भारतीय शेयर बाजार में तेजी से एफआईआई फिर बने खरीदार
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 1,166 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया। इसकी वजह बाजार में तेजी लौटना था। यह जानकारी एनालिस्ट की ओर से शनिवार को दी गई।
हालांकि, साप्ताहिक आधार पर एफआईआई विक्रेता बने हुए हैं और बीते सप्ताह उन्होंने 8,991 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी, जो कि पिछले सप्ताह की 30,294 करोड़ रुपए की बिकवाली के मुकाबले काफी कम थी, जो कि विदेशी निवेशकों के रुझान में बदलाव को दिखाती है।
दूसरी तरफ, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) शुद्ध खरीदार बने हुए हैं और बीते हफ्ते उन्होंने 7,813 करोड़ रुपए इक्विटी में निवेश किए। हालांकि, शुक्रवार को उन्होंने 3,661 करोड़ रुपए की बिकवाली थी।
इस महीने की शुरुआत से अब तक (16 अक्टूबर तक) एफआईआई 48,769 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि डीआईआई ने इस दौरान 48,168 करोड़ रुपए का निवेश किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की बिकवाली में काफी कमी आना और शुक्रवार को फंड फ्लो का उलटना यह संकेत देता है कि बाजार का सेंटिमेंट स्थिर हो रहा है, हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रिकवरी को अभी भी जोखिम में डाल सकती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि निवेशक ब्रेंट क्रूड की कीमतों के रुझान और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, घरेलू स्तर पर ध्यान वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही की कमाई और सप्ताह के मध्य में आने वाले आरबीआई एमपीसी के मिनट्स पर है।
पिछले सप्ताह बेंचमार्क सूचकांकों में जोरदार वापसी देखने को मिली, जिसमें निफ्टी ने लगातार दूसरे सप्ताह अपनी रिकवरी जारी रखी। रुपए में मजबूती और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में नरमी से बाजार के सेंटिमेंट को सहारा मिला, हालांकि ब्रेंट क्रूड का 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहना महंगाई और बाहरी जोखिमों की चिंताओं को बनाए रखे हुए है।
--आईएएनएस
एबीएस
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Explainer: एक ही खाने से कैसे बिगड़ सकती है पूरे परिवार की जान? ग्रेटर नोएडा की घटना के बीच समझें फूड पॉइजनिंग का खतरा...
Food Poisoning: ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा क्षेत्र में एक ही परिवार के पांच लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मृतकों में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल हैं. शुरुआती जानकारी के मुताबिक परिवार ने मौत से पहले रात में चाय और नूडल्स खाए थे. इसके बाद खाने से जुड़ी बीमारी की आशंका जताई गई. लेकिन मौत की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है. पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है.
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या दूषित खाना एक साथ कई लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है? क्या फूड पॉइजनिंग जानलेवा हो सकती है और इससे बचने के लिए घर में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? आइए समझते हैं.....
Uttar Pradesh | Noida Police say, "On 17.10.2026, the Rabupura Police Station received information that five members of a single family—residing in the village of Nagla Shri Padam—had died. The deceased are: 1. Mahesh (son of Krishna), aged 37; 2. Lalita (wife of Mahesh), aged…
— ANI (@ANI) October 17, 2026
फूड पॉइजनिंग क्या है और यह कैसे होती है?
फूड पॉइजनिंग ऐसी बीमारी है जो दूषित भोजन या पेय पदार्थ के सेवन से हो सकती है. खाने में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या उनके बनाए टॉक्सिन यानी विषैले पदार्थ शरीर में पहुंचकर बीमारी पैदा कर सकते हैं. इसके लक्षण हल्के पेट दर्द से लेकर गंभीर उल्टी-दस्त और शरीर में पानी की कमी तक हो सकते हैं. कुछ संक्रमणों में किडनी को नुकसान जैसी गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं. दुर्लभ मामलों में बीमारी जानलेवा बन सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दूषित भोजन से 200 से अधिक तरह की बीमारियां हो सकती हैं. हालांकि, हर बार खाना खाने के बाद तबीयत बिगड़ने का मतलब फूड पॉइजनिंग ही हो ऐसा जरूरी नहीं है.
क्या एक ही खाने से कई लोगों की जान जा सकती है?
अगर किसी भोजन में गंभीर बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु या विषैले पदार्थ मौजूद हों तो उसे खाने वाले कई लोग एक साथ बीमार पड़ सकते हैं. बीमारी कितनी गंभीर होगी यह दूषित पदार्थ के प्रकार, उसकी मात्रा और व्यक्ति की उम्र व स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. मिसाल के तौर पर, यदि एक ही बर्तन में बना खाना दूषित हो जाए और परिवार के कई सदस्य उसे खाएं तो सभी के बीमार होने का खतरा हो सकता है. लेकिन एक ही खाना खाने वाले हर व्यक्ति पर उसका असर समान हो यह जरूरी नहीं है.
खाने में बैक्टीरिया, वायरस या टॉक्सिन कैसे पहुंचते हैं?
कई बार भोजन देखने, सूंघने या चखने में सामान्य लगता है. फिर भी उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं. आइए आपको इसके पीछे कुछ आम कारण क्या होते हैं ये बताते हैं.
- गंदे हाथ और बर्तन, यदिन खाना बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान न रखा गया हो तो संक्रमण फैल सकता है.
- दूषित पानी, डॉक्टरों के मुताबिक खाना बनाने या सब्जियां धोने में इस्तेमाल हुआ संक्रमित पानी बीमारी की एक वजह बन सकता है.
- गलत तरीके से स्टोर करना, डाइटिशियन बताते हैं कि अगर पका हुआ खाना लंबे समय तक सामान्य तापमान पर छोड़ते हैं तो उसमें कुछ बैक्टीरिया बन जाते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक होते हैं.
- अधपका भोजन, खासतौर पर मांस, अंडे और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों को पर्याप्त रूप से न पकाने पर संक्रमण का खतरा बना जाता है.
- क्रॉस-कंटैमिनेशन, डॉक्टरों के मुताबिक कच्चे भोजन के संपर्क में आए हाथ, चाकू या कटिंग बोर्ड से तैयार खाना दूषित हो सकता है. जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा होता है.
क्या मैगी या नूडल्स खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है?
इंस्टेंट नूडल्स अपने आप में फूड पॉइजनिंग का प्रमाण नहीं हैं. लेकिन किसी भी खाद्य पदार्थ से जुड़ा जोखिम उसकी गुणवत्ता, सामग्री, तैयारी और स्टोरेज के तरीके पर निर्भर करता है. बता दें यदि नूडल्स बनाने में दूषित पानी इस्तेमाल किया गया हो, कोई सामग्री खराब हो या खाना बनाने के दौरान संक्रमण फैल जाए तो बीमारी का खतरा हो सकता है. ग्रेटर नोएडा मामले में परिवार ने आखिरी बार चाय और नूडल्स खाए थे.
#WATCH | Noida, UP: Greater Noida DCP Shrawan Kumar Singh says, "This incident occurred within the jurisdiction of the Rabupura police station; it is a very tragic event. Five members of the same family—a husband, his wife, and their three children—have died. They had a meal at… https://t.co/gCz16YTqzX pic.twitter.com/qMRDpZIN6L
— ANI (@ANI) October 17, 2026
फूड पॉइजनिंग के कौन-से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
डॉक्टरों के मुताबिक फूड पॉइजनिंग के आम लक्षणों में उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन, मतली और बुखार शामिल हैं. लक्षण कुछ घंटों में भी दिखाई दे सकते हैं और कुछ संक्रमणों में कई दिन बाद भी शुरू हो सकते हैं. इसके अलावा ये संकेत दिखें तो हमें तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए.
- बार-बार उल्टी होना.
- मल में खून आना.
- तेज बुखार या लगातार दस्त होना.
- पेशाब बहुत कम आना, मुंह सूखना या खड़े होने पर चक्कर आना.
- असामान्य सुस्ती, भ्रम या बेहोशी जैसी स्थिति.
बच्चों और बुजुर्गों में खतरा ज्यादा क्यों हो सकता है?
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती है. उल्टी और दस्त के कारण उनके शरीर में पानी और जरूरी लवण तेजी से कम हो सकते हैं. घर में खाना बनाते और स्टोर करते समय हमें खाना बनाने और खाने से पहले साबुन से हाथ धोने चाहिए. इसके अलावा साफ बर्तन और सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल करें, कच्चे और पके भोजन को अलग रखें और भोजन को अच्छी तरह से पकाएं.
ग्रेटर नोएडा मामले में जांच से क्या पता चलना बाकी है?
पुलिस के अनुसार रबूपुरा क्षेत्र में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत के मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि उनकी मौत किस कारण से हुई. शुरुआती जानकारी में खाने से जुड़ी बीमारी की आशंका जताई गई है, लेकिन केवल आखिरी बार खाए गए भोजन के आधार पर कारण तय नहीं किया जा सकता. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और जरूरत पड़ने पर भोजन या पानी के नमूनों की जांच से स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है.
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