दुनिया की मेज पर दबदबा, कमजोरी नहीं मजबूती से होती है डील; पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ लफ्जों में कहा है कि आज का भारत किसी के दबाव में झुककर नहीं, बल्कि पूरे भरोसे और मजबूती के साथ व्यापार के सौदे कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की मजबूत अर्थव्यवस्था, टिकने वाली सरकार और बेहतर नीतियों की वजह से दुनिया अब भारत की बात ध्यान से सुनती है. पीएम के मुताबिक, तेजी से बढ़ती तरक्की और विदेशी निवेशकों का बढ़ता भरोसा इस बात का सबूत है कि हम अब "दमदार स्थिति" में हैं.
पुरानी सरकारों पर निशाना
पिछली यूपीए सरकार का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले व्यापार को लेकर होने वाली बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलता था. उस समय फैसले लेने में बहुत देरी होती थी और नीतियां भी साफ नहीं थीं. इसके उलट, आज की सरकार ने पूरी प्लानिंग के साथ 38 देशों के साथ फ्री ट्रेड समझौते किए हैं, जिससे दुनिया भर में भारत का कद बढ़ा है.
बड़े देशों के साथ हुई शानदार डील्स
पिछले कुछ सालों में भारत ने दुनिया के बड़े बाजारों के साथ अहम समझौते किए हैं, जिनका सीधा फायदा जमीन पर दिखने लगा है.
अमेरिका: भारतीय सामान पर लगने वाले भारी टैक्स में बड़ी कटौती हुई है. सरकार का कहना है कि कई चीजों पर टैक्स 50% से घटकर अब सिर्फ 18% रह गया है, जिससे हमारे व्यापारियों को फायदा होगा.
यूरोप: यूरोपीय यूनियन के 27 देशों के बाजार अब भारतीय सामान के लिए खुल गए हैं. इससे खासतौर पर कपड़ों, दवाओं और गाड़ियों के पुर्जे बनाने वालों को नए मौके मिलेंगे.
ब्रिटेन: ब्रिटेन के साथ हुए समझौते के तहत भारत के 99% सामान पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा. उम्मीद है कि 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार 120 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा.
छोटे कारोबारियों और कारीगरों की चांदी
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इन समझौतों का सबसे ज्यादा फायदा छोटे और मंझोले उद्योगों (MSME) को मिलेगा. कपड़ा, चमड़ा, केमिकल और हाथ से बनी चीजों (हस्तशिल्प) को दुनिया भर के बाजारों में जगह मिलेगी. इससे न केवल कमाई बढ़ेगी, बल्कि लोगों को काम के नए अवसर भी मिलेंगे. पीएम ने यह भी साफ किया कि सिर्फ टैक्स कम होना काफी नहीं है. अगर हमें दुनिया के बाजार में टिकना है, तो सामान की क्वालिटी, उसकी पैकिंग और नए आइडियाज पर भी पूरा ध्यान देना होगा.
आगे की तैयारी
भारत का लक्ष्य सिर्फ सामान बेचना नहीं, बल्कि दुनिया के साथ लंबे समय का रिश्ता बनाना है. सरकार अब सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के खर्च (लॉजिस्टिक्स) को कम करने और डिजिटल ढांचे को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है. जानकारों का मानना है कि अगर ये योजनाएं सही से लागू हुईं, तो आने वाले समय में भारत पूरी दुनिया के लिए सामान सप्लाई करने का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है.
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शी चिनफिंग का लेख 'चीन के वर्तमान आर्थिक कार्यों के प्रमुख लक्ष्य' प्रकाशित होगा
बीजिंग, 15 फरवरी (आईएएनएस)। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के महासचिव शी चिनफिंग का देश के वर्तमान आर्थिक कार्यों के प्रमुख लक्ष्यों पर एक लेख 16 फरवरी, सोमवार को प्रकाशित होगा। यह शी चिनफिंग द्वारा 10 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय आर्थिक कार्य सम्मेलन में दिए गए भाषण का एक अंश है।
चीन के राष्ट्रपति और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष शी चिनफिंग का यह लेख सीपीसी केंद्रीय समिति की प्रमुख पत्रिका छ्यूशी जर्नल के इस वर्ष के चौथे अंक में प्रकाशित होगा।
लेख में कहा गया कि वर्ष 2026 में आर्थिक कार्यों में कई काम करने हैं, हमें मुख्य बिंदुओं को समझना होगा और आवश्यक बातों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। घरेलू मांग को प्राथमिकता देने के सिद्धांत का पालन करते हुए एक मजबूत घरेलू बाजार का निर्माण करना आवश्यक है। उपभोग को बढ़ावा देने और निवेश का विस्तार करने के लिए समन्वित प्रयास करने चाहिए, और अपने देश के विशाल बाजार लाभ का सदुपयोग करने की जरूरत है।
लेख में उपभोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष कदम उठाने, शहरी और ग्रामीण निवासियों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं बनाकर उन्हें लागू करने, उच्च गुणवत्ता वाले सामान और सेवाओं की आपूर्ति का विस्तार करने तथा संस्कृति व पर्यटन जैसे सेवा उपभोग की क्षमता को उजागर करने पर प्रकाश डाला गया।
साथ ही, लेख में नवाचार-संचालित विकास का पालन करते हुए नए विकास कारकों के संवर्धन और विस्तार में तेजी लाने पर भी उल्लेख किया गया। कहते हैं कि तकनीकी नवाचार के माध्यम से अग्रणी औद्योगिक उन्नयन पर कायम रखते हुए लगातार नए प्रकार की उत्पादकता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रतिभाओं के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत योजना तैयार करना बहुत आवश्यक है।
लेख में पेइचिंग (पेइचिंग-थ्येनचिन-हपेइ क्षेत्र), शांगहाई (यांग्त्ज़ी नदी डेल्टा क्षेत्र), और क्वांगतोंग-हांगकांग-मकाओ महा खाड़ी क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित करने पर भी जोर दिया गया, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार के विश्व स्तरीय स्रोत तैयार करना है। इसके साथ ही, एआई प्लस के एकीकरण का और अधिक विस्तार करने, एआई शासन में सुधार करने, तथा विज्ञान व प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय सेवाओं में नवाचार करने पर भी रेखांकित किया गया।
इसके अलावा, लेख में सुधारों का पालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले विकास की गतिशीलता और जीवंतता को बढ़ावा देने, विदेशों के लिए खुलेपन का पालन करते हुए बहु-क्षेत्रीय सहयोग और उभय जीत को बढ़ावा देने, समन्वित विकास को बनाए रखते हुए शहरी-ग्रामीण एकीकरण तथा क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने, दोहरे कार्बन सिद्धांत का पालन करते हुए व्यापक हरित परिवर्तन को बढ़ावा देने, लोगों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए लोगों के लिए अधिक व्यावहारिक कार्य करने का प्रयास करने आदि पहलुओं पर भी विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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