Responsive Scrollable Menu

एक परिवार के पांच लोगों की मौत से दहला ग्रेटर नोएडा, जांच में जुटी पुलिस

ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा थाना क्षेत्र के नगला श्रीगोपाल गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. मृतकों में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल हैं. घटना की जानकारी सामने आने के बाद गांव में हड़कंप मच गया. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी.

मृतकों में तीन मासूम बच्चे भी शामिल

मृतकों की पहचान महेश (36), उनकी पत्नी ललिता (34), बेटे लड्डू (12), बेटी मिस्टी (8) और सबसे छोटी बेटी साक्षी (4) के रूप में हुई है. एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से स्थानीय लोग स्तब्ध हैं.

जहर खाने की आशंका, पुलिस कर रही जांच

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मामला जहरीला पदार्थ खाने से जुड़ा हो सकता है. हालांकि, मौत की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है. पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है. इसके लिए स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आएगी मौत की वजह

घटना की सूचना मिलने के बाद रबूपुरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस का कहना है कि मौत के कारणों का पता जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा. फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है.

ये भी पढ़ें: कश्मीर में LoC पर घुसपैठ की साजिश नाकाम! सेना ने कई आतंकियों को घेरा, सर्च ऑपरेशन जारी

 

Continue reading on the app

Shardiya Navratri 2026 Day 7: कालरात्रि माता की पौराणिक कहानी क्या है? जानें कैसे बनी सातवीं देवी

Shardiya Navratri 2026 Day 7: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन पर दुर्गा माता के सातवें स्वरूप देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है. आज 17 अक्टूबर 2026 को सप्तमी है. माता कालरात्रि को दुर्गा मां का उग्र स्वरूप माना जाता है. हालांकि, माता के हर स्वरूप को भक्तों के लिए शुभ माना जाता है. इसलिए, माता का नाम शुभंकरी भी है. दुर्गा मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा के साथ-साथ उनकी कथा का पाठ करें. उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर आज जरूर पढ़ें कालरात्रि माता की पौराणिक कथा. पढ़ें यहां.

कैसा होता है मां कालरात्रि का स्वरूप? 

मां दुर्गा की सातवीं शक्ति माता कालरात्रि कहा जाता है. इनके शरीर का रंग अंधकार जैसा काला होता है. इनके बाल बिखरे हुए होते हैं और इन्होंने गले में विद्युत की माला पहनी होती है. कालरात्रि माता की तीन नेत्र होते हैं. इनकी उत्पत्ति अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने के लिए हुआ था. काल से भी रक्षा करने वाली इस देवी को शक्ति का महास्वरूप कहते हैं. उनके तीन नेत्र तीनों ब्रह्मांड पर अपनी दृष्टि रखती है. ये गधे पर सवार रहती हैं.

ये भी पढ़ें- Shardiya Navratri 2026 Day 7: आज से दो दिन रहेगी शारदीय नवरात्र की सप्तमी, जानें कब है दुर्गा अष्टमी और नवमी

देवी कालरात्रि की पौराणिक कथा (Read Kaalratri Mata Story in Hindi)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कालरात्रि नाम का अर्थ है रात्रि की रक्षक, जिनका रंग काला होता है. कालरात्रि का अर्थ है काला और रात्रि का अर्थ है रात. इसीलिए देवी कालरात्रि को रात्रि की रक्षक कहते हैं. देवी कालरात्रि और उनके जन्म की कई लोक कथाएं प्रचलित हैं. ऐसा माना जाता है कि एक बार पार्वती मां स्नान कर रही थीं और देवता उनसे शुंभ और निशुंभ नामक राक्षसों से निपटने में मदद के लिए प्रार्थना मांगते हुए आए.

ऐसे हुई थी मां कालरात्रि की उत्पत्ति

क्योंकि पार्वती माता तुरंत उत्तर नहीं दे सकती थीं, इसलिए उन्होंने इस कार्य के लिए अंबिका का निर्माण किया. जब शुंभ और निशुंभ ने अंबिका के बारे में सुना, तो उन्होंने अपने प्रतिनिधियों चंड और मुंड को अंबिका से लड़ने के लिए भेज दिया. अंबिका ने चंड को लेने का फैसला किया और मुंड को लेने के लिए काली को बनाया. चंड और मुंड दोनों मारे गए और अंबिका को चंडी के रूप में जाना जाने लगा और काली को चामुंडा के रूप में जाना जाने लगा. जब चंड और मुंड की मृत्यु का समाचार शुंभ और निशुंभ तक पहुंचा, तो उन्होंने काली से लड़ने के लिए रक्तबीज को भेजने का फैसला लिया, जो और भी ज्यादा भयंकर राक्षस था. रक्तबीज को यहा वरदान प्राप्त था कि यदि उसकी रक्त की बूंद धरती पर गिरती है, तो प्रत्येक बूंद से एक नया और अधिक शक्तिशाली राक्षस उत्पन्न हो जाएगा.

क्यों पड़ गया माता का शरीर काला?

काली मां ने रक्तबीज को नियमित युद्ध में हराने की कोशिश की, लेकिन हर बार मरने पर एक हजार से ज्यादा नए रक्तबीज पैदा हो गए. अंततः देवी काली ने अपना नियंत्रण खो दिया और क्रोध में आकर उन्होंने मुख्य रक्तबीज का वध कर दिया और उसका सारा गंदा खून पी लिया ताकि और कोई उत्पत्ति न हो सके. इसके साथ ही, बाकी राक्षस भी मर गए. लेकिन इस प्रक्रिया में काली ने जो क्रोध प्राप्त किया था, उससे वह बहुत हिंसक हो गई थी. साथ ही, रक्तबीज के गंदे खून से उनके शरीर का रंग काला पड़ गया था और उनके अंदर जलन होने लगी. उनहोंने अपने आस-पास के सभी लोगों को मारना शुरू कर दिया और अपने क्रोध से अंधी हो गई.

ये भी पढ़ें- Aaj Ka Panchang 17 October 2026: नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर सूर्य गोचर होगा, जानें आज का शुभ मुहूर्त

माता ने काटी अपनी जीभ!

इसके बाद देवता भगवान शिव के पास गए और मदद मांगी. इसके बाद भगवान शिव उस रास्ते पर लेट गए जहां से काली पार करने वाली थी. जैसे ही भगवान शिव उसके पैरों के नीचे आए, उसे एहसास हुआ कि वह अपने ही पति की छाती पर खड़ी है. काली के हृदय में अपराधबोध और दुःख की लहर दौड़ गई और उसे एहसास हुआ कि वह पार्वती है और उसे उस संसार को बचाना है जिसका वह विनाश कर रही थी. क्रोध और अपराधबोध को संतुलित करने के लिए, काली को समझ नहीं आया कि क्या करे और उसने अपनी जीभ काट ली ताकि सारा क्रोध दूर हो जाए और वह शांत हो जाए.

क्योंकि यह सब रात्रि में हुआ था, जो कि प्राणियों के विश्राम का समय होता है, इसलिए उन्हें कालरात्रि कहा जाने लगा. बाद में, कालरात्रि माता ने शुंभ और निशुंभ का पीछा करके उनका वध कर दिया. इसलिए, बुराई पर विजय पाने की शक्ति का उत्सव मनाने के लिए नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है.

रात्रि की रक्षक 'मां कालरात्रि'

कुछ कथाओं में वर्णन मिलता है कि माता कालरात्रि की रचना लोगों और जानवरों को रात में बुरी आत्माओं से बचाने के लिए की गई थी क्योंकि रात विश्राम का समय होता है और रात में सिर्फ राक्षस ही जागते हैं. इसलिए, कालरात्रि एक भयंकर आक्रमणकारी रूप धारण कर लेती हैं और जानवरों और मनुष्यों को राक्षसों और बुरी आत्माओं के आक्रमण से बचाती हैं. भोर की किरण के साथ, कालरात्रि भी अदृश्य हो जाती हैं और शाम ढलते ही वापस आ जाती हैं.

कालरात्रि मां की पूजा का महत्व क्या है?

भले ही कालरात्रि माता को दुर्गा मां का क्रोधी और उग्र स्वरूप माना गया हो लेकिन वे हमेशा भक्तों पर शुभ दृष्टि रखती है. वे रोग-दोष से मुक्ति दिलाती है. साथ ही भय और अकाल मृत्यु के डर से भी मुक्ति प्रदान करती है. मां कालरात्रि की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियां मनुष्यों पर हावी नहीं होती हैं. उनके मंत्रों का जप करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है.

ये भी पढ़ें- Shardiya Navratri 2026 Wishes: "बोलो अम्बे मात की जय", शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं, अपनों को भेजें ये प्यारे संदेश 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Continue reading on the app

  Sports

WCL 2026: वेस्टइंडीज चैंपियंस ने जीता खिताब, क्रिस गेल ने 11 छक्कों के साथ ठोके 142 रन, ब्रावो ने लिए 8 विकेट

West Indies Champions, World Championship of Legends 2026: इंग्लैंड चैंपियंस को फाइनल में हराकर वेस्टइंडीज चैंपियंस ने WCL 2026 का खिताब जीता. Mon, 19 Oct 2026 06:52:07 +0530

  Videos
See all

Firing on Tiger Shroff: गोली लगने के बाद भी टाइगर ने कार चलाकर बचाई जान #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-19T02:58:36+00:00

Tiger Shroff Firing Case: 'आंखों के सामने चली गोलियां',चश्मदीद सलमा का बड़ा खुलासा | Mumbai |Bishnoi #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-19T02:57:39+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers