Delhi में 1 नवंबर से पुराने व्यावसायिक वाहनों की एंट्री बंद, Gurugram Traffic Police ने जारी की एडवाइजरी
दिल्ली में एक नवंबर से बीएस-चार या उससे कम उत्सर्जन मानकों वाले व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। हालांकि, सीएनजी या बिजली से चलने वाले वाहनों को इससे छूट दी जाएगी। गुरुग्राम यातायात पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यातायात पुलिस द्वारा जारी परामर्श के अनुसार, यह प्रतिबंध हल्के मालवाहक वाहनों (एलजीवी), मध्यम मालवाहक वाहनों (एमजीवी), भारी मालवाहक वाहनों (एचजीवी), अन्य ट्रकों और बसों पर लागू होगा। परामर्श में कहा गया है कि सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के अलावा बीएस-चार उत्सर्जन मानकों वाले डीजल बसों और ट्रकों को भी छूट मिलेगी। अखिल भारतीय पर्यटक परमिट (एआईटीपी) के तहत चलने वाले वाहनों और अन्य सेवा व्यवस्थाओं के तहत संचालित वाहनों पर भी ये प्रतिबंध लागू होंगे।
हालांकि, दिल्ली में पंजीकृत बसों को इससे छूट दी जाएगी। गुरुग्राम यातायात पुलिस ने परिवहन कारोबारियों, चालकों और बस संचालकों से अपने वाहनों के उत्सर्जन मानकों और पंजीकरण संबंधी विवरणों की जांच करने तथा दिल्ली में प्रवेश से पहले निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। परामर्श में कहा गया है कि ये उपाय वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण की रक्षा के उद्देश्य से किए गए हैं।
TMC के प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावों पर Election Commission 30 अक्टूबर को करेगा सुनवाई
भारत निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वी गुटों को 30 अक्टूबर को सुनवाई के लिए बुलाया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के उपचुनावों में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के बाद यह पहली सुनवाई होगी।
निर्वाचन आयोग ने 17 सितंबर को जारी अपने अंतरिम आदेश में ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं की सुनवाई की थी। आयोग ने कहा था कि इस मामले में चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता है। आयोग ने उस समय दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के उपचुनावों के दौरान पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद उपचुनाव लड़ने के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए थे। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के संयुक्त सचिव डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वह सुनवाई में शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी गुट बार-बार समय बढ़ाने की मांग कर रहा है।
वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने भी सुनवाई में शामिल होने की बात कही। उन्होंने अपने दावे को लेकर विश्वास जताया। सुनवाई के संबंध में पूछे जाने पर ओ’ब्रायन ने कहा कि इस मामले की प्रक्रिया जुलाई में शुरू हुई थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि निर्वाचन आयोग ने मामले में देरी क्यों की। ओ’ब्रायन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘गद्दारों ने सबसे पहले 22 जून को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा था। आयोग ने हमसे और उनसे छह जुलाई तक जवाब देने को कहा था।
हमने तुरंत जवाब दे दिया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद गद्दारों ने केवल समय बढ़ाने की मांग की। निर्वाचन आयोग के साथ उनका एकमात्र संवाद यही था कि उन्हें जवाब देने के लिए और समय दिया जाए।’’ राज्यसभा सदस्य ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने उदारता दिखाते हुए प्रतिद्वंद्वी गुट को जवाब देने के लिए 70 दिन का अतिरिक्त समय दिया।
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