जरूरत की खबर- महाराष्ट्र में 1,400 किलो केले जब्त:केमिकल में डुबोकर पका रहे थे, इसे खाने के हेल्थ रिस्क, ऐसे पहचानें केमिकल्स
हाल ही में महाराष्ट्र ‘फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (FDA) ने नवी मुंबई के APMC फ्रूट मार्केट में कार्रवाई की। यहां केमिकल से पकाए जा रहे करीब 1,400 किलो केले जब्त किए गए। जांच में सामने आया कि केलों को एथेफॉन केमिकल घोल में सीधे डुबोकर पकाया जा रहा था। जबकि यह तरीका सुरक्षित मानकों के विरुद्ध है। इससे पहले अगस्त महीने में कर्नाटक के उडुपी में भी करीब 10,890 किलो केले जब्त किए गए थे। वहां भी केले पकाने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन सामने आया था। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे केले खाने से लंबे समय में डाइजेस्टिव इश्यू से लेकर किडनी और लिवर डैमेज तक का रिस्क होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं हम भी बाजार से केमिकल्स वाले केले तो नहीं खरीद रहे हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में केमिकल से पके केले पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- देवेन्द्र कुमार दुबे, फूड सेफ्टी ऑफिसर, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, दमोह डॉ. संदीप दोशी, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- केले को केमिकल से पकाने की जरूरत क्यों पड़ती है? जवाब- कच्चे केले को प्राकृतिक रूप से पकने में ज्यादा समय लगता है। इसलिए कारोबारियों को बाजार की मांग के अनुसार केले जल्दी पकाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। इसके प्रमुख कारण हैं- हालांकि कुछ कारोबारी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए गलत तरीकों से केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। सवाल- केलों को नेचुरल तरीके से पकने में कितना समय लगता है? जवाब- केले को प्राकृतिक रूप से पकने में आमतौर पर 4-7 दिन लगते हैं। हालांकि, यह समय केले की किस्म, पकने की अवस्था और तापमान पर निर्भर करता है। ठंडे वातावरण में केले धीरे पकते हैं, जबकि गर्म वातावरण में जल्दी पक सकते हैं। सवाल- केले जल्दी पकाने के लिए कौन-से केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं? जवाब- केले पकाने के लिए मुख्य रूप से एथिलीन गैस का यूज किया जाता है। एथेफॉन भी एक ऐसा केमिकल है, जिससे एथिलीन निकलती है। हालांकि दोनों के इस्तेमाल का तरीका अलग है। एथिलीन गैस एथेफॉन ध्यान रखें- कुछ कारोबारी कैल्शियम कार्बाइड केमिकल का इस्तेमाल करते हैं, जो कि पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सवाल- केमिकल्स से केले पकाने का प्रोसेस क्या है? जवाब- इसके लिए राइपनिंग चैंबर में निर्धारित मात्रा में एथिलीन गैस यूज किया जाता है। इसकी मदद से केले समान रूप से पकते हैं। पूरा प्रोसेस ग्राफिक में देखिए- सवाल- गलत तरीके से पकाए गए केले खाने से सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं? जवाब- इसका असर तुरंत से लेकर लंबे समय बाद तक दिख सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को ये हेल्थ रिस्क ज्यादा हो सकते हैं? जवाब- गलत तरीके से पकाए गए केले खाने से कुछ लोगों को रिस्क ज्यादा होता है, जैसेकि- सवाल- क्या केले को बाहर से देखकर पहचान सकते हैं कि ये नेचुरली पका है या केमिकल के गलत इस्तेमाल से? जवाब- हां, रंग और छिलके की चमक से केले के गलत तरीके से पकाए जाने के कुछ संकेत मिलते हैं, इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या दोनों तरह के केलों के न्यूट्रिशन में भी फर्क होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- केला खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- केला खरीदते समय उसकी साफ-सफाई, ताजगी और क्वालिटी पर ध्यान दें। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- FSSAI के मुताबिक, फलों को पकाने के क्या नियम हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए– सवाल- प्रतिबंधित केमिकल से पके फलों की शिकायत कहां और कैसे करें? जवाब- अगर आपको शक है कि फल पकाने के लिए प्रतिबंधित केमिकल का इस्तेमाल किया गया है तो शिकायत के लिए ये तरीके अपना सकते हैं- सवाल- तय मात्रा से ज्यादा केमिकल यूज करने या गलत तरीके से फल पकाने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- ************** ग्राफिक्स– विपुल शर्मा …………………… जरूरत की खबर- गरबा खेलने से पहले 5 जरूरी तैयारियां: साथ रखें 9 मेडिकल एसेंशियल्स, गरबा पंडाल में पहुंचते ही चेक करें ये 3 चीजें गरबा सिर्फ एक नृत्य नहीं, बल्कि आस्था, उत्सव और लोगों को जोड़ने वाली परंपरा है। 'गरबा' शब्द संस्कृत के 'गर्भ' से निकला है, जिसका अर्थ ‘कोख’ होता है। पारंपरिक रूप से यह नृत्य एक मिट्टी के घड़े और उसके भीतर जलते दीपक के चारों ओर किया जाता था, जो जीवन और सृजन का प्रतीक माना जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
आपका पैसा- निवेश का पहला नियम- ‘पैसा गंवाना नहीं है’:पहली बार पैसा इन्वेस्ट कर रहे हैं तो पहले ये 9 नियम समझें, ये रही चेकलिस्ट
शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट का एक मशहूर नियम है- "पहला नियम, पैसा मत गंवाइए। दूसरा नियम यह है कि ‘पहला नियम’ मत भूलिए।" निवेश की दुनिया में यह बात जितनी सरल लगती है, उतनी ही महत्वपूर्ण भी है। अक्सर लोग निवेश शुरू करते समय सिर्फ रिटर्न पर ध्यान देते हैं। लेकिन यह नहीं सोचते कि अगर बाजार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला तो क्या होगा। यहीं से रिस्क मैनेजमेंट की जरूरत शुरू होती है। सही स्ट्रैटजी निवेश को सिर्फ बढ़ाती नहीं, बल्कि उसे ‘बड़े झटकों’ से बचाने का भी काम करती है। हर निवेशक की उम्र, आय, जिम्मेदारियां और फाइनेंशियल गोल्स अलग होते हैं। इसलिए सभी के लिए एक जैसी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी काम नहीं करती। किसी युवा निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता एक रिटायर्ड व्यक्ति से अलग हो सकती है। ऐसे में रिस्क मैनेजमेंट निवेश को व्यक्ति की जरूरत और क्षमता के अनुसार ढालने में मदद करता है। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में रिस्क मैनेजमेंट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- कुशाग्र मोहन, फाइनेंशियल एक्सपर्ट, को-फाउंडर, निक्सेपा कैपिटल, लखनऊ सवाल- रिस्क मैनेजमेंट क्या है और निवेश में इसकी जरूरत क्यों है? जवाब- रिस्क मैनेजमेंट का मतलब है, निवेश में संभावित नुकसान को कम करने के लिए पहले से प्लानिंग करना और सही स्ट्रैटजी अपनाना। इसका उद्देश्य अपनी क्षमता और लक्ष्यों के अनुसार रिस्क को कंट्रोल करना है। निवेश में रिस्क मैनेजमेंट क्यों जरूरी है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- नए निवेशकों के लिए रिस्क मैनेजमेंट के जरूरी नियम क्या हैं? जवाब- नए निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियम हैं, डायवर्सिफिकेशन, नियमित निवेश और अनुशासन। सही रिस्क मैनेजमेंट अपनाने से नुकसान की संभावना कम होती है और लॉन्ग टर्म में बेहतर फाइनेंशियल रिजल्ट्स मिलते हैं। ग्राफिक में रिस्क मैनेजमेंट के 10 नियम देखिए- सवाल- रिस्क लेने की क्षमता और रिस्क टॉलरेंस (सहनशीलता) में क्या अंतर है? जवाब- इन दोनों के बीच अंतर पॉइंटर्स से समझिए- रिस्क लेने की क्षमता रिस्क टॉलरेंस सवाल- रिस्क मैनेजमेंट के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- रिस्क मैनेजमेंट का मकसद केवल नुकसान से खुद को बचाना नहीं है। इसके साथ निवेश का ऐसा स्ट्रक्चर तैयार करना है, जो बाजार की किसी भी परिस्थिति में आपके फाइनेंशियल गोल को पटरी से न उतरने दे। इसके लिए ये काम करें- सवाल- युवा निवेशकों के लिए जोखिम लेने की अधिकतम सीमा क्या होनी चाहिए? जवाब- इसके लिए फाइनेंशियल प्लान में कुछ पॉपुलर रूल हैं, लेकिन आप अपनी जरूरत के मुताबिक इन्हें बदल सकते हैं। जरूरी नहीं है कि ये नियम जैसे-के-तैसे फॉलो किए जाएं। ये हैं नियम- 1. 100 माइनस एज रूल उदाहरण: अगर आपकी उम्र 25 साल है, तो 100-25= 75। यानी अपने निवेश का 75% हिस्सा इक्विटी और 25% हिस्सा डेट, FD, PPF या बॉन्ड में रखें। 2. 110 या 120 माइनस एज रूल अगर आपकी उम्र कम है, निवेश का समय लंबा है और ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं तो 100 की जगह 110 या 120 में से अपनी उम्र घटाकर इक्विटी का अनुपात तय कर सकते हैं। उदाहरण: अगर आपकी उम्र 25 साल है, तो 120-25 = 95। यानी निवेश का 95% हिस्सा इक्विटी और 5% हिस्सा डेट या अन्य अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेशों में रखा जा सकता है। 3. कोर-सैटेलाइट स्ट्रैटजी उदाहरण: अगर आपके पास निवेश के लिए ₹10 लाख हैं तो ₹8 लाख इंडेक्स या लार्ज-कैप फंड में और ₹2 लाख मिड-कैप, स्मॉल-कैप या अन्य हाई-ग्रोथ निवेशों में रख सकते हैं। सवाल- महिलाओं को इन्वेस्टमेंट रिस्क मैनेजमेंट में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इन्वेस्ट में रिस्क मैनेजमेंट हर किसी के लिए जरूरी है। लेकिन महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। ग्राफिक में देखिए- सवाल- वरिष्ठ नागरिक अपने पोर्टफोलियो में रिस्क और सिक्योरिटी का संतुलन कैसे बनाएं? जवाब- रिटायरमेंट के बाद निवेश का उद्देश्य केवल ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि रेगुलर इनकम और पूंजी की सुरक्षा होता है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें- सवाल- रिटायरमेंट से 5-10 वर्ष पहले पोर्टफोलियो में क्या बदलाव करने चाहिए? जवाब- अगर रिटायरमेंट के करीब हैं तो इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी संतुलित और सुरक्षित बनाएं। इस दौरान ये बदलाव किए जा सकते हैं- सवाल- छोटे, मध्यम और बड़े पोर्टफोलियो वाले निवेशकों की स्ट्रैटजी में क्या अंतर होना चाहिए? जवाब- पोर्टफोलियो का आकार बढ़ने के साथ निवेश की प्राथमिकताएं और रिस्क मैनेजमेंट की स्ट्रैटजी भी बदलनी चाहिए। एक ही स्ट्रेटजी हर निवेशक के लिए सही नहीं होती है। छोटे पोर्टफोलियो वाले निवेशक मध्यम पोर्टफोलियो वाले निवेशक बड़े पोर्टफोलियो वाले निवेशक सवाल- निवेशक रिस्क मैनेजमेंट में क्या गलतियां करते हैं? जवाब- निवेशक रिस्क मैनेजमेंट में कुछ कॉमन गलतियां करते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- बाजार में निवेश से पहले कौन-सी चेकलिस्ट फॉलो करनी चाहिए? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- किसी तरह का नुकसान होने पर निवेशकों को क्या करना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- *************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ……………………. ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- सैलरी बढ़ते ही खर्चे न बढ़ाएं:करें ये 6 काम, लाइफस्टाइल के साथ फ्यूचर भी सेफ, एक्सपर्ट से समझें पूरा फाइनेंशियल प्लान सैलरी इंक्रीमेंट साल की सबसे बड़ी खुशखबरी होती है। प्रमोशन या इंक्रीमेंट के बाद लोग बेहतर लाइफस्टाइल, महंगी चीजों और ज्यादा सुविधाओं की तरफ आकर्षित होते हैं। लेकिन यहीं से शुरू होता है ‘लाइफस्टाइल इंफ्लेशन’ यानी आमदनी बढ़ने के साथ खर्च भी तेजी से बढ़ जाना। पूरी खबर पढ़ें…
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