पवन सिंह की पत्नी के सपोर्ट में उतरीं अक्षरा सिंह, एलिमनी की डिमांड पर बोलीं- उन्हें गुजारा भत्ता जरूर मिलना चाहिए...
Akshara Singh Supported Pawan Singh Wife Jyoti: भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में इन दिनों 'पावर स्टार' पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रही कानूनी जंग सुर्खियों में है. इस विवाद में अब भोजपुरी क्वीन अक्षरा सिंह की एंट्री ने हलचल को और बढ़ा दिया है. अक्षरा सिंह ने पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह की एलिमनी की मांग का पुरजोर समर्थन किया है, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.
अक्षरा सिंह का बेबाक समर्थन
अक्षरा सिंह पूर्व में पवन सिंह के साथ रिलेशनशिप में रह चुकी हैं. अब पवन और ज्योति के तलाक की खबरों के बीच उन्होंने महिलाओं के अधिकारों पर जोर देते हुए ज्योति सिंह का पक्ष लिया. उन्होंने कहा कि जब एक लड़की अपना घर-परिवार छोड़कर किसी के साथ वैवाहिक बंधन में बंधती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उस पुरुष की होती है. अक्षरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "ज्योति सिंह को गुजारा भत्ता लेने का पूर्ण अधिकार है. अगर वह 100 करोड़ रुपये की भी मांग करें, तो एक स्त्री के त्याग के सामने वह राशि भी कम है." अक्षरा के मुताबिक, समाज को यह समझना चाहिए कि एक महिला को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आर्थिक सुरक्षा की जरूरत होती है.
ज्योति सिंह की मांग
ज्योति सिंह काफी समय से पवन सिंह से अलग रह रही हैं और उन्होंने अदालत में आर्थिक सहायता के लिए याचिका दायर की है. उनकी दलील है कि पवन सिंह के साथ रहने के दौरान उनकी जो सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवनशैली थी, उसे बनाए रखने के लिए उनके पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है. भारतीय वैवाहिक कानून का हवाला देते हुए ज्योति ने तर्क दिया कि दोनों पक्षों की आय और कमाने की क्षमता में जमीन-आसमान का फर्क है, इसलिए वह स्थायी गुजारा भत्ता पाने की कानूनी हकदार हैं.
शादी टूटने पर लगाए गंभीर आरोप
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, ज्योति सिंह ने अपनी शादी विफल होने के लिए पवन सिंह पर भावनात्मक प्रताड़ना, वैवाहिक कलह और परित्याग के गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं जो उनके नियंत्रण से बाहर थीं, जिसके कारण उन्हें अलग होने पर मजबूर होना पड़ा. इन्हीं आधारों पर उन्होंने अपने भविष्य और कानूनी लड़ाई के खर्च के लिए मुआवजे की मांग की है.
कोर्ट में पवन सिंह का पलटवार
दूसरी ओर, पवन सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने ज्योति सिंह की मांगों को 'अनुचित' बताते हुए अदालत में चुनौती दी है. पवन सिंह की ओर से यह तर्क दिया गया है कि वह खुद कानूनी राहत के हकदार हैं. वर्तमान में यह हाई-प्रोफाइल मामला कोर्ट में है, जहां न्यायाधीश दोनों पक्षों के वित्तीय विवरण, बैंक रिकॉर्ड और शादी से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रहे हैं.
दुनिया भर से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया से जिम्मेदार एआई नवाचार का वैश्विक केंद्र बन रहा भारत : केंद्र
नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। सरकार ने रविवार को कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया भर से मिली जबरदस्त भागीदारी यह दिखाती है कि भारत जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नवाचार का एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र बन रहा है। यह पहल पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस यानी लोगों, पर्यावरण और प्रगति की सोच से प्रेरित है।
16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले तीन प्रमुख ग्लोबल इम्पैक्ट चुनौतियों-एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाआई-के फाइनलिस्ट घोषित कर दिए गए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इन चुनौतियों को ऐसे एआई समाधान को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था, जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालें और वैश्विक जरूरतों के अनुरूप हों।
इन तीनों प्रतियोगिताओं में मिलाकर 60 से अधिक देशों से 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि को दर्शाता है। कई चरणों की सख्त जांच प्रक्रिया के बाद 70 टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है।
ये टीमें 16 और 17 फरवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन में आयोजित ग्रैंड फिनाले और पुरस्कार समारोह में अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी।
एआई फॉर ऑल ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज में अकेले ही 60 से ज्यादा देशों से 1,350 से अधिक आवेदन आए। इस चुनौती का उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु, शासन, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर उपयोगी एआई समाधान तैयार करना था।
इसके तहत चुनी गई 20 शीर्ष टीमों ने कई उपयोगी तकनीकें विकसित की हैं, जैसे एआई आधारित संक्रमण जांच उपकरण, मिट्टी की गुणवत्ता बताने वाली प्रणाली, जलवायु जोखिम विश्लेषण प्लेटफॉर्म, डिजिटल स्वास्थ्य जांच, साइबर सुरक्षा समाधान, उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ाने वाले टूल और शिक्षा को आसान बनाने वाली तकनीकें।
मंत्रालय ने कहा कि ये नवाचार दिखाते हैं कि एआई कैसे समान विकास को बढ़ावा दे सकता है और खासकर ग्लोबल साउथ देशों में सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बना सकता है।
एआई बाय हर ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज में 50 से अधिक देशों से 800 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए, जिसका उद्देश्य महिलाओं के नेतृत्व में एआई नवाचार को बढ़ावा देना है।
इसमें चुनी गई 30 शीर्ष महिला उद्यमी स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास, वित्तीय समावेशन, रोजगार, कृषि, शिक्षा और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान पर काम कर रही हैं।
इन परियोजनाओं में एआई से कैंसर और आंखों की जांच, बहुभाषी मेडिकल निर्णय सहायता प्रणाली, वॉयस-टू-ईएमआर प्लेटफॉर्म, पोषण तकनीक, क्रेडिट इंटेलिजेंस सिस्टम और ईएसजी ऑटोमेशन जैसे समाधान शामिल हैं।
सरकार ने कहा कि यह पहल समावेशी डिजिटल विकास की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है और महिलाओं को वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अग्रणी भूमिका देने की कोशिश है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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