां और कैसे चलेंगी नई बसें
लखनऊ को मिलेगा यूपी का पहला हाई-टेक ई-बस पोर्ट, 75 प्लेटफॉर्म होंगे. 1725 नई इलेक्ट्रिक बसें भी खरीदी जाएंगी, जिससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर होगा.
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